Health

Hyper और Hypothyroid का घरेलु और सफल उपचार

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Hyper और Hypothyroid के घरेलू उपचार –  “हमारे शरीर में अनेक प्रकार की महत्वपूर्ण ग्रन्थियां है। उनमे एक चुल्लिका ग्रंथि (thyroid) भी है। यह Body के Metabolism को नियंत्रित करती है। जब इसमें विकृतिया आ जाती है तो शरीर का Metabolism बिगड़ जाता है। किसी का शरीर भार बढ़ जाता है तो किसी का कम होने लगता है। इसके अनेक लक्षण होते है। इसके निवारण के लिए एलोपैथी में eltroxin का प्रयोग किया जाता है और उसे लम्बे समय तक सारी उम्र लेने का निर्देश दिया जाता है।”

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह आम प्रकोप जन्य दूषित toxic के कारण होती है। अग्निमाद्ध अनेक कारणों से होता है। शारीरिक व मानसिक तनाव के कारणों से भी होता है। Depression Symptoms & Warning Signs

आम का काम स्रोतों को रोकना है। आम को शास्त्रो में “धोरम विषम “ कहा गया है। इस आम के कारण ही जब थायराइड दूषित हो जाती है तो उसका प्रधान कार्य चयापचय बाधित हो जाता है।

इसको दूर करने के लिए हमने दो महत्वपूर्ण Medicine का Use किया।

hyper और hypothyroid के Ayurvedic Medicine

  • एक कांचनार तथा दूसरी आरोग्यवर्द्धिनी वटी। इन दोनों को मिला कर 2 से 4 गोली की मात्रा में दिया गया। और कुछ ही समय में यथोचित लाभ दिखाई दिया।
  • यदि ज्यादा विकृति हो तो कांचनार गूगल 4 गोली तथा 4 आरोग्यवर्द्धिनी वटी अर्थात 8 tablet एक बार में गर्म जल या शुद्ध मधु + ताज़े जल से पीसकर सुबह शाम देते है। परिणाम बहुत शीघ्र आने लगता है।
  • कुछ समय बाद काफी लाभ होने पर 2-2 tablet यानी 4 tabletदोनों की मिलाकर 2 बार पूर्ववत देते है , दो से चार मास तक।
  • इस प्रयोग से रोग निवृति तो होती है। साथ में किसी को रक्तचाप वृद्धि (High blood Presser) तथा कोलेस्ट्रॉल वृद्धि हो तो उसमे भी लाभ मिलता है। cardiovascular diseases में यह प्रयोग लाभदायक होता है। धमनियों का अवरोध दूर होता है।

यह hyper और hypothyroid कैसे होता है ? इस पर विचार करना आवश्यक है।

पुराने समय में सभी वैध लोग शरीर में कहीं ग्रंथि हो। चाहे वह किसी भी प्रकार की क्यों न हो उसको दूर करने के लिए कांचनार गुग्गुल 2 से 4 की मात्रा में देते है। और उससे यथोचित लाभ देखा जाता है। हमने भी अपने लम्बे चिकित्सीय जीवन में छाती तथा गले या शरीर के किसी किसी भी भाग में ग्रंथि हो उसे कांचनार के प्रयोग से दूर किया।

Common Symptoms Of Thyroid in hindi

हमने चिंतन किया जब शरीर की ग्रंथि दूर होती है तो शरीर का रक्त भी पतला होना चाहिए। इशी दृष्टिकोण को सामने हुए इस औषधि का प्रयोग शुरू किया साथ में आरोग्यवर्द्धिनी वटी को भी जोड़ दिया।

यह भी उत्तम Deep digestion तथा शरीर को स्रोतों रोधों को दूर करने वाली , मंद को कम करने वाली एवं शरीर के आंतरिक अवयवों के शोध को दूर करने वाली है। उनमे यकृत पलीहा-वृक्क-हरद्य तथा गर्भाशय आदि भी शामिल है। बड़ी आंत एवं छोटी आंत की विकृति को दूर करने वाली है।

दोनों औषधिया आपस में अधिक सहयोगी लगी और दोनों मिलाकर प्रयोग प्रारम्भ कर दिया। सफलता देखकर आश्चर्य का अनुमान हुआ।

अब इन दोनों औषधियों के घटको पर थोड़ा विचार कर लिया जाए।

कांचनार गुग्गल (Kanchnara Guggulu )में कांचनार छाल 4० तोला , त्रिफला 24 तोला, त्रिकुट (सोंठ, मिर्च, पीपल ) 12 तोला, वरुण की छाल 4 तोला तथा तेज़पात एला दालचीनी मिलाकर तीन तोला तथा इन सबके समान शुद्ध गुग्गुल। इनमे से सभी द्रव्य स्रोतों के रोक को दूर करने वाले है। वरुण की छाल पथरी (अश्मरी ) को निकालने में बड़ी सहायक होती है। वरुणादि क्वाथ का प्रयोग मशहूर है।

  • दालचीनी (Dalchini,Cinnamon): इसका प्रयोग भी आजकल कोलेस्ट्रोल (cholesterol)को दूर करने के लिए किया जाता है।
    त्रिकटु (Trikut): दीपन-पाचन-स्त्रोतोशामक प्रसिद्ध है। इस प्रकार सभी द्रव्य स्त्रोतोरोध को दूर करने वाली है।
  • कुटकी (Kutki- picrorhiza kurroa ): इसका कार्य भेदन के साथ ये महत्वपूर्ण है – पके हुए अथवा अपक्व दोषों को भाले तरह भेदन करके बहार निकाल देती है। फिर नीम के ताज़ा पत्तों के रस की भावना का विधान है।
  • शिलाजीत (shilajit): इसके लिए महर्षि चरक (Chark )ने कहा है ऐसा कोई रोग नहीं है जिसको शिलाजीत जबरदस्ती धक्का देकर बाहर न निकाल दे।
  • गुग्गुल (Gugglu): गुग्गुल का कार्य तो प्रसिद्ध है। सभी रोगों में वैध लोग सदा से करते आ रहे है।

इस प्रकार दोनों medicine के गुंणों पर विचार करके हमने वर्षो से सफलता का अनुभव किया है।
हम समझते है अन्य वैध भी इनका प्रयोग करके लाभ उठाएंगे।

डॉ० एस. एल. वसंत
एलर्जी व जीर्ण रोग विशेषज्ञ
भिषगाचार्य (राज. आयु. कॉलेज, जयपुर )
एच. पी.ए., पंचकर्म (एम. डी.) (पी.जी.टी.सी.ए )


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