Uncategorized

शीघ्र विवाह के सरल 5 ज्योतिष उपाय – jaldi shaadi hone ke upay

शीघ्र विवाह के सरल ज्योतिष उपाय – Vivah ke Jyotish Upay – शीघ्र विवाह के उपाय और विवाह संस्कार में आ रही परेशानी। : अगर विवाह योग कन्या या वर है। और विवाह में विलंब हो रहा है तो,निम्न ज्योतिष उपाय करे। जल्दी शादी करना है तो करें ये 5 छोटे-छोटे उपाय। शीघ्र विवाह के अचूक उपाय

शीघ्र विवाह के सरल 5 ज्योतिष उपाय – jaldi shaadi hone ke upay


  • ऐसे जातक को नहाने के जल में 21 गुरुवार तक एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। इससे जल्दी शादी होने के योग प्रबल हो जाते है।
  • गुरुवार के दिन 225 ग्राम आटे के 5 गोले बनाएं और उनमें हल्दी घी गुड़ चना लगाकर गाय को खिलाएं पर अपनी मनोकामना गाय के कान में बोले। ध्यान दें कि गाय सफेद नहीं हो।
  • इस उपाय को करने के लिए किसी भी महीने के गुरुवार को (हिंदी का शुक्ल पक्ष का गुरुवार) के दिन एक प्लेट में 5 मिठाई तीन इलायची और दो सुपारी घी का दीपक लेकर सरोवर के किनारे जाकर पूजा करें। दीपक जलाएं व प्रार्थना करें।
  • शिव पूजन इसके लिए वर (लड़का) और कन्या(लड़की) सोमवार के दिन स्नान करने के बाद सफेद आक(मदार के पत्ते ) के 8 पत्ते तोड़कर लाएं। लेकिन ध्यान रहे सोमवार शुक्ल पक्ष का हो, देखिये 2017 में सोमवार शुक्लपक्ष पंचांग
  • उसके बाद भगवान शिव परिवार की पूजा करें। और जनेऊ को खोलकर पार्वती जी व शिव जी दोनों को मिलाते हुए पहनावे। आक के पत्तों को फूलों की भांति सजाएं। गौरी पूजा करने के उपरांत कन्या पार्वती के समक्ष 108 बार निचे दिए मंत्र का जाप करे।

ॐ कात्यायानी महाभाये महयोगंय धीश्वरी। नन्द गोप सुते देवी पति देहि मनोरमम।


  • यदि लड़का हो तो पति की जगह पत्नी शब्द लगाकर जाप करें ,पक्षियों को दाना, बंदरों को गुड व गाय को हरा चारा खिलाए। कन्या और वर रामचरितमानस के बालकांड के 234 से 236 में दोहे के बीच की चौपाई का जाप करें।

Read also : धन-सम्पत्ति और सुख-समृद्धि के लिए झाड़ू के चमत्कारी टोटके

दोहा : रामचरितमानस के बालकांड 234

 देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।
निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि॥234॥

चौपाई :

जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति॥
प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी॥1॥

परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित्त भीतीं लिखि लीन्ही॥
गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी॥2॥

जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥
जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता॥3॥

 नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना॥
भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि॥4॥

दोहा : रामचरितमानस के बालकांड 235

 पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।
महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष॥235॥

चौपाई : 

 सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी॥
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥1॥

मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें॥
कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥2॥

 बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी॥
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ॥3॥

 सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥4॥

दोहा : रामचरितमानस के बालकांड 236

 जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥236॥

चौपाई :

 हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई॥
राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं॥1॥

सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही॥
सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भय सुखारे॥2॥

करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी॥
बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई॥3॥

 प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा॥
बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं॥4॥


यह पोस्ट आपको कैसी लगी निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बताएं, और अगर कोई सवाल पूछना हो या सुझाव देना हो तो आप अपना मेसेज निचे लिख दें . अगर आपको पोस्ट अच्छे लगी हो तो इसे शेयर और करना न भूले। आप हमसे  Facebook, +google, Instagram, twitter, Pinterest और पर भी जुड़ सकते है ताकि आपको नयी पोस्ट की जानकारी आसानी से मिल सके। हमारे Youtube channel को Subscribe जरूर करे।

Leave a Comment

2 Comments