गुड़ खाने के फायदे और नुकसान – Jaggery benefits and side effects in hindi

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गुड़

अगर आप मीठा खाने के शौकीन है और चाह कर भी मीठा खाना नहीं छोड़ सकते तो आपके लिए सबसे अच्छा रहता है गुड़ का सेवन करना। गुड़ का सेवन करना हमारे शरीर के लिए बहुत अच्छा तो रहता ही है इसके साथ साथ यह आपके मीठा खाने की चाह को भी पूरा कर देता है। इसका सेवन करने से आपके शरीर को स्वास्थ लाभ भी होते है। लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आपका पेट भी खराब हो सकता है और आपके शरीर पर गर्मी के कारण दाने भी पैदा हो सकते है। क्योंकि गुड़ की तासिर गर्म होती है। इसी कारण इसका सेवन भी एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए तभी आपको इसका फायदा होता है।

अगर आप गुड़ का सेवन लगातर 7 दिनों तक करते है तो आपको बहुत सारे स्वास्थ संबंधित फायदे इससे देखने को मिलते है। आज हम इसी बारे में आपको बताने जा रहे है की गुड़ का सेवन लगातार करने से आपके शरीर को क्या क्या फायदे होते है। गुड़ का सेवन करने से जो जो फायदे होते है वह कुछ इस प्रकार है।

गुड़

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परिचय :

गुड़ का सेवन करने से शरीर में होने वाले कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। मिठाई और चीनी की अपेक्षा गुड़ अधिक लाभकारी है। आज कल चीनी का प्रयोग अधिक होने के कारण से गुड़ के उपयोग कम ही हो रहा है। गन्ने के रस से गुड़ बनाया जाता है। गुड़ में सभी खनिज द्रव्य और क्षार सुरक्षित रहते हैं।

विभिन्न भाषाओं में गुड़ का नाम

संस्कृतगुड़
हिन्दीगुड़, भेली
अंग्रेजीट्राकले
बंगालीगुड़
मराठीगूल
गुजरातीगोड़
तेलगूवेल्लामु
फारसीकन्देसिया
अरबीकन्देअस्वद

गुड़ से कई प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं जैसे- हलुआ, चूरमा तथा लपसी आदि। गुड़ खाने से थकावट मिट जाती है। परिश्रमी लोगों के लिए गुड़ खाना अधिक लाभकारी है। मटके में जमाया हुआ गुड़ सबसे अच्छा होता है।

  • पुराना गुड़ का गुण : पुराना गुड़ हल्का तथा मीठा होता है। यह आंखों के रोग दूर करने वाला, भुख को बढ़ने वाला, पित्त को नष्ट करने वाला, शरीर में शक्ति को बढ़ाने वाला और वात रोग को नष्ट करने वाला तथा खून की खराबी को दूर करने वाला होता है।
  • नया गुड़ से नुकसान : नया गुड़ कफ, खांसी, पेट में कीडे़ उत्पन्न करने वाला तथा भुख को बढ़ाने वाला होता है।

गुड़ का प्रयोग दूसरे पदार्थों के साथ सेवन करने पर इसके गुण :

अदरक के साथ गुड़ खाने से कफ खत्म होता है। हरड़ के साथ इसे खाने से पित्त दूर होता है तथा सोंठ के साथ गुड़ खाने से वात रोग नष्ट होता है।

रंग : गुड़ का रंग लाल पीला, काला और सफेद होता है।

स्वाद : इसका स्वाद मीठा होता है।

स्वरूप : गन्ने का रस निकालकर इसे आग पर पकाकर गुड़ बनाया जाता है।

वैज्ञानिक मतानुसार : 100 ग्राम गुड़ में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग खनिज द्रव्य होता है। चीनी में खनिज द्रव्यों और क्षारों का अभाव होता

है। इसलिए चीनी की अपेक्षा गुड़ खाना अधिक लाभकारी होता है। गुड़ में बिटामिन `बी´-1, `बी´-2, विटामिन `सी´ और अल्पमात्रा में विटामिन `ए` होता है।

प्रकृति : गुड़ की प्रकृति गर्म होती है।

  • दोषों को दूर करने वाला : वंशलोचन गन्ना के दोषों को दूर करता है एवं गुड़ के गुणों को भी सुरक्षित रखता है।
  • गुण : गुड़ पेट को हल्का तथा साफ करता है। यह आंतों के घावों को ठीक करने में लाभकारी है तथा सर्दी-जुकाम की अवस्था में इसका सेवन करना अधिक फायदेमन्द होता है। यह कफ को नष्ट करता है तथा हाजमें को बढ़ाता है। गुड़ खांसी और सांस को रोकता है। इसका जला हुआ खार खांसी को दूर करता है।
  • तुलना : गुड़ की तुलना शहद के साथ की जा सकती है।

गुड़ के फायदे खून की कमी दूर करने के लिए – Jaggery For Anemia Prevention in Hindi

इसमें मौजूद पोषक तत्‍वों में लौह तत्‍व और फोलेट अच्‍छी मात्रा में होते है, ये तत्‍व शरीर में लाल रक्‍त कोशिकाओं की सामान्‍य मात्रा बनाए रखने में मदद करते है। इस प्रकार यह एनीमिया (Anemia) को रोकने मे मदद करते है। जिन लोगों को लौह तत्‍व की कमी होती है उन लोगों के लिए गुड़ का सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।

सर्दी, खांसी तथा जुकाम

यदि जुकाम की अवस्था अधिक गंभीर हो तो 30 ग्राम पुराना गुड़, 6 ग्राम पिसी हुई काली मिर्च और 60 ग्राम दही को एक साथ मिलाकर सुबह और शाम को खाने से जुकाम ठीक होकर दुबारा नहीं होता है। जुकाम बिगड़ जाने के कारण हल्का बुखार, अरुचि (खाने का मन नहीं करना), बलगम गिरना, खांसी, नाक में से बदबूदार पानी निकलना, सिर दर्द आदि लक्षण उत्पन्न हो तो गुड़ का सेवन करने से लाभ मिलता है।

  • 10 ग्राम गुड़ को 40 ग्राम ताजे दही और 3 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण के साथ रोजाना सुबह 3 दिनों तक नियमित लेने से जुकाम ठीक हो जाता है।
  • सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचने के लिये गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने चाहिये। इसको खाने से जुकाम और खांसी आदि रोग नहीं होते हैं।
  • 100 ग्राम गुड़ में 1 चम्मच पिसी हुई सोंठ और 1 चम्मच कालीमिर्च मिलाकर इसके 4 भाग कर लें। इसे दिन में 4 बार खाने से खांसी व जुकाम में लाभ मिलता है।
  • सर्दी के मौसम में काले तिल के साथ गुड़ मिलाकर खाने से खांसी, जुकाम और ब्रोंकाइटिस जैसे कष्टकारी रोगों नहीं होते हैं।
  • सर्दी के मौसम में गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से जुकाम, खांसी, दमा व ब्रांकाइटिस आदि रोग दूर हो जाते हैं। ये रोग न होने की अवस्था में भी तिल-गुड़ के लड्डू खाने से शरीर स्वास्थ्य रहता है और खांसी, जुकाम जैसे रोग नहीं होते हैं।

गुड़ खाने के फायदे मासिक धर्म के दर्द को कम करने में – Jaggery benefits For Menstrual pain in Hindi

गुड़ के साथ काले तिल मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे ठंडा करके पीने से बहुत समय का रुका हुआ मासिकधर्म शुरू हो जाता है।

(मासिक धर्म क्या है what is menstruation in hindi)

गुड़ के फायदे त्वचा के लिए – Jaggery For Skin in Hindi

गुड़ का उपयोग सौंदर्य उपचार के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। यह आपकी त्‍वचा को चमकदार और गोरा बनाने में मदद करता है। गुड़ अपने एंटीआक्सिडेंट गुणों के कारण चेहरे की फुंसी और मुंहासों को रोकने में मदद करता है।

गुड़ के फायदे पेट संबंधी रोगों के लिए

गुड़ के साथ बेलगिरी का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से खूनी दस्त, दर्द, मल का रूक कर आना और पेट का बड़ा होना आदि आदि रोग ठीक हो जाते हैं।

  • गुड़ में एक चम्मच अजवायन मिलाकर चाटने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
  • भोजन करने के बाद छोटी-सी गुड़ की डली 10 ग्राम की मात्रा में मुंह में रखकर धीरे-धीरें चूसने से मुंह में खट्टा पानी आना बंद हो जाता हैं, इससे अम्लपित्त, पेट की गैस, मुंह के छाले, हृदय की कमजोरी और शरीर का ढ़ीलापन दूर हो जाता है।
  • गुड़ में काकजंगा मिलाकर खाने से पेट की बीमारीयां ठीक हो जाती हैं।
  • गुड़ के साथ लालमिर्च का सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
  • 10 ग्राम गुड़ को खाना खाने के बाद लेने से पेट में गैस बनने की समस्यां दूर हो जाती है।
  • गुड़ और मेथी दाना को पानी में उबालकर इस पानी को पीने से पेट में गैस बनने की शिकायत दूर हो जाती है।
  • खाने के बाद 25 ग्राम गुड़ प्रतिदिन खाने से पेट का गैस, पेट का बढ़ना आदि रोग ठीक हो जाता है तथा शरीर का स्वास्थ्य भी बना रहता है।

गुड़ खाने के फायदे खून साफ करने में – Gud Ke Fayde For Purifies Blood in Hindi

गुड़ के साथ अजवायन का चूर्ण मिलाकर सेवन करने या गुड़ को पानी में डालकर काढ़ा बनाकर 7 दिनों तक सेवन करने से खून में उत्पन्न दोष दूर हो जाते हैं।

लड़का पैदा करने के घरेलू उपाय – पुत्रोत्पत्ति:

जिनके बार-बार कन्या (बेटी) पैदा होती है, यदि वे पुत्र उत्पन्न करना चाहते हैं तो एक मोर के पंख का चंद्रमा की शक्ल वाला भाग काट-पीसकर इसे थोड़ा गुड़ में मिलाकर 1 गोली बना लें। इसी प्रकार से मोर के तीन पंखों की तीन गोलियां बना लें। गर्भ के दूसरे महीने के अंत में, जब स्त्री का दाहिना स्वर चल रहा हो, अर्थात दाहिने नथुने से श्वांस चल रहा हो तो प्रतिदिन प्रात: 1 गोली तीन दिन तक जीवित बछड़े वाली गाय के दूध में मिलाकर खिला दें। उस दिन केवल गाय के दूध का ही सेवन करें। खाना न खाएं शाम को चावल खा सकते हैं। ऐसा करने से निश्चय ही पुत्र उत्पन्न होगा और चांद जैसा गोरा बच्चा पैदा होगा। यह हजारों बार परीक्षित है।

  • जिस स्त्री के कन्या ही कन्या जन्म लेती हो उसे मासिकधर्म में पलास (ढाक) का एक पत्ता दूध में पीसकर पिला दें। ऐसा करने के बाद जो सन्तान होगा, वह पुत्र ही होगा।

हिचकी:

पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमें पिसी हुई सोंठ मिलाकर सूंघने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।

  • पुराना सूखा गुड़ तथा इसमें सोंठ मिलाकर छोटी-छोटी गोली बना लें फिर एक-एक गोली चूसने से हिचकी में आराम मिलता है।
  • रोज़ाना दिन में सुबह और शाम गुड के साथ लगभग 4 ग्राम सज्जीखार का 21 दिन तक सेवन करने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

कनखजूरे के काटने के कारण आई सूजन:

गुड़ को जलाकर कनखजूरे के काटे हुए स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है। काटने के कारण सूजन आई हो तो वह भी मिट जाती है।

शरीर में रसोली का बनना:

आधे कप पानी में 1 चम्मच गुड़ का शीरा मिलाकर दिन में 3 बार देने से शरीर के अन्दर की रसोली, कैंसर की गांठ (फोड़ा) ठीक हो जाता है। इस प्रयोग से रक्त की गांठे पिघल जाती हैं और रोग जल्दी ठीक हो जाता है।

एलर्जिक का बुखार:

पुराने गुड़ में अदरक का रस मिलाकर सुबह और शाम पीने से शीत पित्त के एलर्जिक का बुखार में आराम मिलता है। इससे भूख न लगने की शिकायत भी दूर हो जाती है।

कब्ज:

2 से 4 ग्राम गुड़ के साथ हरीतकी का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर होती है।

मुंह की दुर्गन्ध:

मूली खाने के बाद गुड़ खाने से डकार में बदबू नहीं आती है।

(मुंह के रोग : जीभ के घाव व छाले)

यकृत का बढ़ना:

1.5 ग्राम पुराना गुड़ और बड़ी (पीली) हरड़ के छिलके का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर गोली बनायें और यह गोली दिन में 2 बार सुबह-शाम हल्के गर्म पानी के साथ 1 महीने तक लें। इससे यकृत (लीवर) और प्लीहा (तिल्ली) यदि दोनों ही बढे़ हुए हों तो यह रोग ठीक हो जाता है।

गुल्म:

गुड़, भांरगी और छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 2 से 4 ग्राम तक की मात्रा में काले तिलों के काढ़े के साथ सेवन करने से खूनी गुल्म ठीक हो जाते हैं।

पैरों की नस फूल जाना:

पैरों की नशें फूल जाने पर रोगी को एक चम्मच गुड़ शीरा एक कप पानी में मिलाकर दिन में तीन बार पीयें। इससे नसों का फूलना ठीक हो जाता है।

गुड़ के फायदे सिर का दर्द में

लगभग 10 ग्राम गुड़ को और 5 ग्राम घी में मिलाकर सेवन करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

गला बैठना:

  • 250 मिलीग्राम से 900 मिलीग्राम गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना 3 से 4 बार सेवन करने से गले का बैठना ठीक हो जाता है।
  • 10 ग्राम उबले हुए चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 मिलीलीटर पानी एक साथ मिलाकर पका लें और पकने पर उसमें घी मिलाकर दिन में सुबह और शाम बार सेवन करने से आराम मिलता है।

खाली पेट गुड़ खाने के फायदे ऊर्जा बढ़ाने में  – Jaggery Good source of energy in Hindi

शुगर और गुड़ दोनों ही मीठे होते है जो हमें शक्ति देते है। लेकिन शक्कर की अपेक्षा गुड़ (jaggery) हमें ज्यादा शक्ति प्रदान करता है है क्‍योंकि इसमें शक्‍कर की तुलना में कार्बोहाइड्रेट ज्‍यादा होता है जो कि हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह खून में आसानी से अवशोषित हो जाता है जिससे हमें तत्‍काल ही ऊर्जा प्राप्‍त होने लगती है। गुड़ को खाने से हमें ऊर्जा बहुत देर तक मिलती रहती है। यह शरीर की थकावट और कमजोरी को दूर करता है।

गुड़ खाने के नुकसान – Gud Ke Nukshan in Hindi

गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन करना गर्म प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक हो सकता है। बसन्त ऋतु में गुड़ नहीं खाना चाहिए क्योंकि इस मौसम में इसका सेवन हानिकारक हो सकता है। पित्त प्रकृति वालों को भी नया गुड़ कभी नहीं खाना चाहिए। मोटापन, बुखार, भूख कम लगना, जुकाम और मधुमेह आदि रोगों की अवस्था में गुड़ नहीं खाना चाहिए। उड़द, दूध अथवा तिल के साथ कभी भी गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए।

 

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