कुंडली में खराब केतु के लक्षण और लाल किताब के उपाय

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(symptoms of Bad Ketu planet ) केतु भारतीय ज्योतिष में अवरोही चंद्र नोड को दिया गया नाम है। एक रूप में केतु एक असुर का प्रमुख है जिसे स्वर्णभानु कहा जाता है। यह सिर भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी अवतार के रूप में काटा था। यह एक छाया ग्रह है। ऐसा माना जाता है कि इसका मानव जीवन और संपूर्ण सृष्टि पर बहुत प्रभाव पड़ता है। कुछ मनुष्यों के लिए, यह ग्रह प्रसिद्धि पाने में बहुत सहायक है। केतु को अक्सर एक मणि या तारे को अपने सिर पर ले जाते हुए दिखाया जाता है, जिसमें से रहस्यमय प्रकाश निकलता है।

केतु ग्रह नहीं है, लेकिन ग्रह की छाया, छाया का हमारे जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि पीपल की छाया में सोने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है, लेकिन अगर बबूल की छाया में सोते हैं, तो इससे अस्थमा या त्वचा रोग हो सकता है। इसी प्रकार ग्रहों की छाया का हमारे जीवन में प्रभाव पड़ता है।
केतु के दोष के कारण कई प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। लाल किताब के अनुसार कुंडली में केतु की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया गया है।

संक्षिप्त जानकारी यहां जानिए।

कैसे होता है केतु खराब  :

1. पूर्वजों का मजाक बनाना, श्राद्धकर्म ठीक से न करना।

2. घर या परिवार के लोगों से झूठ बोलना।

3. दुर्गा, गणेश और हनुमान का अपमान या मजाक करना।

4. यदि घर का वायव्य कोण खराब है, तो भी खराब होगा।

5. केतु तंत्र-मंत्र, जादू टोना में विश्वास करके भी बुरे परिणाम देता है।

6. अगर बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार न किया जाए तो भी बिगड़ जाता है।

खराब केतु के लक्षण:

1. कुंडली में मंगल के साथ केतु को बहुत बुरा माना जाता है।

2. चंद्रमा के साथ होने के कारण चंद्र ग्रहण माना जाता है।

3. मंदा केतु पैर, कान, रीढ़, घुटने, लिंग, गुर्दे और जोड़ों के रोगों का कारण बन सकता है।

4. मन में हमेशा कुछ अनहोनी होने की संभावना बनी रहती है।

5. व्यक्ति नींद में जागता है नींद एक कुत्ते की तरह हो जाती है।

6.व्यक्ति भूत, तंत्र-मंत्र, जादू टोना में विश्वास करने लगता है।

शुभ केतु के लक्षण:

केतु का शुभ होना मकान, दुकान या वाहन पर ध्वज के समान व्यक्ति की प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि दिलाता है। केतु के शुभ होने से मकान, दुकान या वाहन पर ध्वज के समान व्यक्ति की प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि रहती है। केतु का शुभ होना अर्थात पद, प्रतिष्ठा और संतानों का सुख। ऐसे व्यक्ति की कई संतानें रहती हैं। शुभ है तो व्यक्ति में पूर्वाभास की क्षमता होता। ऐसे व्यक्ति कुल को तारने वाला होगा।

केतु ग्रह के कारण कौन से रोग या बीमारियां होती हैं:

1. पेशाब की बीमारी।

2. प्रसव में रुकावट।

3. सिर के बाल झड़ते हैं।

4. शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है।

5. अशुभ प्रभाव से त्वचा रोग होता है।

6. कान क्षीण हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

7. कान, रीढ़, घुटने, लिंग, जोड़ आदि में समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

केतु को अच्छा करने के उपाय:

1. दुर्गा या हनुमान की पूजा करें

2. कान छिदवाएं

3. बच्चे केतु हैं, इसलिए बच्चों के साथ अच्छे संबंध रखें।

4. भगवान गणेश की पूजा करें।

5. डबल कुत्ते को रोटी खिलाएं।

6. कान छिदवाएं।

7. कुत्ता पालना।

8. किसी भी हनुमान मंदिर में तिल, जौ का दान करें।

9. सोते समय सिर के पास एक बर्तन में पानी रखें और सुबह इसे किसी पेड़ में डाल दें। यह प्रयोग 43 दिनों तक करें।

10. कपिला गाय, कुत्ते, कौवे को अपने भोजन से बांटें।

11. पक्षियों को बाजरा खिलाएं।

12. चींटियों के लिए भोजन की व्यवस्था करें।

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