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क्या जन्म कुंडली में बन रहा है कालसर्प दोष जानें लक्षण और सरल उपाय

kaal sarp yog kya hai : कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के दुष्कर्मो के दंड या शाप के फलस्वरूप उसकी जन्म कुंडली में आता है। यह दोष 48 साल तक व्यक्ति को आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान करता है। मुख्य रूप से उसे संतान संबंधी कष्ट होता है जैसे कि संतान होने में बाधा आना यदि हो जाए तो बहुत ही दुर्बल व रोगी होती है। इस दोष के कारन रोजी-रोटी की व्यवस्था भी बड़ी मुश्किल से हो पाता है। धनाढय घर में पैदा होने के बावजूद किसी न किसी वजह से उसे अप्रत्याशित रूप से आर्थिक क्षति होती रहती है और दिन प्रतिदिन गरीबी बढ़ती जाती है। जातक को आजीविका के लिए अपने जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है। इस दोष से पीड़ित जातक को अधिकतर घूमने फिरने की नौकरी अदि से ही लाभ प्राप्त होता है। आइए अब जानते हैं कि जन्म कुंडली में कैसे  कालसर्प योग बनता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य से लेकर शनि तक सभी ग्रह जब राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं तो कालसर्प योग बन जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिस व्यक्ति की जन्म कुण्डली में यह योग होता है उसके जीवन में काफी उतार चढ़ाव आते रहते हैं।
मूल रूप से इस योग को इसलिए देखा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को झटके में आसमान से ज़मीन पर लाकर खड़ा कर देता है।

जन्म कुंडली में काल सर्प योग दोष क्या है

योतिष के आधार पर काल सर्प दो शब्दों से मिलकर बना है “काल और सर्प”। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार काल का अर्थ समय होता है और सर्प का अर्थ सांप इसे एक करके देखने पर जो अर्थ निकलकर सामने आता है वह है समय रूपी सांप। इस योग को ज्योतिषशास्त्र में अशुभ माना गया है। इस योग को अधिकांश ज्योतिषशास्त्री अत्यंत अशुभ मानते हैं परंतु इस योग के प्रति ज्योतिष के महान विद्वान पराशर और वराहमिहिर चुप्पी साधे हुए हैं।

kaal sarp yog kya hai, कालसर्प दोष

कालसर्प योग : कालसर्प दोष के लक्षण और इससे बचने के उपाय

राहू तथा केतु दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो ‘कालसर्प’ दोष बनता है। कुंडली में बनने वाला कालसर्प कितना दोषपूर्ण तथा बलशाली है यह राहू और केतु की अशुभता के साथ साथ किस भाव में कौन सी राशि स्थित है और उसमें कौन-कौन से ग्रह कहाँ बैठे हैं और उनका बलाबल कितना है इन सब बातों निर्भर करता है। यहाँ कालसर्प योग जातक की कुंडली में बने दोषों के प्रभाव को बढ़ाता है वहीँ शुभ योगों के फल कम करता है।

अगर जातक की कुंडली के भावों में सारे ग्रह दाहिनी ओर इकट्ठा हों तो यह कालसर्प योग नुकसानदायक नहीं होता। जब सारे ग्रह बाईं ओर इकट्ठा रहें तो वह नुकसानदायक होता है। कालसर्प योग वाले सभी जातकों पर इस योग का समान प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए कालसर्प योग से भयभीत न हो कर इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करवाकर इसके सरे प्रभावों की विस्तृत जानकारी हासिल कर लेना आवश्यक है। जब असली कारण ज्योतिषीय विश्लेषण से स्पष्ट हो जाये तो तत्काल उसका उपाय करना चाहिए।

कालसर्प योग जन्म-कुण्डली मे बनने वाला एक योग है। बहुत से विद्वान इस योग को नहीं स्वीकार करते। समस्याएं हैं अगर तो उनका सस्ता प्रभावशाली स्वयं करने वाला जाप व उपाय भी है। दुनिया के बहुत सफल तथा प्रसिद्ध लोगो की कुण्डली में यह योग देखा गया है। काल सर्प योग कब दण्ड देता है –

1. जब-जब राहु की दशा , अन्तर्दशा,, प्रत्यन्तर्दशा आती है।
2. जब – जब भी गोचरवशात राहु अशुभ चलता हो।
3. जब भी गोचर से काल सर्प योग की सृष्टि हो।

काल सर्प दोष के प्रकार

जब अन्य सभी ग्रह राहु-केतु के एक तरफ होते हैं तो कुण्डली में काल-सर्प योग (दोष) बनता है। मुख्य रूप से 12 कालसर्प दोष हैं –

1) अनन्त कालसर्प दोष-

जब राहु प्रथम भाव में हो तथा केतु सातवें भाव में हो। जातक को जल्दी गुस्सा आता है। सफाई पसंद नहीं रहता। विवाहित जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

2) कुलिक कालसर्प दोष

जब राहु द्वितीय भाव में हो तथा केतु अष्टम भाव में हो। सम्पति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जुबान पर नियंत्रण नहीं रहता। दुर्घटना और शल्य-चिकित्सा भी करवा देता है।

3) वासुकी कालसर्प दोष

जब राहु तृतीय भाव में हो तथा केतु नवम भाव में हो। छोटे भाई-बहन से नहीं निभ पाती। कार्य के लिए संघर्ष नहीं कर पाता।

4) शंखपाल कालसर्प दोष

जब राहु चतुर्थ भाव में हो तथा केतु दशम भाव में हो। सुख-सुविधा में कमी आती है। कारोबार और नौकरी में परेशानी रहती है। माता सुख में कमी। अधिक गुस्सा।

5) पद्म कालसर्प दोष

जब राहु पंचम भाव में हो तथा केतु एकादश भाव में हो। शिक्षा प्रभावित होती है। औलाद होने में देरी। प्रेम-सम्बन्ध में समस्या।

6) महापद्म कालसर्प दोष

जब राहु छठे भाव में हो तथा केतु द्वादश भाव में हो। अधिक दुशमन। कर्जा , शारीरिक कमजोरी।

7) तक्षक कालसर्प दोष

जब राहु सातवें भाव में हो तथा केतु प्रथम भाव में हो। vivahik जीवन पर बुरा असर | विवाह में देरी। सिरदर्द ,उच्च रक्तचाप , क्रूरता।

8) कर्कोटक कालसर्प दोष

जब राहु अष्टम भाव में हो तथा केतु द्वितीय भाव में हो। बीमारी , bachat में कमी। ससुराल से झगड़ा। पैतृक़ सम्पति मिलने में रुकावट।

9) शंखचूड़ कालसर्प दोष

जब राहु नवम भाव में हो तथा केतु तृतीय भाव में हो। जुए,सट्टे की आदत। नास्तिक। रिश्तेदारों से झगड़ा। दुर्भाग्य।

10) पातक कालसर्प  

जब राहु दशम भाव में हो तथा केतु चतुर्थ भाव में हो। सुविचारों में कमी। मानसिक अशांति।

11) विषधर कालसर्प  

जब राहु एकादश भाव में हो तथा केतु पंचम भाव में हो। पैसा कमाने में समस्या। अधिक यात्रा । भाई दुश्मन बन जाता है। बच्चे से भी परेशानी।

12) शेषनाग कालसर्प  

जब राहु द्वादश भाव में हो तथा केतु छठे भाव में हो। कर्जा , सम्मान में कमी। दुश्मन से नुक्सान। बीमारी।

 कालसर्प दोष होने पर जातक पर इसके प्रभाव

1- जिसे कालसर्प दोष होगा उसे सपने में नदी, तालाब, कुएं, और समुद्र का पानी दिखाई देता है ।

2- सपने में वह खुद को पानी में गिरते एवं उससे बाहर निकलने का प्रयास करते हुए देखता है ।

3- उसे रात को उल्टा होकर सोने पर ही चैन की नींद आती है ।

4- उसके सपने में मकान अथवा पेड़ों से फल आदि गिरते दिखाई देता है ।

5- जिसे कालसर्प दोष होगा उसे पानी से और अधिक ऊंचाई से डर लगता है ।

6- उसके मन में कोई अंजाना सा भय बना रहता है ।

7- अक्सर वह सपने में खुद को दूसरे लोंगो से लड़ते झगड़ते हुए देखता है ।

8- ऐसे लोंगो को बुरे व डरावने सपने आते है, एवं अक्सर साँप भी दिखाई देता है ।

9- जिसे कालसर्प दोष होगा और यदि वह संतानहीन हो तो उसे किसी स्त्री के गोद में मृत बालक दिखाई देता है ।

10- अक्सर उसे सपने में विधवा महिलायें दिखाई देती है ।

11- उसे नींद में अपने शरीर पर साप रेंगता हुआ महसूस होता है ।

12- श्रावन के महिने ऐसे लोगों का में मन हमेशा प्रसन्न रहता है ।

करे इन उपायों को

अगर राशियों के हिसाब से देखा जाए तो 12 राशियां हैं और लग्न सारिणी में 12 लग्न है। इस तरह 144 तरह का कालसर्प योग बनता है। सभी के उपाय अलग होने चाहिए। लेकिन मोटे तौर पर निम्नलिखित उपाय करने से कालसर्प योग वाले जातक को लाभ होता है : [1]

1. राहु और केतु की पूजा

2. राहु और केतु का मंत्र जाप

3. सिद्ध कालसर्प योग यंत्र के आगे सरसों के तेल का दीपक जला कर ¬ नमः शिवाय का

4. भगवान कृष्ण का पूजन करें तथा प्रतिदिन ¬ नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जप करें।

5. नव नाग स्तोत्र का पाठ करें।

6. शिवलिंग पर जल चढ़ायें और शिवजी की पूजा करें।

7. सोलह सोमवार का व्रत करें।

8. सर्पों की पूजा करें व सांप को दूध पिलाएं।

9. नाग पंचमी पर नागों की पूजा करें।

10. श्रावण मास में 30 दिन तक महादेव का अभिषेक करें।

11. श्रावण मास के सोमवारों का व्रत करें। इन चार सोमवारों का व्रत करने से 16 सोमवारों के कालसर्प योग के उपाय द्य 51 व्रत का फल मिलता है।

12. हनुमान जी का पूजन करें

13. गणेश व सरस्वती की पूजा करें।

14. तिरूपति बाला जी के समीप कालहस्ती शिव मन्दिर में जाकर कालसर्प योग की शान्ति का उपाय विधि विधान से करायें।

15. शिवलिंग पर चांदी के नाग और नागिन का जोड़ा चढ़ाएं या तांबे का सर्प अनुष्ठान पूर्वक चढ़ाएं।

16. गोमेद और लहसुनिया एक ही अंगूठी में जड़वा कर पहनें।

17. चांदी के नाग स्वरूप लॉकेट में गोमेद और लहसुनिया जड़वाकर गले में धारण करें। (लॉकेट या अंगूठी राहु और केतु के षोडशोपचार पूजन के बाद धारण करें।)

18. पितरों का श्राद्ध करें।

19. पितरों की गति कराएं। (नारायण बली कार्य)

20. महामृत्युंजय का जप करें।

21. राहु और केतु की वस्तुओं का दान करें। जैसे : काले तिल, तेल, स्वर्ण, काले रंग का वस्त्र, काले और सफेद रंग का कम्बल, कस्तूरी, नारियल आदि। यदि यह योग अधिक बलवान हो तो अपनी आय का दस प्रतिशत भाग अवश्य दान करें। दीन दुखियों की सेवा करें व प्रभु स्मरण करें।

22. लाल किताब में कालसर्प योग की शांति के लिए राहु और केतु के भाव अनुसार इन ग्रहों के उपाय कराये जाते हैं जिससे इस योग के प्रभाव में कमी आती है।

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