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महामृत्युजंय मंत्र जाप से मिलती है, मृत्यु के भय से मुक्ति, mahamrityunjay mantra

mahamrityunjaya mantra in hindi : मंत्र के जाप द्वारा आत्मा, देह और समस्त वातावरण शुद्ध होता है.यह छोटे से मंत्र अपने में असीम शकित का संचारण करने वाले होते हैं. इन मंत्र जापों के द्वारा ही व्यक्ति समस्त कठिनाईयों और परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर लेने में सक्षम हो पाता है. प्रभु के स्मरण में मंत्र अपना प्रभाव इस प्रकार करते हैं कि ईश्वर स्वयं हमारे कष्टों को दूर करने के लिए तत्पर हो जाते हैं,मंत्र भी रोगों से मुक्त करा सकते हैं, लेकिन यह तभी संभव है, जब इनकी शक्ति को जगाया जाए।

महामृत्युजंय मंत्र जाप  – mahamrityunjaya mantra

mahamrityunjay mantra in hindi, महामृत्युजंय मंत्र जापॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मंत्र जाप :  क्या वस्तव में मंत्रों के जाप से फायदा होता है। इसे विषय में लोगों की काफी आशाएं रहती है कि मंत्र असाध्य रोगों को ठीक कर देता है।

सेंटर फार स्पिरिचुअल एड योगा – mahamrityunjaya mantra in hindi

पीअर सहस्त्रबुद्धे का मानना है, और अनुभव भी किया कि मंत्र रोगों से मुक्त करा सकता है, लेकिन यह तभी सहायक होता है, जब उसकी शक्ति को जगाया जाए। मंत्र साधना से अपने चित में छाए संस्कार धुलने होने लगते हैं। ये संस्कार चित में कुछ इस तरह घुले होते हैं, जैसे किसी कमरे में महीनों से गंदगी फैली हो और सफाई के दौरान वह एक साथ बाहर होने लगे। योगशास्त्र के जानकारों के अनुसार माने तो शरीर की आंतरिक रचना में चैरासी ऐसे केंद्र हैं, जहां प्राण ऊर्जा सघन और विरल रूप में मौजूद रहती है। महामृत्युजंय मंत्र –

महामृत्युजंय मंत्र,mahamrityunjaya mantra in hindi

mahamrityunjaya mantra in hindi

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

||महा मृत्‍युंजय मंत्र का अर्थ || समस्‍त संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले शिव की हम अराधना करते हैं। विश्‍व में सुरभि फैलाने वाले भगवान शिव मृत्‍यु न कि मोक्ष से हमें मुक्ति दिलाएं। इसे मृत्यु पर विजय पाने वाला महा मृत्युंजय मंत्र कहा जाता है। इस मंत्र के कई नाम और रूप हैं। इसे शिव के उग्र पहलू की ओर संकेत करते हुए रुद्र मंत्र कहा जाता है; शिव के तीन आँखों की ओर इशारा करते हुए त्रयंबकम मंत्र और इसे कभी कभी मृत-संजीवनी मंत्र के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह कठोर तपस्या पूरी करने के बाद पुरातन ऋषि शुक्र को प्रदान की गई “जीवन बहाल” करने वाली विद्या का एक घटक है।(मंत्र जाप)

रोग का उपचार तरगों से

जप के दौरान महामृत्युजंय मंत्र की ध्वनि इन केंद्रों को सक्रिय करती है। रोग का उपचार उन तरगों से ही होता है।
सत्तर प्रतिशत संभावना तो यह रहती है कि रोग ठीक हो जाए। तीस प्रतिशत मामलों में रोग का उभार बढ जाता है। और रोगी का जीवन खतरे में रोग का उभार बढ जाता है और रोगी का जीवन खतरे में पड जाता है। परंम्परागत भाषा में महामृत्युंजय मंत्र का प्रभाव रोगी को मृत्यु के भय से मुक्त कर देता है और ठीक हो जाए, तो भी मृत्यु का भय मिट जाता है और ठीक नहीं हो, तो रोगी की जीवनी शक्ति शरीर छोडकर चली जाती है। इस तरह भी रोगी मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।(मंत्र जाप)


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