योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय | yogi adityanath biography hindi

yogi adityanath biography hindi :  योगी आदित्यनाथ  गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर के मंहत व राजनेता, से लेकर उत्तर प्रदेश के मुखमन्त्री होने तक का सफर।

  1. पूर्वाधिकारी – महन्त अवैद्यनाथ
  2. चुनाव-क्षेत्र – गोरखपुर
  3. पदस्थ कार्यालय ग्रहण – 1998
  4. जन्म – 5 जून 1972 (आयु 44 वर्ष)
  5. गढ़वाल, उत्तराखण्ड
  6. राष्ट्रीयता – भारतीय
  7. राजनीतिक – दल भारतीय जनता पार्टी
  8. निवास गोरखनाथ मठ, गोरखपुर
  9. धर्म – हिन्दू (नाथ संप्रदाय)

योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को प्रदेश के विधान सभा चुनावों में भरतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधत्व कर रहे है। 2014 लोकसभा चुनाव में भी यहीं से सांसद चुने गए थे। आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर के पुर्व महन्त अवैधनाथ के उत्ताधिकारी हैं। ये हिन्दू यवाुओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं, तथा इनकी छबि कथित तौर पर एक हिन्दू नेता के रूप में रही हैं।

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योगी आदित्यनाथ का जन्म

योगी आदित्यनाथ एक संत है, जिनका जन्म 5 जून 1972 में पौड गढवाल जिले में स्थित यमकेशर तहसील के पंचुर गाँव के एक गढवाली राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का हुआ। इनके बचपन का नाम “अजय सिंह बिष्ट” है, इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट है जो एक फाॅरेस्ट रेंजर थे, तथा उनकी मां का नाम सावित्री देवी है। अपनी माता-पिता के सात बच्चों में तीन बडी बहनों व एक बडे भाई के बाद ये पांचवे थे एंव इनसे और दो छोटे भाई हैं।

योगी आदित्यनाथ की शिक्षा

इन्होंने 1977 में ”टिहरी“ के गजा के स्थानीय स्कूल में पढाई शुरू की व 1987 में यहाँ से दसवीं की परिक्षा पास की। स्न 1989 में इन्होंने “ऋषिकेश” के श्री भरत मन्दिर इण्टर काॅलेज से इन्होंने इंटरमीडियट की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुशन की पढाई करते हुए ये ”अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद“ से जुडे। 1992 में “श्रीनगर के हेमवती नन्दन बहुगुणा गढवाल विश्वविद्यालय” से इन्होंने गणित में बीएससी की परिक्षा पास की।
कोटद्वार में रहने के दौरान इनके कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें इनके सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान स्नाकोत्तर करने का इनका प्रसास असफल रह गया।

            योगी आदित्यनाथ का जन्म (जीवन परिचय)

इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में पुनः विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश तो लिया लेकिन राम मन्दिर आंदोलन का प्रभाव और प्रवेश को लेकर परेशानी से उनका ध्यान अन्य ओर बंट गया।(जीवन परिचय)
1993 में गणित में एमएससी की पढाई दौरान गुरू गोरखनाथ पर शोध करने ये गोरखनाथ आए। एंव गोरखपुर प्रवास के दौरान ही ये मंहत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए थे जो इनके पडोस के गांव के निवासी और परिवार के पुराने परिचित थे।
अंततः ये मंहत की शरण ही चले गए और दीक्षा ले ली। 1994 में ये पूर्ण “सन्यासी” बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गए।
12 सिंतबर 2014 को गोरखनाथ मदिंर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के निधन के बाद इन्हे यहाँ का मंहत बनाया गया। 2 दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठधीश्वर बनाया गया।

राजनैतिक जीवन

सबसे पहले 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर प्रत्याशी के तौर चुनाव लडे और जीत गए। तब इनकी उम्र केवल 26 वर्ष थीं। वे बारहवीं लोक सभा (1998-99) के सबसे युवा सांसद थे। 1999 में ये गोरखपुर से पुनः सांसद चुने गए।

इन्होंने अप्रैल 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी बनायी।

। 2004 में लोकसभा का चुनाव जीता। 2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए।
इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्टीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इन्हें एक हेलीकाॅप्टर भी दिया गया।(योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय)
19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री पद सौंपा गया।

आदित्यनाथ के भारतीय जनता पार्टी से सम्बन्ध

आदित्यनाथ के भारतीय जनता पार्टी के साथ रिश्ता एक दशक से पुराना है। वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में अच्छा खासा प्रभाव रखते है। इससे पहले उनके पूर्वाधिकारी तथा गोरखनाथ मठ के पूर्व महन्त, महन्त अवैधनाथ भी भारतीय जनता पार्टी से 1991 तथा 1996 का लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।(जीवन परिचय)

लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन

योगी आदित्यनाथ सबसे पहले 1998 में चुनाव भाजपा प्रत्यासी के तौर पर लडे और तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की। लेकिन उसके बाद हर चुनाव में उनका जीत का अंतर बढता गया और वे 1999, 2004, 2009 तथा 2014 में सांसद चुने गए। (जीवन परिचय)

विवाद

7 सितम्बर 2008 को योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे। यह हमला इतना बडा था कि सौ से भी अधिक वाहन हमलावरों ने घेर लिया गया जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान चली गयी। जिलाधिकारी ने बताया कि वह बुरी तरह जख्मी है। तब आधिकारी ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया परन्तु आदित्यनाथ उस जगह जाने को अड गए।
तब उन्होंने शहर में लगे कफ्यू को हटाने की मांग की। दिन उन्होंने शहर के मध्य श्ऱद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति देने से मना कर दिया। आदित्यनाथ ने इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ्तारी दी। आदित्यनाथ को सीअआरपीसी की धारा 151।, 146, 147, 279, 506 के तहत जेल भेज दिया गया। उनपर कार्यवाही का असर हुआ कि मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फूंक दिए गए, जिसका आरोप उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लगा।(योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय)
यह दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गए। उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन जिलाधिकारी हरि ओम और पुलिस प्रमुख राजा श्रीवस्ताव का तबादला हो गया। कथित रूप् से आदित्यनाथ के ही दबाव के करण मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश सरकार को यह कार्यवाही करनी पडी।

मुख्यमंत्री निर्वाचन

योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। शपथ समरोह लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में हुआ। इनके साथ दो उप-मुख्यमंत्री भी बनाये गए। उत्तर प्रदेश के राजनितिक इतिहास में पहली बार दो उप-मुख्यमंत्री बने। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पाटी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। मंच पर अखिलेश यादव और मुलायम सिंह भी मौजूद रहे।(योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय)



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