जाने अपने त्वचा से जुड़े राज

महर्षि आयुर्वेद शरीर के अनुसार हमारी सृष्टि में 3 दौड़ विधमान है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तत्व से मिलकर बने है। प्रत्येक मनुष्य इन 3 दोंषों में वात्त दोष ( अग्नि व् जल तत्व ), तीसरा दोष कफ दोष ( जल व् पृथ्वी तत्व ), शरीर की त्वचा भी इन 3 दोषों के आधार पर ही विभक्त है और उसी अनुसार इनमें खुबिया व् शामिल है इन दोनों में किसी भी प्रकार का असंतुलन होने से उसका सीधा असर त्वचा पर नजर आने लगता है, तो आइए जाने की आपकी किस प्रकृति की है और उसमे उपजे असंतुलन को किस प्रकार दूर किया जाए।

वात्त दोष।

  • वाट दोष युक्त त्वचा रूखी, पतली कोमल व् छूने में ठंडी होती है।
  • शरीर में वात्त दोष यदि असंतुलन हो तो त्वचा कांतिवान व् आकर्षक लगती है, जबकि वात्त दोष में असंतुलन के कारन त्वचा अत्यधिक रूखी व् खुरदरी हो जाती है।

स्वाभाविक समस्याएं।

  • इस प्रकार की त्वचा में बढ़ती उम्र का असर जल्दी आने लगता है।
  • त्वचा के रूखे व् पतले होने के कारण झुर्रियां भी जल्दी पड़ने लगती है।
  • इसके आलावा इस प्रकार की त्वचा वाले व्यक्ति की यदि पाचन किया ठीक न हो तो कम उम्र के बावजूद त्वचा बूढी नजर आने लगती है और रंग भी गहरा हो जाता है।
  • मानसिक तनाव, चिंता व् अनिद्रा वात्त दोष वाले व्यक्ति की त्वचा समय पूर्व बूढा कर देती है

 त्वचा में नमी बनाए रखने के सुझाव।

  1. त्वचा के रूखा होने के कारण ईयोस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है कि त्वचा में नमी बनाए रखने के उपाय किया जाएं।
  2. त्वचा में आवयश्क नमी बनाए रखने के लिए सबसे पहले खान-पान के तरीके में सुधार कि जरूरत है। जैसे- वात्त दोष वाले व्यक्ति को आपने आहार में गरम, चिकनाई वाले पदार्थ ( घी, दूध, मक्खन ), खट्टी, नमकीन व् मीठी चीजों (फल, प्राकृतिक मीठे खाद्द पदार्थ ) आदि को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। फ़ास्ट फ़ूड के प्रयोग से बचें, इसके अतिरिक्त दिनभर में 8-10 गिलास हल्का गुनगुना पानी जरूर पिएं।
  3. इन सब उपायों का अनुसरण करने से शरीर में वात्त दोष संलयित रहता है।

पित्त दोष युक्त त्वचा गोरी

  • पित्त दोष युक्त त्वचा गोरी, कोमल, गरम और हल्की-सी मोटी होती है।
  • शरीर में पित्त दोष संतुलित होने पर त्वचा हल्का गुलाबी या सुनहरी चमक लिए होती है।

स्वाभाविक समस्याएं।

  • पित्त दोष युक्त त्वचा में कील मुहांसे, दाने, झाइयां और पिगमेंटेशन कि समस्या आम है।
  • शरीर में अग्नि तत्व कि अधिकता के कारण त्वचा गर्मी को सहन करने में सहज नही होती।

सुझाव।

  1. सूर्य कि किरणों, हाइली हीटिंग थेरेपी जैसे फेसियल व् टोनिंग ट्रीटमेंट से बचें।
  2. गर्म व् मसालेदार खाने से परहेज करें- पित्त दोष युक्त त्वचा बेहद सवेंदनशील होती है, इसलिए अधिक से अधिक पानी पीने कि कोशिश करें, जिससे शरीर के अनावश्यक अवयव बाहर निकल सकें।
  3. आर्टिफिशियल मेकअप उत्पाद के बजाय सौ फीसदी प्राकृतिक कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करें।
  4. योग, ध्यान व् व्यायाम से शरीर को संतुलित बनाए रखने में हरी सब्जिंया व् फलों को अधिक से अधिक शामिल करें।

कफ दोष।

  • कफ दोष युक्त त्वचा मोटी, तैलीय, नरम व् छूने में ठंडी होती है, त्वचा का रंग चमक लिए हुए चांदनी जैसा सफ़ेद होता है।
  • कफ दोष युक्त त्वचा में वात्त और पित्त की तुलना में झुर्रियां देरी से पड़ती है।

स्वाभाविक समस्याएं।

  • शरीर में कफ दोष के असंतुलन से त्वचा में ब्लैक हैड्स, कील-मुहांसे की समस्या सबसे ज्यादा होती है।

सुझाव।

ऐसी त्वचा को सबसे ज्यादा सफाई की जरूरत होती है।

त्वचा को अत्यधिक तैलीय होने के कारण क्रीमी चीजों से बचें। हल्का खाना खाएं खाने में जैतून का तेल इस्तेमाल करें।

हल्के गुनगुने पानी से नहाएं ताकि शरीर के रोमछिद्र खुले।

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