पारिजात या हरसिंगार का काढ़ा कैसे बनाये और फायदे

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इस लेख में आप जानेंगे Harsingar plant health benefits के बारे में। साथ ही हरसिंगार के पौधे की पहचान और घर में इसका Plant कैसे लगाये। पारिजात को हरसिंगार भी कहते हैं। इसके flower बहुत ही मनमोहक और आकर्षक होते हैं।

आमतौर पर लोग हरसिंगार के फूल को केवल पूजा-पाठ के लिए इस्तेमाल करते हैं। लोगों को यह जानकारी ही नहीं है कि पारिजात या हरसिंगार के फायदे एक-दो नहीं बल्कि बहुत सारे हैं। यह एक फूलो का पेड़ है। यह एक Inflammation व Painkillers होता है। Harsingar Plant Analgesic pain से लाभकारी होता है ।

भारतीय पौराणिक साहित्य के अनुसार पारिजात का वृक्ष धरती पर स्वर्ग से सीधे आया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पारिजात का वृक्ष केवल रात को खिलता है और इसके सभी फूल सुबह होते ही झड़ जाते हैं। इसी कारण पारिजात को रात की रानी ’के रूप में भी जाना जाता है। हरसिंगार के पौधे का वानस्पतिक नाम ‘दुख का पेड़’ है।

ऐसे करे हरसिंगार के पौधे की पहचान

हरसिंगार का पेड़ या पारिजात छोटे या बड़े पेड़ के रूप में विकसित होता है। इसका छोटा पौधा 10–11 मीटर की ऊँचाई तक बढ़ सकता है और इसमें एक कठोर छाल होती है जो दिखने में परतदार और भूरे रंग की होती है। हरसिंगार के पत्ते और छाल का उपयोग अधिक किया जाता है। हरसिंगार को सायटिका के उपचार में सबसे उपयोगी माना जाता है।

Harsingar Botanical Name – Nyctanthes arbor-tristis

हरसिंगार का काढ़ा बनाने का तरीका

इसको एक किलो पानी में 250 ग्राम हरसिंगार के पत्तो को धोकर डालकर धीमी आंच पर उबालें। इसको उबलते हुए जब इसकी चौथाई भाग जल जाने पर आंच से उतार लें और ठंडा कर लीजिए।  जब पत्ते ठंडे हो जाय तो इसको मसलकर कपड़ो पर छान लें।  इन पत्तो को कपड़ो पर इकट्ठा करके इसको निचोड़ लें इस पानी में 10 पंखुड़ो के केसर को पीसकर डाल दें और इसको अच्छी तरह से मिला लीजिए और इसको बोतल में भर लें।

हरसिंगार का काढ़ा पीने के फायदे – Harsingar Plant Health Benefits

Harsingar Benefits and Side Effects

इस काढ़े का 100 ग्राम पानी में प्रत्येक सुबह को खाली पेट इसको पियें।  अगर बोतल का पानी समाप्त होने पर पुनः इसको इसी प्रकार से तैयार कर लें। इस काढ़े को लगभग चार महीनो तक इसका सेवन करने से सायटिका स्थाई रूप से ठीक हो जाता है।  मैने इससे लाभाविंत रोगियों को देखा है।

  • अकड़न , जकड़न , सायटिका दर्द से भरे रोग है। इस तरह के रोगियों को दर्द असहनीय लगता है।
  • यह दर्द किसी एक टांग में होता है दायीं या बायीं में होता है कभी –
  • कभी किसी को दोनों टांगो में भी हो जाता है इस दर्द का आरम्भ
    व्याकरण अनुवाद उलटा अनुवाद इतनी बार इस्तेमाल हुआ buttocks , फिर Waist, thigh से होता हुआ पैर तक भी हो जाता है
  • अगर आपको खड़ा होने पर पैर में सूनापन , झनझनाहट , चीटियों की चलती हुई जैसी अनुभव होती है।
  • रोगी सख्त बिस्तर पर आराम करने से और चिकित्सा कराने से ठीक हो जाता है।

परहेज

उड़द , चावल , मैदे से बनी चीजें , तली हुई चीजें न खाये।  प्रातः काल न ही चाय पियें।  तथा इसके स्थान पर हल्के गर्म पानी में शहद को मिला कर पियें।  कमर को दर्द हो तो तारपीन के तेल की मालिश करे।

 योगासन

कमर दर्द , सायटिका से लाभ दायक आसन

1. मर्कटासन ,

2. कटि उत्तानासन ,

3. मकरासन ,

4. अर्धचन्द्रासन ,

5. उष्ट्रासन ,

6. भुंगासन ।

यह आसन कमर दर्द में उल्टी स्पोंडियोलियोथियासिस होने पर न करें। 7 शलभासन दोनों विधि से करें।

NOTE:- होमोयोपैथिक नैफेलियम  , सिमिसीप्युगा , रस टक्स , ब्रायोनिया , एमोन ,म्यूर  उच्च से उच्चतर शक्तियों में देने से लाभ होता है।  होमोयोपैथिक दवा का सेवन करने से लाभ होता है।

इस लेख में आपने जाना हरसिंगार का काढ़ा कैसे बनाये और Harsingar Plant Health Benefits के बारे में। अब जानिए हरसिंगार पौधे के बारे में।

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