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ठग-बुद्धि

ठग-बुद्धि सपाट सडकों पर लू के बवंडर और…… पुल के इस पार, उस पार फलों के ढेर का खरीदार ढूंढते यह मासूम उखडे उजडे, चेहरे कितने झुलसे से हैं और….. तुम हम उनसे चार छह पैसे कम में सामान खुश हैं, तृप्त है अपनी ठग-बुद्धि पर। उप-वास की रात उप-वास …

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