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Mesh Sankranti: मेष संक्रांति में सांप के जहर से बचाव हेतु उपाय

Mesh Sankranti:  हिंदू धर्म में त्योहारों और तिथियों का विशेष महत्व है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के समय, सूर्य ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। हर साल, मेष संक्रांति 14 अप्रैल को पड़ती है। इस दिन, सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करता है। उत्तर भारत के लोग इस त्योहार को हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। इसे सत्तू संक्रांति और सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन खरमास का समापन होता है। इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश और भूमि खरीदने जैसे शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। आइए जानते हैं मेष संक्रांति से जुड़ी खास बातों के बारे में।

मेष संक्रांति का शुभ समय

मेष संक्रांति का शुभ मुहूर्त 14 अप्रैल, 2022 को सुबह 5.57 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक किया जाएगा।

मेष संक्रांति का महत्व

हिंदू धर्म में मेष हिंदू संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन, सूर्य की पूजा करने से सूर्य ग्रह से जुड़े दोषों से छुटकारा मिलता है। भगवान सूर्य की पूजा करने से घर में धन और प्रसिद्धि का लाभ मिलता है। इस दिन, सत्यनारायण की पूजा की जानी चाहिए। उन्हें सत्तू चढ़ाया जाता है।

जिसे देश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है

मेष संक्रांति को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। मेष संक्रांति को पंजाब में वैशाख, तमिलनाडु में पुथंडु, बिहार में सतुआनी, पश्चिम बंगला में पोइला बैसाख और ओडिशा में पना संक्रांति कहा जाता है।

मेष संक्रांति पर दान पुण्य करें

पवित्र नदी में स्नान और मेष संक्रांति के दिन दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन, भगवान भगवान को दान करने से प्रसन्न होते हैं। यदि आप पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं, तो घर की बाल्टी में गंगा जल डालें और स्नान करें। इस दिन सत्तू का सेवन विशेष फल देता है।

सांप के विष से बचाव हेतु मेष संक्रांति के उपाय

मेष संक्रांति के उपाय सांप के जहर को रोकने के लिए

चैत्र मास की मेष संक्राति के दिन मसूर की दाल एवं नीम की पत्तियां खाएं। सर्प काट भी लेगा तो विष नहीं चढ़ेगा। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन प्रातः काल नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीएं और घूमने जाएं, शरीर में विष रोधी क्षमता बढ़ेगी।

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