बनावटी दर्द hindi short moral stories

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Banawati Dard — moral stories in hindi

माँ एक दिन चौके में खीर बना रही थी. … उसका बच्चा कहीं खेलते – खेलते गिर पड़ा और बड़ी जोर से चीख कर रोया. तो, माँ खीर को छोड़कर भागी और बच्चे को उठा लिया तब तक खीर मैं उबाल आ गया. वह सारी खीर जमीन पर गिर गई.
माँ ने बच्चे को चुप कराया, उसे मिठाई दी और जो कुछ भी थोड़ी बहुत खीर बची थी उसे ठंडा करके बच्चे को खिलाया. बच्चा बोला की माँ तुम मुझे इतना चाहती हो की तुमने खीर को भी कुछ नहीं समझा. माँ बोली – “हाँ बेटा.”
बच्चे को प्यार मिला और फिर खेलने लगा.
एक दिन बच्चे ने सोचा की उस दिन तो माँ ने बहुत प्यार किया था और खीर भी खिलाई थी.
आज कई दिनों से खीर भी नहीं बनी. यह सोच वह जमीन पर गिरा और बड़ी जोर से “चिल्लाया:. माँ चौके मैं बैठी रही और टस से मस नहीं हुई ,  की उसके पास जाये.   अपना खाना बनाती रही और बच्चा चिल्लाता रहा.   वह घंटों चिल्लाता रहा पर माँ उठकर नहीं गई.
फिर वह अपने आप हाथ पैर झारते हुए आया और बोला  – माँ, उस दिन मैं गिरा था तो तुम दौड़ कर चली आयी थी और आज मैं घंटो रोया तुम क्यों नहीं आयी?      कहने लगी की बेटा ! वह दर्द नहीं था.      अगर वह दर्द होता तो मैं सेकंड भी चौके मैं नहीं बैठ सकती थी.         आज तो तुम्हारा बनावटी दर्द था.
वास्तव मैं इसमें कोई शक नहीं है की जिनको सही दर्द है, उनके लिए परमात्मा, महात्मा हमेशा तैयार खड़े है. अगर तुममें बनावटी दर्द है तो न परमात्मा, न महात्मा. अब कौन बनावट कर रहा है – इसको आप अपने आप में परख लो. moral stories in hindi language
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