पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) – Peptic Ulcer in Hindi

1
619
पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) - Peptic Ulcer in Hindi
पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) - Peptic Ulcer in Hindi

 Peptic Ulcer in Hindi अल्सर रोग कई तरह के हो सकते है – जैसे : पेप्टिक अल्सर, पेट के छाले, अमाशय का अल्सर या गैस्ट्रिक अल्सर। अल्सर होने का प्रमुख कारण अलसर तभी बनते है जब अमाशय के परत को खाना पचाने वाला एसिड नुकसान पहुंचने लगता है। ये अम्ल बहुत ही ज्यादा तेज़ होता है। लोहे के ब्लेड तक को यह एसिड आसानी से गला सकता है। इस अम्ल की अधिकता में तनाव और उलटी सीधी लाइफ-स्टाइल और अनियमित खानपान प्रमुख भूमिका निभाते है।

आजकल की विकृत जीवन शैली जैसे कि तेल से बना हुआ आहार, फास्ट फूड, गरिष्ट बासी भोजन और बेसन एवं ब्रेड की अधिकता के साथ-साथ, आलस्य, मानसिक तनाव आदि के फलस्वरुप अधिकांश व्यक्ति पेट से सम्बंधित रोग से पीड़ित रहते हैं। पेट के छाले, अम्लपित्त, एसिडिटी, कब्ज, बार बार शौच जाना, गैस, अल्सर, बवासीर, भगंदर, फिशर आदि ऐसी कुछ प्रमुख समस्याएं होती हैं।  Peptic ulcer information – symptoms, causes, therapy, prevention

पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) – Peptic Ulcer in Hindi

पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) - Peptic Ulcer in Hindi
पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) – Peptic Ulcer in Hindi

पेप्टिक अल्सर, पेट के छाले, एसिडिटी के कारण

Peptic Ulcer in Hindi – आयुर्वेद में इस रोग के कई कारण बताये गए है। जैसे अधिक भोजन करना बार-बार अजीर्ण होना समय का समय भोजन करना पहले खाएं भोजन के पकने से पहले ही फिर भोजन खा लेना खट्टे और तीक्ष्ण मिर्च मसालों का सेवन करना इसके अतिरिक्त कुछ लोगों के पेट में कीड़े होने और आव अधिक बनने के कारण भी यह तकलीफ हो सकती है। एलोपैथिक पेन किलर का अधिक सेवन ध्रुमपान एवं मानसिक तनाव भी इस रोग में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

पेप्टिक अल्सर, पेट के छाले ,अम्लपित्त (एसिडिटी ) के लक्षण

पेप्टिक अल्सर रोग का प्रमुख लक्षण है।

  1. खट्टी डकार आना और पेट में जलन होना
  2. उल्टी होना उल्टी में खट्टापन और कभी कभी खून भी आना
  3. पेट में दर्द रहना
  4. शरीर में भारीपन
  5. हाथ पैरों में टूटन और भूख अनियमित होना

थोड़ा भी भोजन खा लेने से कुछ समय के लिए यह लक्षण कम हो जाते हैं। किंतु कुछ समय बाद सिर दर्द और खट्टी डकारें शुरू हो जाती हैं। रोगियों को अधिकांश कब्ज रहता है या फिर दिन में दो तीन बार शौच जाना पड़ता है। रोग की उम्र अवस्था में सिर में दर्द बना रहता है और ठंडे पदार्थ खाने की इच्छा और बेचैनी बनी रहती है। पेप्टिक अल्सर रोग का निदान रोगी की गाथा सुनकर और कुछ जांच करके जैसे:

  • Gastrointestinal endoscopy गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी
  • Barium Meal X-ray  बेरियम भोजन एक्सरे
  • Stool Test  मल परीक्षण
  • Ultrasound  अल्ट्रासाउंड

के द्वारा किया जाता है। यह तो सभी को पता है कि “प्रिवेंशन इस बेटर देन क्योर” यानी रोग की चिकित्सा करने से अच्छा है, उसे पैदा ही ना होने दिया जाए। आयुर्वेद का मूल उद्देश्य जो आज से लगभग 5000 वर्ष पहले बताया गया था। प्रयोजनं चास्य स्वस्थ्यस्य रक्षणं आतुरस्य विकार प्रशमन च। यानी आयुर्वेद का मूल उद्देश्य स्वस्थ्य व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इस बात को आजकल आधुनिक चिकित्सक भी मानते हैं, कि उचित खानपान एवं जीवन शैली से अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।

(पेट के छाले )पेप्टिक अल्सर, एसिडिटी की चिकित्सा घरेलू उपचार

peptic-ulcer/peptic ulcer in hindi – पेप्टिक अल्सर के रोगी को जल्दी और बहुत ही जल्दी अपनी चिकित्सा करानी चाहिए और अम्लपित्त (एसिडिटी) पैदा करने वाले कारणों से परहेज करना चाहिए।

  1. हल्का जल्दी पचने वाला और सादा भोजन करना चाहिए।
  2. ठंडे दूध का सेवन, नारियल पानी, पेठे की मिठाई, आंवला मुरब्बा, गुलकंद का सेवन करते रहना चाहिए।
  3. रेशे युक्त आहार का सेवन करें।
  4. मल-मूत्र के वेग को न रोके।
  5. सुबह की सैर एवं ध्यान का अभ्यास करें।
  6. अधिक मात्रा में किशमिश, अंजीर, दूध, नारियल, अमलतास और जल का सेवन करें।
  7. नकारात्मक विचारों से ध्यान हटा कर सकारात्मक जीवन जिए।

आयुर्वेद में कहा जाता है: सर्वेषां एवं रोगाणां कारणं कुपिता मलः। यानी सब रोगों का कारण कुटीर एवं रुका हुआ मल है। अतः कब्ज का उचित उपचार करें। रोग की अवस्था बढ़ने से पहले ही अच्छे चिकित्सक से परामर्श करें। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में अनेक ऐसी दिव्य औषधियां हैं। जिनके सेवन से इस पेप्टिक अल्सर, ulcer रोग से मुक्ति पाई जा सकती है।

अल्सर, पेट के छाले का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के नामो के लिस्ट – List of names of Ayurvedic herbs

जैसे अविपत्तिकर चूर्ण, उदुंबर अवलेह, कामदुधा रस, सूतशेखर रस, शंख वटी, कुष्मांड अवलेह, नारिकेल खंड, नारिकेल लवण, धात्री लौह, लीलाविलास रस, लवण भास्कर चूर्ण, प्रवाल पंचामृत रस, प्रवाल पिष्टी, शतावरी घृत, आमलकी रसायन आदि ऐसी औषधियां है।

  • इसके अलावा अल्सर में घाव को भरने के लिए कुछ महत्वपूर्ण औषधियां जैसे:
  • यशद भस्म, मधुयष्टि एवं शतावरी है।
  • रोगी को मृदु विरेचन भी लेते रहना चाहिए ताकि कब्ज के कारण आंखों एवं घाव के आसपास irritation जलन ना हो
  • यदि जलन उत्पन्न होने के कारण खून की उल्टी दस्त आदि विकार उत्पन्न हो तो
  • तुरंत ही चिकित्सक से संपर्क कर इसकी चिकित्सा करवानी चाहिए।
  • अनेक अनुसंधानों के उपरांत पेप्टिक अल्सर रोग में योग एवं ध्यान साधना का अभ्यास बहुत ही उपयोगी पाया गया है।

ध्यान द्वारा मानसिक को विश्राम मिलता है एवं अनेक हार्मोन का स्त्राव नियंत्रित होता है। पाचक रस की अनियमितता विनियमित होता है एवं एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता है। इसलिए दवा के साथ साथ ध्यान योग परहेज अधिकारी पालन जहां तक हो करना चाहिए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त किया जा सके। पेप्टिक अल्सर रोग की चिकित्सा लंबी होने के कारण योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क जरूर करनी चाहिए। रोगी को मनोबल बनाए रखना चाहिए और चिकित्सक पर विश्वास रखना चाहिए आशानुकूल परिणाम मिलते सकते हैं।

पेट के छाले अल्सर दूर करने के घरेलु आयुर्वेदिक उपचार – ulcer in hindi

  • तुलसी: अल्सर के रोगी को सुबह खाली पेट तुलसी के 5 पत्ते खाने चाहिए। इससे पेट के छाले और कैंसर के कीटाणु ख़त्म होते है।
  • पत्ता गोभी और गाजर: पत्ता गोभी और गाजर के जूस को बराबर मात्रा में मिलाकर खाली पेट प्रातः और शाम को एक-एक के अनुपात में रोजाना पीना चाहिए।
  • गाय का घी: अल्सर की बीमारी और पेट के छाले में गाय के घी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • हल्दी: रोजाना एक चम्मच हल्दी के पाउडर को गाय के दूध में मिलाकर पिने से 4 से 7 महीने में पेट के छाले और अल्सर की बीमारी ठीक को ठीक होते देखा गया है। यह एक अल्सर का रामबाण घरलू उपचार है।
  • सहजन (drumstick): सहजन के पत्ते को दही के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर लें। इस का सेवन दिन में एक बार करने से अल्सर में लाभ होता है।
  • कच्चे केले की सब्जी: अल्सर रोग में कच्चे केले की सब्जी बनाकर और एक चुटकी हींग मिलाकर खाने से अल्सर में बहुत लाभ करती है।
  • गेंहू के जवारों : आयुर्वेद में गेंहू के जवारों का रस अमृत सामान हैं, इससे कई तरह की बीमारी में फायदा होता है साथ ही यह एक टॉनिक के तरह शरीर को शक्तिशाली बनाती है। अल्सर और पेटके छाले के मरीजों को रोज़ सुबह इसका सेवन करना चाहिए, गेंहू के जवारों की अधिक जानकारी के लिए हमारी ये पोस्ट ज़रूर पढ़े।
  • अर्जुन की छाल: रात को सोने से पूर्व अर्जुन की छाल एक चम्मच की मात्रा में 250 मिली पानी में काढ़ा बनाये, इस काढ़े में में आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण भी डाल दे और आधा रहने पर इसको छान कर पी ले। ऐसा नियमित ३ महीने तक करे। अल्सर और पेट के छाले का यह घरेलु उपचार बहुत फायदेमंद है।

पेप्टिक अल्सर या आमाशय व्रण रोग,पेट के छाले  एसीडिटी या अम्लपित्त के लक्षण और उपचार Peptic ulcer information – symptoms, causes, therapy, prevention alsar disease treatment in hindi

other post:

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here