कदम-कदम से बना एक कारवां Step is composed of a caravan

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कदम-कदम से बना एक कारवां Step is composed of a caravan

छोटे शहरों की कुछ स्त्रियों ने दृढ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर न सिर्फ खुद को आगे बढाया, बल्कि सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए दूसरों को भी अपनी कारवां में शमिल कर लिया। इस काम में उन्होंने सोशल साइट्स को बनाया अपना हथियार…
मैंने विषम परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके और सिर्फ आत्मसंबल से जूझती रही। स्त्रियां हार कर बैठने के बजाय अंतिम सांस तक मुकाबला करें। शशि पुरवार का कहना है कि उनका एक ही ध्येय है लोगो में मातृभाषा हिंदी के प्रति प्रेम जगाना। लोग हिंदी लिखने-बोलने में शर्म नहीं, गर्व महसूस करें।
उन्होंने सामाजिक विसंगतियों के प्रति विरोध दर्ज करने के लिये कलम का सहारा लिया महिलाओं पर अत्याचार, बालशोषण और रूढिवादिता के उन्होंने हिंदी में लिखना शुरू किया। ‘सपने‘ ब्लाॅग के नाम से वे आज हजारों महिलाओं को अपने साथ जोड चुकी हैं, पर उनके लक्ष्य को आघात तब लगा, जब वे जीने के लिए पल-पल संघर्ष करने लगीं।
उनका शरीर पर से नियंत्रण खत्म हो गया। वह चाहकर भी अपनी अंगुलियां हिला नहीं पातीं। लगातार तीन साल तक वह बेड पर पडी रहीं। सिर्फ आत्मविश्वास के बल पर वह दोबारा अपने पैरों पर खडी हो पाईं।
इंदौर की शशि ने बचपन से विरोध झेला है। स्त्री-पुरूष के असमानता को महसूस किया है। इसलिये समाज को सजग करने और लोगों में सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित करने का कोई भी अवसर वह नहीं चूकती हैं, वह कहती हैं, मेरे सिर्फ लक्ष्य है।
पहला, सामाजिक, विसंगतियों पर कुठाराघात करने वाले लेखन को अधिक लोगों तक पहुंचाना।
दूसर, हिंदी को सम्मानजानक स्थिति में पहुंचाना। ‘ केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय की ओर से 100 वुमन अचीवर्स में लिटरेचर कैटेगरी के लिए मिले अवार्ड ने उनके प्रयासों को और धार दे दी। शशि पुरवार की तरह पूरे देश में बहुत सी स्त्रियां है, जो दूर-दराज के इलाकों में रहने के बावजूद अपने गांव-समाज की स्त्रियों को जागरूक कर रही हैं।

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