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प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत

(प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत) : एक छोटे शहर में विजय नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसके पास अपना घर नहीं था और वह किराये के मकान में रहता था। विजय अपना नया घर बनाने के लिए बहुत मेहनत करके पैसे जमा कर रहा था।
आखिर उसकी मेहनत रंग लायी और 15 साल में कठिन परिश्रम के बाद जो पैसे जमा हुए थे, उससे विजय ने एक सुन्दर और नया घर खरीद लिया। अब वह और उसका परिवार अपने नए घर में बहुत खुश थे।

प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत

उसके नए घर के आसपास जो पड़ोसी रहते थे, वह काफी अमीर  थे। उसके पड़ोसी बहुत महँगे कपड़े पहनते थे, कई नौकर उनके यहाँ 24 घंटे नौकरी करते थे, विलासिता और शौक की हर चीज उनके पास थी।
अपने पड़ोसियों की बेहतरीन जिंदगी देखकर विजय भी अब सोचने लगा था कि उसके पास में कोई भी शौक की चीज नहीं है। शौक की चीजों को खरीदकर अपने घर लाने की उसकी बहुत इच्छा होने लगी लेकिन अधिक पैसा न होने के कारण वह कुछ नहीं कर पा रहा था।
एक दिन उसके दरवाजे पर एक महात्मा आया जो भिक्षा मांग रहा था। उस समय विजय घर पर ही था। उसने महात्मा को कुछ वस्तुएं दान में दी तो महात्मा प्रसन्न होकर बोला, “मैं तेरे दान से ख़ुश हूँ। तेरी कोई समस्या हो तो बता।”
तभी विजयने अपनी सभी इच्छाओं को महात्मा को बता दिया। (प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत)
विलासिता और शौक की चीजों की इच्छा के बारे में जानकार महात्मा बोला, “इसके लिए तो तू अपनी मेहनत को और बढ़ा दे तथा अधिक से अधिक पैसों की बचत कर, और उससे जो चाहें खरीद ले।”
लेकिन विजय को तो यही धुन लगी थी कि उसे अपने पड़ोसियों से ज्यादा चीजें बहुत जल्दी चाहिए। वह महात्मा से जिद करके कोई चमत्कार करने को कहने लगा। (प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत)
कुछ देर सोचकर एक हथौड़ी देते हुए महात्मा बोला, “अगर तू यही चाहता है तो यह हथौड़ी ले। साथ ही मैं तुझे एक मंत्र बता रहा हूँ। जब भी तुझे किसी शौक की चीज की जरुरत हो तो अपने घर की किसी भी दीवार पर तेज़ी से एक हथौड़ी मारना और फिर इस मंत्र को बोल देना। तभी हथौड़ी मारने वाली जगह से उस शौक की चीज को खरीदने लायक पैसे निकल आएंगे। लेकिन ध्यान रखना कि इससे तू केवल अपने शौक की चीजों को प्राप्त कर सकता है, अपनी जरुरत की चीजों को नहीं।”
इतना कहकर महात्मा चला गया। विजय उस हथौड़ी और मंत्र को पाकर बहुत खुश था।
वह तुरंत घर के अंदर गया और अपने मन में महँगे कपड़ों के बारे में सोचकर एक दीवार पर बहुत तेज़ी से हथौड़ी मारी और मंत्र पढ़ दिया। तुरंत उस दीवार में से पैसे निकल आये। विजय बहुत खुश हुआ और तुरंत बाजार जाकर महँगे कपड़े खरीद लाया।
अब तो वह हर रोज ऐसा करने लगा। अब वह रोज अपने शौक की किसी चीज के बारे में सोचता और दीवार में हथौड़ी मारकर मंत्र पढ़ देता, तभी तुरंत पैसे निकल आते।
कुछ ही महीनों में विजयके घर अपने पड़ोसियों के जैसी महँगी और शौक की बहुत सी चीजें हो गयीं। अनेकों नौकर उसके यहाँ अब दिन रात काम करते थे तथा उसकी और उसके परिवार की सेवा करते थे। अगले कुछ महीनों में ही विजयअपने पड़ोसियों से शौक की चीजों को खरीदने के मामले में बहुत आगे निकल गया।
हथौड़ी को प्राप्त किये हुए एक साल हो चुका था। एक दिन जब विजयअपने परिवार के साथ अपने घर में बैठा हुआ था और अपनी सभी शौक की वस्तुओं को देख रहा था तभी उसकी नजर अपने घर पर गयी और वह चौंक गया और बोला, “अरे यह क्या हो गया मेरे घर को! सभी तरफ हर दीवार में केवल छेद ही छेद नजर आ रहे हैं। यह इतना बदसूरत कैसे हो गया?”
तभी पास खड़ी उसकी पत्नी बोली, “आप ही तो पिछले एक साल से इन दीवारों में हथौड़ी मारकर छेद कर रहे हो। मैंने आपको बहुत बार मना भी किया था लेकिन आप माने ही नहीं, अब इस घर में हर जगह छेद है।”
लेकिन विजय तो अपने सपनों की दुनियां में खोया हुआ था। वह बोला, “कोई बात नहीं! मैं एक और हथौड़ी मारूँगा और एक नए घर के लायक पैसे निकल आएंगे।”
इतना कहकर विजय पूरे घर में ऐसी जगह को खोजने लगा जहाँ कोई भी छेद न हुआ हो। काफी देर के बाद उसे एक दीवार पर सबसे नीचे केवल एक जगह ऐसी मिली जहाँ कोई छेद न था। विजयने बिना कुछ ध्यान दिए केवल एक सुन्दर घर के बारे में सोचा और तेजी से हथौड़ी मार दी
लेकिन यह क्या! एक भी पैसा नहीं निकला बल्कि पूरा घर भरभरा कर नीचे गिर गया और सभी विलासिता की वस्तुएं, उसके नौकर और पूरा परिवार मलबे के नीचे दब गए। लेकिन विजय बच गया क्योंकि उसने मकान को गिरते देख खुद को लोहे की मेज के नीचे छिपा लिया था। (प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत)
सब कुछ खत्म हो चुका था। विजय चीख चीख कर रो रहा था और उस महात्मा को बार बार धोखेबाज कह रहा था क्योकि अबकी बार हथौड़ी मारने पर एक भी पैसा नहीं निकला था।
तभी महात्मा की कही गई बात एक बार फिर उसके कानों में गूंज गई जो हथौड़ी देते समय कही गयी थी – “ध्यान रखना कि इससे तू केवल अपने शौक की चीजों को प्राप्त कर सकता है, अपनी जरुरत की चीजों को नहीं।”
और सच है कि घर उसका शौक नहीं बल्कि जरुरत था जिसको बनाने के लिए उसके 15 सालों तक बहुत मेहनत की थी। लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था। अब कुछ नहीं बचा था और सब कुछ ख़त्म हो चुका था। (प्रेरणादायक हिन्दी कहानियाँ – शौक और जरुरत)
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