कुसुम तेल- safflower oil Benefits, uses in hindi

safflower कुसुम नुकीली पत्तियां और पीले या नारंगी फूलों वाला एक लंबा पौधा है। इसके फूल प्राचीन मिस्र में कपड़ों पर डाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। आज, कुसुम की पंखुड़ियों को केसर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, इस पीले मसाले को अक्सर रंग और स्वाद के लिए चावल के व्यंजन में प्रयोग किया जाता है। हालांकि कुसुम केसर की तुलना में काफी सस्ता होता है, लेकिन इसका स्‍वाद में तीखेपन और मोहकता का अभाव है।

कुसुम का तेल – safflower oil in hindi

कुसुम का तेल संयंत्र के बीज से मिलता है। इसकी दो किस्‍में उपलब्‍ध हैं हाई ओलिक और हाई लिनोलेनिक। हाई लिनोलेनिक कुसुम के तेल में पॉलीअनसेचुरेटेड फैट होता है जबकि हाई ओलिक कुसुम तेल में मोनोसेचुरेटेड फैट होता है। पॉलीअनसेचुरेटेड कुसुम तेल अन्हीटिड कुकिंग और मोनोसेचुरेटेड कुसुम तेल हार्इ हीटिंग कुकिंग के लिए अच्‍छा होता है, कुकिंग के लिए यह जैतून के तेल का अच्‍छा विकल्‍प है।

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कुसुम के तेल​ के फायदे – safflower oil Benefits in hindi

  • यह धमनियों को कठोर बनाता है तथा दिल का दौरा पड़ने से रोकता है।
  • कुसुम के तेल में लो सैचुरेटेड फैट की मात्रा होती है। इसकी मदद से यह शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।
  • इस तेल में मौजूद ओमेगा 6 फैटी एसिड शरीर में मौजूद वसा को जमने देने की बजाय उसे जला देते हैं।
  • इस तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
  • यह तेल मधुमेह की बीमारी को रोकता है।
  • कुसुम में विटामिन इ के पूरक मौजूद होते हैं, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं तथा कैंसर होने के खतरे से हमें निजात दिलाते हैं।
  • यह तेल उन सबके लिए भी काफी फायदेमंद साबित होता है जो अपना वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं।

कुसुम तेल काफी हद तक सूरजमुखी जैसा होता है। इसमें असंख्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जा सकता है। इसके अलावा सलाद पर भी इसे छिड़का जा सकता है।

यही नहीं हर्बल कास्मेटिक प्रक्रिया में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

कुसुम तेल की एक विशेष खासियत यह है कि स्थायी परिणाम के लिए इसका इस्तेमाल उपयुक्त होता है।

कुसुम तेल का उपयोग वैसे ही किया जाता है जैसे शेविंग या वैक्सिंग आदि क्रीमों को होता है।

इसका इस्तेमाल रात को करें। मतलब यह कि रात को लगाकर रखें। अधिकतम 3 से 4 घंटे बाद अंग को गुनगुने पानी से धो दें।

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