Medicine to cure the disease of psychosis in hindi

पागलपन के रोगी का इलाज आयुर्वेदिक औषधि – Medicine to cure the disease of psychosis in hindi

पागलपन एक मानसिक रोग है। चीखना- चिल्लाना, कपड़े फाड़ना, बकवास करना, खुद-ब-खुद बातें करना, हंसना अथवा रोना, मारने अथवा काटने को दौड़ना, अपने बाल आदि नोंचना ही इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह रोग कई प्रकार की विकृतियों के कारण हो सकता है। जैसे – अत्याधिक प्रसन्न होना, कर्जदार अथवा दिवालिया हो जाना, अत्यधिक चिन्तित रहना, भय, शोक, मोह, क्रोध, हर्ष मैथुन में असफलता, काम-वासना की अतृविप्त अथवा मादक पदार्थों का अत्याधिक सेवन करना। अतः पागलपन के मूल कारण को जानकर ही औषधियों का प्रयोग करना चाहिए। Medicine to cure the disease of psychosis in hindi

पागलपन का इलाज – Pagalpan ka illaj 

खिरेंटी

खिरेंटी ( सफेद फूलों वाली ) का चूर्ण साढ़े तीन तोला 10 ग्राम पुनर्नबा की जड़ का चूर्ण इन दोनों को क्षीर – पारू की विधि से दूध मे पकाकर तथा ठण्डा कर नित्य प्रातः काल पीने से घोर उन्माद भी नष्ट हो जाता है।

नस्य

पीपल, दारूहल्दी, मंजीठ, सरसों, सिरम के बीज, हींग, सोंठ, काली मिर्च, इन सबको 10-10 ग्राम लेकर कुंट- पीसकर छान लें। इस चूर्ण को बकरी के मूत्र में पीसका नस्य देने तथा आंखों में आजमाने से उन्माद, ग्रह तथा मिर्गी रोग नष्ट होते हैं।

सरसों के तेल

सरसों के तेल की नस्य देने तथा सरसों का तेल आंखों में आंजने से पागलपन का रोग दूर होता है। ऐसे रोगी के सारे शरीर पर सरसों का तेल लगाकर और उसे बांधकर धूप में चित्त सुला देने से भी इस रोग से छुटकारा मिल जाता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी के पत्तों का स्वरस 40 ग्राम, 12 रत्ती कूट का चुर्ण तथा 48 रत्ती शहद, इन सबको मिलाकर पीने या पिलाने से भी पागलपन के लक्षण जाते रहते हैं।

पेठे के बीज़

20 ग्राम पेठे के बीज़ों की गिरी रात के समय किसी मिट्टी के बर्तन में 50 ग्राम पानी में डालकर भिगों दें। सवेरे उसे सिल पर पीसकर छान लें तथा 6 माशा शहद मिलाकर पितायें। 15 दिन तक नियमित इसका सेवन कराने से पागलपन ( यदि वह वास्तव में हो और रोगी ढोंग न कर रहा हो तो) दूर हो जाता हैं।

मूत्र

तगर, बच तथा कूट, सिरम के बीज, मुलहठी हींग, लहसुन का रस इन्हें एक भार ( प्रत्येक 10 ग्राम ) में लेकर बारीक पीस कर छान लें । फिर इन्हें बकरी के मूत्र में पीसकर, नस्य देने तथा आंखों में पागलपन का रोग दूर हो जाता है।

त्रिफला

पागलपन रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला का सेवन करना चाहिए। रोगी को सोयाबीन को दूध के साथ खाना चाहिए। इसके बाद कच्ची हरे पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

नींबू का रस

इस रोग से पीड़ित रोगी को दिन में कई बार पानी में नींबू का रस मिलाकर पिलाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है और मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से अपना कार्य करने लगती हैं।

शंखपुष्पी (शंखाहूली)

शंखाहूली, ब्राह्मी और अम्बर को शहद के साथ मिलाकर उन्माद के रोगी को चटाने से उन्माद या पागलपन दूर होता है।INSANITY, MANIA, EROTOMENIA

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मानसिक रोगों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार – Treatment of Madness with Natural Medicine in Hindi

पागलपन का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 महीने तक फल, सब्जियां और अंकुरित अन्न खिलाने चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को फलों एवं सब्जियों के रस का सेवन कराके सप्ताह में एक बार उपवास कराना चाहिए। जिसके फलस्वरूप रोगी व्यक्ति के शरीर का दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाता है और रोगी के मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से कार्य करने लगती हैं और यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

रोगी को सोयाबीन को दूध के साथ खाना चाहिए। इसके बाद कच्ची हरे पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति को अपने पेट को साफ करने के लिए एनिमा क्रिया करनी चाहिए तथा इसके बाद अपने पेट पर तथा माथे पर मिट्टी की पट्टी लगानी चाहिए। फिर कटिस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद मेहनस्नान, ठंडे पानी से रीढ़ स्नान और जलनेति क्रिया करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से अपना कार्य करने लगती है। इससे पागलपन का रोग कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।

पागलपन से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सूर्यतप्त जल दिन में कम से कम 6 बार पीना चाहिए और फिर भीगी पट्टी माथे पर लगानी चाहिए। जब पट्टी सूख जाए तो उसे हटा लेना चाहिए। फिर इसके बाद सिर पर आसमानी रंग का सूर्यतप्त तेल लगाना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को अच्छी नींद लेनी चाहिए।

एक टब में गुनगुना पानी भरना चाहिए। इसके बाद इस टब में रोगी व्यक्ति को लिटाना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए की रोगी व्यक्ति का मुंह पानी से बाहर रहें। इस क्रिया को प्रतिदिन कुछ समय के लिए करने से रोगी व्यक्ति का रोग ठीक होने लगता है।

पागलपन रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में ठंडे जल से भीगे तौलिए से अपने शरीर को पोंछना चाहिए तथा यही क्रिया रात के समय में भी करनी चाहिए। इस क्रिया को प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति के सिर पर दिन में 2-3 बार गीली मिट्टी की पट्टी या फिर कपड़े को भिगोकर उसकी पट्टी रखने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है। इस प्रकार से रोगी व्यक्ति का उपचार प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही महीनों में ठीक हो जाता है।

पागलपन से पीड़ित रोगी को आसमानी रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कम से कम 8 बार कुछ दिनों तक पिलाने तथा सिर पर नीली रोशनी डालने से लाभ होता है।

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