जानिये इष्टदेव की आरती कैसे करें | aarti karne ki vidhi in hindi

इष्टदेव की आरती कैसे करें – उपासक के हृदय में भक्ति दीप को तेजोमय बनाने का व देवता से कृपाशीर्वाद ग्रहण करने का सुलभ शुभावसर है `आरती’ । संतों द्वारा रचित आरतियों को गाने से ये उद्देश्य नि:संशय सफल होते हैं । कोई कृति हमारे अंत:करण से तब तब होती है, जब उसका महत्त्व हमारे मन पर अंकित हो ।

इष्टदेव की आरती कैसे करें – aarti karne ki vidhi in hindi

ज्योति,थाली या दीपक

1. आरती करते हुए उसमें शामिल व्यक्तियों के मन में भावना होती है कि पांचों प्राणों यानी व्यक्ति पूरे अस्तित्व और चेतना से इैश्वर की आराधना कर रहा है। घी की ज्योति जीव के आत्मा की थाली या दीपक को इष्टदेव के सामने निश्चित संख्या में गोलाकार घुमाया जाता है। घुमाने की प्रक्रिया से वृत इस तरह रेंखांकित हो कि ओम की आकृति बन जाए।

आरती में जल से भरे कलश

2. आरती में जल से भरे कलश, नारियल, तांबे के सिक्के नदियों के जल अर्थात प्रकृति के सभी उपहारों का प्रयोग होता है।
आरती में जिस थाली का प्रयोग किया जाता है,

दीपक

3. वह प्रायः पीतल, तांबा, चांदी या सोने की हो सकती है। इसमें एक दीपक धातु का, गीली मिट्टी का या गुथे हुए आटे का होता है। यह दीपक गोल या पंचमुखी, सप्तमुखी अधिक विषम संख्या मुखी हो सकता है। इसे तेल या शु़द्ध घी के जरिए रूई की बत्ती से जलाया गया होता है।

तेल का प्रयोग

4. प्रायः तेल का प्रयोग रक्षा दीपकों में किया जाता है। आरती दीपकों में घी का उपयोग कर सकते हैं। बत्ती के स्थान पर कपूर का भी प्रयोग कर सकते हैं। आरती में जल से भरे कलश, नारियल, मुद्रा, तांबे के सिक्के के अलावा नदियों के जल का उपयोग किया जाता है।

तुलसी का प्रयोग

5. तांबे में सात्विक लहरें उत्पन्न करने की क्षमता अन्य धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है। कलश में उठती लहरें वातावरण में प्रवेश कर जाती हैं। कलश में पैसा डालना भी प्रतीक माना जाता है। आरती में अनिवार्य रूप से तुलसी का प्रयोग भी होता रहा है।

इष्टदेव की आरती कैसे करें – aarti karne ki vidhi in hindi

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