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हृदय रेखा – Palmistry Heart line in Hindi

हृदय रेखा – Palmistry Heart line in Hindi : हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसा ज्योतिष विद्या है। जिसमें व्यक्ति के हाथों की लकीरों को देख कर उन पर बने चिन्ह के अनुसार, भूत भविष्य वर्तमान की भविष्यवाणियां दी जाती है। हस्तरेखा ज्योतिष में हाथों की लकीरों का विशेष महत्व होता है। यह लकीरें व्यक्ति के हाथों पर स्थाई और अस्थायी दोनों रूप से होती। कहने का मतलब यह है की बहुत सी लाइन व्यक्ति के कर्मानुसार उनके विचारो के अनुसार बनती-बिगड़ती रहते हैं। हाथों पर बने चिन्ह जैसे क्रॉस सितारे अर्धचंद्राकार वर्ग आदि जिनका अध्ययन करके, भविष्य में आने वाले शुभ अशुभ घटनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। मुख्य रेखाएं होती हैं जो अपने नाम के हिसाब से फल देती हैं। यहां हम हाथ के महत्वपूर्ण रेखाओं के बारे में बताने जा रहे हैं। जो समय समय पर हस्तरेखा ज्योतिषियों द्वारा पूरी दुनिया में प्रचलित है। Palmistry Heart line in english

हृदय रेखा 16 प्रकार की होती है

  1. जगती
  2. राजपददात्री
  3. कुमारी
  4. गान्धारी
  5. सेनानित्वप्रदा
  6. दरिद्रकारी
  7. धृती
  8. वासवी
  9. चम्पकमाला
  10. वैश्वदेवी
  11. त्रिपदी
  12. महाराजकरी
  13. रमणी
  14. चपलवदना
  15. कुग्रहणी

Heart line in palm – हृदय रेखा – Palmistry Heart line in Hindi

Heart line in palm - हृदय रेखा

हृदय रेखा – Palmistry Heart line in Hindi

हृदयरेखा हथेली में कनिष्ठिका अंगुली के नीचे बुध पर्वत के नीचे से निकलकर सूर्य तथा शनि के क्षेत्रों को पार करती हुई गुरु पर्वत तक जाती है, लेकिन सभी हाथों में यह स्थिति नहीं होती। यह हथेली के उपरी हिस्से में उंगलियों के ठीक नीचे होती है। यह हृदय के प्राकृतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को दर्शाती है। यह रोमांस कि भावनाओं, मनोवैज्ञानिक सहनशक्ति, भावनात्मक स्थिरता और अवसाद की संभावनाओं का विश्लेषण करने के साथ ही साथ हृदय संबंधित विभिन्न पहलुओं की भी व्याख्या करती है।

मुख्यतः रेखायें चार प्रकार की होती हैं।

1. गहरी रेखा- यह रेखा पतली होने के साथ-2 गहरी (मोटी) भी होती है।
2. ढलुआ रेखा- यह रेखा शुरु में मोटी होती है तथा ज्यों-जयों आगे बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों पतली होती जाती है।
3. पतली रेखा- वह रेखा शुरु से आखिर तक एक आकार (पतली) में होती है।
4. मोटी रेखा- यह रेखा चैड़ायी लिये होती है और पूर्णतः स्पष्ट होती है

हृदय रेखा इन तीन स्थानों से शुरु होती है

  1. शनि और गुरु पर्वत के मध्य से
  2. गुरु पर्वत के केन्द्र से
  3. शनि पर्वत के केन्द्र से।

1. शनि गुरु के मध्य से- ऐसे व्यक्ति व्यवहार कुशल और स्नेही होते हैं। इनका प्रेम जीवन की प्राथमिकता पूर्ति के बाद शुरु होता है।
2. गुरु पर्वत के केन्द्र से- यह हृदय रेखा मनुष्य के प्रणव सम्बन्धों और स्नेह को आदर्शवादी आधार प्रदान करती है। ऐसे व्यक्ति विषम परिस्थिति एवं आपत्ति काल में भी सम्बन्धों का निर्वाह करने में सफल होते हैं।
3. शनि पर्वत से- यह हृदय रेखा स्वार्थ भावना उत्पन्न करती है तथा ऐसे लोग वासना के प्रति यकीन रखते हैं। ऐसी भावना रखते हैं कि जिसमें अपना स्वार्थ झलकता हो और प्रेम वासना अधिक पायी जाती है, इसलिए प्रेम सम्बन्धों में स्वार्थी होते हैं।

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