Jyotish

सूर्य ग्रह का प्रभाव और उपाय

[vc_row][vc_column][vc_column_text]सूर्य जगत पिता है,इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है,यह आत्मा कारक और पितृ कारक है,पुत्र राज्य सम्मान पद भाई शक्ति दायीं आंख चिकित्सा पितरों की आत्मा शिव और राजनीति का कारक है.मेष राशि में उच्च का एवं तुला में नीच का ना जाता है,चन्द्रमा देव ग्रह है,तथा सूर्य का मित्र है,मंगल भी सूर्य का मित्र है,गुरु सूर्य का परम मित्र है,बुध सूर्य के आसपास रहता है,और सूर्य का मित्र है,शनि सूर्य पुत्र है लेकिन सूर्य का शत्रु है,कारण सूर्य आत्मा है और आत्मा का कोई कार्य नही होता है,जबकि शनि कर्म का कारक है,शुक्र का सूर्य के साथ संयोग नही हो पाता है,सूर्य गर्मी है और शुक्र रज है सूर्य की गर्मी से रज जल जाता है,और संतान होने की गुंजायस नही रहती है,इसी लिये सूर्य का शत्रु है,राहु विष्णु का विराट रूप है,जिसके अन्दर सम्पूर्ण विश्व खत्म हो रहा है,राहु सूर्य और चन्द्र दोनो का दुश्मन है,सूर्य के साथ होने पर पिता और पुत्र के बीच धुंआ पैदा कर देता है,और एक दूसरे को समझ नही पाने के कारण दोनो ही एक दूसरे से दूर हो जाते है,केतु सूर्य का सम है,और इसे किसी प्रकार की शत्रु या मित्र भावना नही है,सूर्य से सम्बन्धित व्यक्ति पिता चाचा पुत्र और ब्रहमा विष्णु महेश आदि को जाना जाता है,आत्मा राज्य यश पित्त दायीं आंख गुलाबी रंग और तेज का कारक है।[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_custom_heading text=”कुंडली में सूर्य के 12 घरों से जानिये कि आपको क्या मिलने वाला है?” font_container=”tag:h2|text_align:center”][vc_column_text]ज्योतिष में सूर्य को राजा की पदवी प्रदान की गयी है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा एवं पिता का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य द्वारा ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है और ग्रहों की इनसे दूरी या नजदीकी उन्हें अस्त भी कर देती है. सूर्य सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप हैं. कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि भी माना जाता है. सूर्य पर किसी भी कुंडली में एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने पर उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है. व्यक्ति की आजीविका में सूर्य सरकारी पद का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य प्रधान जातक कार्यक्षेत्र में कठोर अनुशासन अधिकारी, उच्च पद पर आसीन अधिकारी, प्रशासक, समय के साथ उन्नति करने वाला, निर्माता, कार्यो का निरीक्षण करने वाला बनता है. बारह राशियों में से सूर्य मेष, सिंह तथा धनु में स्थित होकर विशेष रूप से बलवान होता है तथा मेष राशि में सूर्य को उच्च का माना जाता है. मेष राशि के अतिरिक्त सूर्य सिंह राशि में स्थित होकर भी बली होते हैं. यदि जातक की कुंडली में सूर्य बलवान तथा किसी भी बुरे ग्रह के प्रभाव से रहित है तो जातक को जीवन में बहुत कुछ प्राप्त होता है और स्वास्थ्य उत्तम होता है. सूर्य बलवान होने से जातक शारीरिक तौर पर बहुत चुस्त-दुरुस्त होता है.[/vc_column_text][vc_column_text]
[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_tta_accordion][vc_tta_section title=”कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य” tab_id=”1507703906986-bf8149cc-da8a”][vc_column_text]कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य शुभ फल देने वाला होता है. सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है. पहला घर सूर्य का ही होता है, इसलिए सूर्य का इस घर में होना अत्यंत शभ फलदायक होता है. ऐसा जातक धार्मिक इमारतों या भवनों का निर्माण और सार्वजनिक उपयोग के लिए कुओं की खुदाई करवाता है. उसकी आजीविका का स्थाई स्रोत अधिकांशत: सरकारी होगा. ईमानदारी से कमाये गये धन में बृद्धि होगी. जातक अपनी आंखों देखी बातों पर ही विश्वास करेगा, कान से सुनी गयी बातों पर नहीं. यदि सूर्य अशुभ है तो जातक के पिता की मृत्यु बचपन में ही हो जाती है. पहले भाव का अशुभ सूर्य और पांचवें भाव का मंगल एक-एक कर संतान की मृत्यु का कारण होता है.[/vc_column_text][vc_cta h2=”सूर्य ग्रह के उपाय” h4=”Surya Grah Ke Upay” color=”blue”]1. जातक को 24 वर्ष से पहले ही शादी कर लेंनी चाहिए.
2. दिन के समय संबंध न बनाएं, इससे पत्नी बीमार रहेगी और मृत्यु भी हो सकती है.
3. अपने पैतृक घर में पानी के लिए एक हैंडपंप लगवाएं.
4. अपने घर के अंत में बाईं ओर एक छोटे और अंधेरे कमरे का निर्माण कराएं.
5. पति या पत्नी दोनों में से किसी एक को गुड़ खाना बंद कर देना चाहिए.[/vc_cta][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704914558-34f28664-075b”][vc_cta h2=””]कुंडली के दूसरे भाव का सूर्य यदि शुभ है तो जातक आत्मनिर्भर होगा, शिल्पकला में कुशल और माता-पिता, मामा, बहनों, बेटियो तथा ससुराल वालों का सहयोग करने वाला होगा. यदि चंद्रमा छठवें भाव में होगा तो दूसरे भाव का सूर्य और भी शुभ प्रभाव देगा. आठवें भाव का केतू जातक को अधिक ईमानदार बनाता है. नौवें भाव का राहू जातक को प्रसिद्ध कलाकार या चित्रकार बनता है. नवम भाव का केतू जातक को महान तकनीकी जानकार बनाता है. नवम भाव का मंगल जातक को फैशनेबल बनाता है. यदि सूर्य दूसरे, मंगल पहले और चंद्रमा बारहवें भाव में हो तो जातक की हालत गंभीर हो सकती है और वह हर तरीके से दयनीय होगा. यदि दूसरे भाव में सूर्य अशुभ हो तो आठवें भाव में स्थित मंगल जातक को लालची बनाता है[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. किसी धार्मिक स्थान में नारियल का तेल, सरसों का तेल और बादाम दान करें.
2. धन, संपत्ति, और महिलाओं से जुड़े विवादों से बचें.
3. दान लेने से बचें, विशेषकर चावल, चांदी, और दूध का दान नहीं लेना चाहिए.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य ” tab_id=”1507703907098-5e7f144c-f01e”][vc_cta h2=””]कुंडली के तीसरे भाव का सूर्य अगर शुभ है तो जातक अमीर, आत्मनिर्भर होगा और उसके कई छोटे भाई होंगे. जातक पर ईश्वरीय कृपा होगी और वह बौद्धिक व्यवसाय द्वारा लाभ कमाएगा. वह ज्योतिष और गणित में रुचि रखने वाला होगा. यदि तीसरे भाव में सूर्य अशुभ है और कुण्डली में चन्द्रमा भी अशुभ है तो जातक के घर में दिनदहाडे चोरी या डकैती हो सकती है. यदि पहला भाव पीडित है तो जातक के पडोसियों का विनाश हो सकता है.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. मां को खुश रखते हुए उसका आशिर्वाद लें.
2. दूसरों को चावल या दूध परोसें एवं गरीबों को दान दें.
3. सदाचारी रहें और बुरे कामों से बचने का प्रयास करें.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के चौथे भाव में सूर्य ” tab_id=”1507703975788-a1c22438-085d”][vc_cta h2=””]चौथे भाव में यदि सूर्य शुभ है तो जातक बुद्धिमान, दयालु और अच्छा प्रशासक होगा. उसके पास आमदनी का स्थिर श्रोत होगा. ऐसा जातक मरने के बाद अपने वंशजों के लिए बहुत धन और बडी विरासत छोड जाता है. यदि चंद्रमा भी सूर्य के साथ चौथे भाव में स्थित है तो जातक किसी नये शोध के माध्यम से बहुत धन अर्जित करेगा. ऐसे में चौथे भाव या दसवें भाव का बुध जातक को प्रसिद्ध व्यापारी बनाता है. यदि सूर्य के साथ बृहस्पति भी चौथे भाव में स्थित है तो जातक सोने और चांदी के व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाता है. यदि शनि सातवें भाव में हो तो जातक को रतौंधी या आंख से संबंधित अन्य रोग हो सकता है. यदि सूर्य चौथे भाव में पीडित हो और मंगल दसवें भाव में हो तो जातक की आंखों में दोष हो सकता है लेकिन उसकी किस्मत कमजोर नहीं होगी.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. जातक को चाहिए कि जरूरतमंद और अंधे लोगों को दान दें और खाना बांटें.
2. लोहे और लकड़ी के साथ जुड़ा व्यापार कदापी न करें.
3. सोने, चांदी और कपड़े से सम्बंधित व्यापार लाभकारी रहेंगे.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के पांचवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507703989051-79a897e2-0101″][vc_cta h2=””]यदि सूर्य पांचवें भाव में शुभ है तो निश्चित ही जातक के परिवार तथा बच्चों की प्रगति और समृद्धि होगी. यदि पांचवें भाव में कोई सूर्य का शत्रु ग्रह स्थित है तो जातक को सरकार जनित परेशानियों का सामना करना पडेगा. यदि मंगल पहले अथवा आठवें भाव में हो एवं राहू या केतू और शनि नौवें और बारहवें भाव में हो तो जातक राजसी जीवन जीता है. यदि गुरु नौवें या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक के शत्रुओं का विनाश होगा लेकिन यह स्थिति जातक के बच्चों के लिए ठीक नहीं है. यदि पांचवें भाव का सूर्य अशुभ है और बृहस्पति दसवें भाव में है तो जातक की पत्नी जीवित नहीं रहती और चाहे जितने विवाह करें पत्नियां मरती जाएंगी.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. ऐसे जातक को संतान पैदा करने में देरी नहीं करनी चाहिए.
2. घर (मकान) के पूर्वी भाग में ही रसोई घर का निर्माण करें.
3. लगातार 43 दिनों तक सरसों के तेल की कुछ बूंदे जमीन पर गिराएं.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के छठे भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704647351-a9ca2708-f4e5″][vc_cta h2=””]यदि सूर्य छठे भाव में शुभ हो तो जातक भाग्यशाली, क्रोधी तथा सुंदर जीवनसाथी वाला होता है. यदि सूर्य छठे भाव में हो, चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति दूसरे भाव में हो तो परंपरा का निर्वाह करना फायदेमंद रहता है. यदि सूर्य छ्ठे भाव में हो और सातवें भाव में केतू या राहू हो तो जातक का एक पुत्र होगा और 48 सालों के भाग्योन्नति होगी. यदि दूसरे भाव में कोई भी ग्रह न हो तो जातक को जीवन के 22वें साल में सरकारी नौकरी मिलने के योग बनते हैं. यदि सूर्य अशुभ हो तो जातक के पुत्र और ननिहाल के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड सकता है. जातक का स्वास्थ भी ठीक नहीं रहेगा.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. कुल परम्परा और धार्मिक परम्पराओं कड़ाई से पालन करें अन्यथा परिवार की प्रगति और प्रसन्नता नष्ट हो जायेगी.
2. घर के आहाते (परिसर) में भूमिगत भट्टियों का निर्माण कदापि न करें.
3. रात में भोजन करने के बाद रसोई की आग और स्टोव आदि को दूध का छिड़काव करके बुझाएं.
4. अपने घर के परिसर में हमेशा गंगाजल रखें और बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के सातवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704665060-dd557340-0a1f”][vc_cta h2=””]सातवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ है और यदि बृहस्पति, मंगल अथवा चंद्रमा दूसरे भाव में है तो जातक सरकार में मंत्री जैसा पद प्राप्त करता है. बुध उच्च का हो या पांचवें भाव में हो अथवा सातवां भाव मंगल का हो तो जातक के पास आमदनी का अंतहीन श्रोत होगा. यदि सातवें भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और बृहस्पति, शुक्र या कोई और अशुभ ग्रह ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो तथा बुध किसी भी भाव में नीच हो तो जातक की मौत किसी मुठभेड में परिवार के कई सदस्यों के साथ होती है. सातवें भाव में हानिकारक सूर्य हो और मंगल या शनि दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हो तथा चंद्रमा पहले भाव में हो तो जातक को कुष्ट या ल्यूकोडर्मा जैसे चर्म रोग हो सकते हैं.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. ऐसे जातक नमक का उपयोग कम मात्रा में करें.
2. किसी भी काम को शुरू करने से पहले मीठा खाएं और उसके बाद पानी जरूर पियें.
3. भोजन करने से पहले रोटी का एक टुकड़ा रसोई घर की आग में डालें.
4. काली अथवा बिना सींग वाली गाय को पालें और उसकी सेवा करें, सफेद गाय ना पालें.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के आठवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704688255-f24b45d4-8268″][vc_cta h2=””]आठवें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो उम्र के 22वें वर्ष से सरकार का सहयोग मिलता है. ऐसा सूर्य जातक को सच्चा, पुण्य और राजा की तरह बनाता है. कोई उसे नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं होता. यदि आठवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो दूसरे भाव में स्थित बुध आर्थिक संकट पैदा करेगा. जातक अस्थिर स्वभाव, अधीर और अस्वस्थ्य रहेगा. ऐसा जातक ईमानदार होता है किसी की भी बातों में आ जाता है, जिससे कभी-कभी उसे नुकसान भी होता है.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. ऐसे जातक को चाहिए कि वह घर में कभी भी सफेद कपड़े न रखे.
2. जातक का घर दक्षिण मुखी न हो. उत्तरमुखी घर अत्यधिक फायदे पहुंचाने वाला हो सकता है.
3. हमेशा किसी भी नये काम को शुरू करने से पहले मीठा खाकर पानी पिना फायदेमंद होगा.
4. यदि संभव हो तो किसी जलती हुई चिता में तांबे के सिक्के डालें और बहती नदी में गुड़ बहाएं.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के नौवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704716855-3dc54cf6-ec6b”][vc_cta h2=””]नवमें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो जातक भाग्यशाली, अच्छे स्वभाव वाला, अच्छे पारिवारिक जीवन वाला और हमेशा दूसरों की मदद करने वाला होगा. यदि बुध पांचवें घर में होगा तो जातक का भाग्योदय 34 साल के बाद होगा. यदि नवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो जातक बुरा और अपने भाइयों के द्वारा परेशान किया जाएगा. सरकार से अरुचि और प्रतिष्ठा की हानि हो सकती है. ऐसा जातक भाई के साथ सुखी नहीं रहेगा.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. उपहार या दान के रूप में चांदी की वस्तुएं कभी स्वीकार न करें. अपितु चांदी की वस्तुएं दान करें.
2. ऐसे जातक को पैतृक बर्तन और पीतल के बर्तन नहीं बेचना चाहिए.
3. अत्यधिक क्रोध और अत्यधिक कोमलता से बचें रहना चाहिए.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के दसवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704740676-55ce6713-de4a”][vc_cta h2=””]दसवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ हो तो सरकार से लाभ और सहयोग मिल सकता है. जातक का स्वास्थ्य अच्छा और वह आर्थिक रूप से मजबूत होगा. जातक को सरकारी नौकरी, वाहनों और कर्मचारियों का सुख मिलता रहेगा. ऐसा जातक हमेशा दूसरों पर शक करता है. यदि दसवें भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और शनि चौथे भाव में हो तो जातक के पिता की मृत्यु बचपन में हो जाती है. सूर्य दसवें भाव में हो और चंद्रमा पांचवें घर में हो तो जातक की आयु कम होगी. यदि चौथे भाव में कोई ग्रह न हों तो जातक सरकारी सहयोग और लाभ से वंचित रह जाएगा.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. ऐसे जातक को चाहिए कि कभी भी काले और नीले कपड़े न पहनें.
2. किसी नदी या नहर में लगातार 43 दिनों तक तांबें का एक सिक्का डालना अत्यंत शुभ फल देगा.
3. जातक का मांस मदिरा के सेवन से बचें रहना फायदेमंद होगा.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के ग्यारहवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704755816-d4b8f34c-b19a”][vc_cta h2=””]यदि ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ है तो जातक शाकाहारी और परिवार का मुखिया होगा. जातक के तीन बेटे होंगे औए उसे सरकार से लाभ मिलेगा. ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ नहीं है और चंद्रमा पांचवें भाव में है और सूर्य पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो यह जातक की आयु को कम करने वाली होती है.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. ऐसे जातक को चाहिए कि वह मांसहार और शराब के सेवन से बचे.
2. जातक को रात में सोते समय बिस्तर के सिरहने बादाम या मूली रखकर सोना चाहिए.
3. दूसरे दिन उस बादाम या मूली को मंदिर में दान करने से आयु और संतान सुख मिलता है.[/vc_column_text][/vc_tta_section][vc_tta_section title=”कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य ” tab_id=”1507704789288-c6d30aad-73d4″][vc_cta h2=””]यदि बारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक 24 साल के बाद अच्छा धन कमाएगा और जातक का पारिवारिक जीवन अच्छा बितेगा. यदि शुक्र और बुध एक साथ हो तो जातक को व्यापार से लाभ मिलता है और जातक के पास आमदनी के नियमित स्रोत होते हैं. यदि बारहवें भाव का सूर्य अशुभ हो तो जातक अवसाद ग्रस्त, मशीनरी से आर्थिक हानि उठाने वाला और सरकार द्वारा दंडित किया जाने वाला होगा. यदि पहले भाव में कोई और पाप ग्रह हो तो जातक को रात में चैन की नींद नहीं आएगी.[/vc_cta][vc_column_text]उपाय :
1. जातक को हमेशा अपने घर में एक आंगन रखना चाहिए.
2. ऐसे जातक को चाहिए कि वह हमेशा धार्मिक और सच्चा बने.
3. ऐसे जातक को अपने घर में एक चक्की रखना चाहिए.
4. अपने दुश्मनों को हमेशा क्षमा करें.[/vc_column_text][/vc_tta_section][/vc_tta_accordion][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/4″][vc_btn title=”चंद्र ग्रह” color=”pink”][vc_btn title=”मंगल ग्रह” color=”pink”][/vc_column][vc_column width=”1/4″][vc_btn title=”बुध ग्रह” color=”pink”][vc_btn title=”बृहस्पति ग्रह” color=”pink”][/vc_column][vc_column width=”1/4″][vc_btn title=”शुक्र ग्रह” color=”pink”][vc_btn title=”शनि ग्रह” color=”pink”][/vc_column][vc_column width=”1/4″][vc_btn title=”राहू ग्रह” color=”pink”][vc_btn title=”केतु ग्रह” color=”pink”][/vc_column][/vc_row]

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