इंटरनेट क्या है कैसे काम करता है | Internet Network in hindi

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इंटरनेट क्या है कैसे काम करता है | Internet Network in hindi

What is Internet in hindi, इंटरनेट क्या है ? इंटरनेट कैसे काम करता है:  यह पेंटागन अमेरिका के रक्षा विभाग में आरम्भ हुआ था। ARPA मतलब Advance Research project Agency नाम का Networking Project लॉन्च किया गया जो ऐसे नेटवर्क की तरह काम करता था जिस्समे युद्ध के परिदृश्य के बारे में सैनिक और वैज्ञानिक एक दूसरे को बिना किसी बाधा के गोपनीय सूचनाये भेज सके। ARPANET कहलाने वाला यह Network सितम्बर 1969 में शुरू हुआ। इसमें वैज्ञानिक और Academic शोधकर्ताओं आपस में जोड़ा। जैसे – जैसे शोधकर्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक मेल के जरिये सूचनाये भेजने के फायदे पता चलते गए इसका प्रयोग बढ़ता गया और इस नेटवर्क ने लोकप्रियता हासिल कर ली। (सुरक्षित वेब पेज सिक्योरिटी सिस्टम) 

इंटनेट का विस्तार INTERNET STRUCTURE

INTERNET STRUCTURE1984 में इस नेटवर्क से 1000 से ज्यादा निजी कंप्यूटर जुड़ चुके थे। आज इंटरनेट ने लाखो करोड़ों कंप्यूटर को आकर्षित कर खुद से जोड़ा है। धीरे – धीरे दूसरे क्षेत्र के शोधकर्ताओं और विद्वानो ने इसका प्रयोग शुरू किया। 1986 में National Science Foundation ने अपने पांच Super computers सेंटरों के विशाल नेटवर्क को जोड़ा।  जिसको NSFnet कहा गया। जटिल नेटवर्कों का या विलय इंटरनेट के रूप में जाना गया।

Internet Activity or Traffic

Worldwide Internet Use Gif Shows Global Traffic In A Strikingly Beautiful Visual1995 तक NFSnet इंटरनेट पर बड़ी मात्र में Communication Activity अथवा Traffic को संभालता रहा। 1995 में उसने अपने नेटवर्क को इंटरनेट से अलग कर दिया। और पुराने स्टेटस रिसर्च नेटवर्क पर लौट आया। बाद में नेट ट्रैफिक विभिन्न निगमों, व्यावसायिक फर्मों और अन्य कम्पनियो ने संभाला जो नेटवर्क उपलब्ध कराते है। ये नेटवर्क टेलीफोन कम्पनियो, केबल और सेटेलाइट कम्पनियो के साथ और इंटरनेट के अंदुरिनी स्ट्रक्टर में सरकारी मदद से आगे बढ़ा।

History Of Internet In Hindi

इंटरनेट क्या है ? कैसे काम करता है Internet Network

इंटरनेट का मालिक कौन है।

इंटरनेट किसी सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं है। यह एक अतिविशाल स्वतंत्र सहकारिता है। हालांकि कोई एक व्यक्ति, कंपनी, संस्था अथवा सरकारी एजेंसी इसका मालिकाना हक़ नहीं रखती है और न ही इसे नियंत्रित करती है, लेकिन कुछ एजेंसी सलाह देकर, मानक निधार्रित कर और अन्य मुद्दो पर जानकारी देकर इसकी सफलता में सहभागी बानी है। इंटरनेट के विभिन्न क्षेत्रो के लिए मानक और Guide Lines तय करने और रिसर्च करने वाला समूह World Wide Consortium (W3C) कहलाता है। वाईफ़ाई हॉटस्पॉट पूर्ण जानकारी | Wifi Hotspot

सर्वर किसे कहते है What is ServerWhat is Server

इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर क्लाइंट और सर्वरों का इस्तेमाल कर दुनिया भर में एक दूसरे को Data Tranfer करते है। वह कंप्यूटर जो किसी Network के स्रोतों जैसे प्रोग्राम और डाटा को व्यवस्थित करता है और एक केंद्रीय स्टोरेज एरिया उपलब्ध करता है सर्वर कहलाता है

Client ServerWhat is client Server

वह कंप्यूटर जो इस Storage Area तक एक्सेज कर प्रोग्राम या डाटा लेना चाहता है Client कहलाता है। इंटरनेट पर एक क्लाइंट जो कई सारे सर्वरो के फाईलो और प्रोग्रामो तक एक्सेस कर सकता है Host Computer कहलाता है। आपका कंप्यूटर होस्ट कंप्यूटर ही है।

इंटरनेट की अंदरुनी संरचना

इंटरनेट backbone

इंटरनेट की अंदरुनी संरचना में एक Transportation System होता है। एक ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम में ट्रैफिक का ज्यादातर लोड हाईवे वहन करते है। जो बड़े शहरो को जोड़ते है। ठीक इशी प्रकार इंटरनेट में कुछ मुख्य कम्युनिकेशन लाईने होती है जो ट्रैफिक का अधिकतम भर वहन करती है। इन Communication लाईनों को संयुक्त रूप से इंटरनेट backbone कहते है।

इंटरनेट क्या है हिंदी में जानकारी

इंटरनेट एक पैकेट आधारित नेटवर्क है। इसका मतलब है की जो डाटा आप ट्रांसफर करते है वह पैकेट में बट जाता है तो तब क्या होता है जब आप इंटनेट के विभिन्न नेटवर्कों के बीच डाटा ट्रांसफर करते है। नेटवर्क, नेटवर्क विशेष कम्प्यूटरों से जुड़े होते है जिनको राऊटर कहते है।
एक Router पहले यह चैक करता है की आपके Packet (डेटा) को कहाँ जाना है फिर वह यह तय करता है की किस दिशसा में इसे भेजा जाए। यह संभव नहीं है की प्रत्येक राऊटर अन्य दूसरे राऊटर से जुड़ा हो। वे सिर्फ आपके डाटा की दिशा तय करते है। राऊटर को यह बताने के लिए की डेटा को कहाँ जाना है , एक तरह का एड्रेस होता है जो ip कहलाता है।

IP (Internet Protocol)

IP (Internet Protocol

IP (Internet Protocol ) के साथ ट्रांफर होने वाला डाटा पैकेट में बटा होता है। यह एक अन्य प्रोटोकॉल द्वारा हैंडल किया जाता है जिसे TCP (transmission control protocol ) कहा जाता है।

बाद में यह खोज गया की IP एड्रेस जो वास्तव में सिर्फ नंबर होते है कंप्यूटर तो आसानी से हैंडल कर सकता है लेकिन मनुष्य होने के नाते हमारे लिए यह संभव नहीं होता। इससे निपटने के लिए 1984 में डोमेन नाम अस्तित्व में आया। Domain Name Internet पर किसी व्यक्ति के अकाउंट लोकेशन होते है।

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