गेंदा के फूल की खेती कैसे करे – Marigold flower cultivation in india

गेंदा के फूल की खेती कैसे करे – How to cultivate marigold flowers in india

गेंदा या गेंदे के फूल (Marigold flower cultivation in hindi) हम भारतीयों के लिए किसी भी तरह के परिचय के लिए आवश्यक नहीं है हम सभी भली भातिं जानते है  गेंदा हमारे घरो की शोभा बढ़ाने के साथ साथ   हमारे हर शुभ और धार्मिक आयोजनों में उपयोग में लाया जाने वाला एक बहत ही सुन्दर और आकर्षक फूल है जिसे हमे Marigold, गेंदा ,गेंधा,झेडू और गेंदे के नाम से जानते है

आइए आज हम कम से कम लागत और देखभाल में की जाने वाली फूलो की खेती में सबसे अग्रणी गेंदे की खेती कैसे करे विस्तार से जानते है

गेंदे के फूल का इतिहास :- History of marigold in hindi

गेंदे के फूल के प्रचार प्रसार के इतिहास की बात करी जाये तो प्राय हमारे यहाँ हर तरह के आयोजन में इसके प्रयोग से ये लगता है की इसकी शुरुवात दुनियाभर में भारत से ही हुयी है परन्तु ऐसा नहीं है गेंदे की दोनों मुख्य किस्मे फ्रेंच गेंदे और अफ्रीकन गेंदे का प्रसार 16 वी सदी से मैक्सिको से हुवा तो जो की धीरे धीरे अपनी मनमोहक सुन्दरता के कारण दुनियाभर में फैला गया

गेंदे के फायदे :- Benefits of marigold in hindi

  • गेंदे के फूल “फूल “ के रूप में तो हमारे काम आते ही ही इसके अलावा ये तेल, इत्र उद्योग और इसके साथ ही इसके कई ओषधिय रूप में भी हमारे काम आते है इसकी जानकारी बहुत कम लोगो को होती है
  • गेंदे की पत्तियों का पेस्ट स्किन के रोगों , , गठिया, मुँहासे, कमज़ोर त्वचा में फायदेमंद होता है इसके साथ ही ये एक्जिमा, और टूटी हुई कोशिकाओं में भी लाभप्रद होता है

गेंदे के फूल के घरेलु नुस्खे और उपाय – Home remedies for marigold flower

  • गेंदे की पत्तियों का पेस्ट फोड़े के उपचार में भी प्रयोग होता है। कान दर्द के उपचार में भी गेंदे की पत्तियों का सत्व उपयोग होता है।
  • पुष्प सत्व को रक्त स्वच्छक, बवासीर के उपचार तथा अल्सर और नेत्र संबंधी रोगों में उपयोगी माना जाता है।
  • टैजेटस की विभिन्न प्रजातियों में उपलब्ध तेल, इत्र उद्योग में प्रयोग किया जाता है।
  • गेंदा जलन को नष्ट करने वाला, मरोड़ को कम करने वाला, कवक को नष्ट करने वाला, पसीना लाने वाला, आर्तवजनकात्मक होता है। इसे टॉनिक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसके उपयोग से दर्द युक्त मासिक स्त्राव, एक्जिमा, त्वचा के रोग, गठिया, मुँहासे, कमज़ोर त्वचा और टूटी हुई कोशिकाओं में लाभ होता है।

गेंदे के फूल की खेती के लिए भूमि का चुनाव :- Selection of land for cultivating marigold flowers

गेंदे की खेती के लिए हमे उचित जल निकास वाली हल्की बुलई दोमट मिट्टी जिसका की PH मान 5.6 से 6.5 के बीच हो को सबसे उत्तम माना जाता है मिट्टी दानेदार और भुरभुरी जितनी होगी उतनी ही लाभदायक होगी

ध्यान रहे व्यवसायिक स्तर पर गेंदे की खेती में अम्लीय या बहुत आधिक क्षारीय भूमि में गेंदे की खेती करने से बचना चाहिए इसके अलावा भूमि में कार्बनिक तत्वों की मात्रा जितनी ज्यादा रहेगी उतनी की फूलो की गुणवत्ता आधिक होगी

गेंदे के फूल की खेती की बीज बुवाई और पौधे के रोपण का समय :- Planting the seeds of marigold flowers and sowing the plant

पुष्पन ऋतुबीज बुवाई का समयपौध रोपण का समय
वर्षामध्य – जूनमध्य – जुलाई
सदी मध्य – सितम्बरमध्य – अक्टूबर
गर्मी जनवरी – फरवरीफरवरी – मार्च

गेंदा के फूल की खेती- जलवायु का चयन :- Selection of climate Marigold flower cultivation

गेंदा फुल को हम गीष्म और शीत दोनों ऋतु या संभवतः सभी तरह के जलवायु में इसकी खेती कर सकते है परन्तु सबसे उपयुक्त शरद ऋतु में गेन्दा फुल की खेती करना आधिक फायदेमंद माना जाता है

Marigold flower cultivation

गेंदे की उन्नत किस्में :- Advanced varieties of Marigolds

गेंदे की मुख्यतः दो प्रजातियां अफ्रीकन गेंदा और फ्रांसीसी गेंदा होती है।

मैरीगोल्ड एक बहुत ही उपयोगी और आसानी से उगाया जाने वाला फूल का पौधा है। गेंदा को विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। गेंदा के कई प्रकार होते हैं। गेंदा की उन्नत किस्में इस प्रकार हैं: –

पूसा बसंती मैरीगोल्ड – Pusa Basanti Marigold

पेडिग्री: गोल्डन येलो सन जायंट

  • चिह्नित वर्ष: 1995 (आईवीआईसी)
  • स्वीकृत क्षेत्र: अखिल भारतीय
  • औसत उपज: ताजा फूल 200-250 क्विंटल / हेक्टेयर और 70-100 किलोग्राम। बीज / हे

विशेषताएँ: मध्यम आकार के पीले फूल जो बीज की बुवाई के 135-145 दिन बाद आने लगते हैं। यह प्रजाति बगीचों और गमलों में उगने के लिए सर्वोत्तम है।

पूसा नारंगी गेंदा – pusa narangi marigold

  • पेडिग्री: क्रैकर जैक गोल्डन जुबली
  • चिह्नित वर्ष: 1995 (आईवीआईसी)
  • स्वीकृत क्षेत्र: अखिल भारतीय (बड़े पुष्प आकार के कारण दक्षिण भारत में अधिक लोकप्रिय)
  • औसत उपज: ताजा फूल 250-300 क्विंटल / हेक्टेयर 100-125 किग्रा। बीज / हे

अभिलक्षण: गहरे नारंगी रंग के फूल, घुमावदार और फूल बुवाई के 125-135 दिन बाद; फूलों में प्रचुर कैरोटीनॉयड (पंखुड़ियों में 329 मिलीग्राम / 1000 ग्राम) और पोल्ट्री उद्योग, खाद्य पदार्थों और दवा निर्माण में उपयोग।

पूसा अर्पिता – Pusa Arpita

  • वंशावली: विषम गुणों के साथ (स्थानीय) संग्रह से चयनित
  • विमोचन वर्ष: 2009 (SVRC, दिल्ली)
  • स्वीकृत क्षेत्र: उत्तरी मैदान
  • औसत उपज: ताजे फूल 180-200 क्विंटल / हे

विशेषताएं: मध्यम आकार के हल्के नारंगी फूल और उत्तरी मैदानी इलाकों में फूल का समय, मध्य दिसंबर से मध्य फरवरी तक।

खेत की तैयारी :- Marigold flower cultivation Farm Preparation 

गेंदे की खेती के लिए हम सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से 2 से 3 बार गहरी जुताई कर लेते है उसके बाद हम खेत में प्रति कुंतल के हिसाब से करीब 10 से 12 टन तक गोबर की खाद पोंधे लगाने के करीब 1 महीने पहले अच्छी तरह मिला लेते है

एवंम पौधा लगाने से पहले प्रति एकड़ में करीब 200 किलो सिंगल सुपर फास्फेट (Single Superphosphate) और 135 किलो म्यूरेट ऑफ़ पोटाश खाद अच्छी तरह से मिला देते है इस तरह से करीब 1 महीने बाद हमे बीच से पोधा निकलता (बिचड़ा ) है जिसे हम शाम के समय में इसे लगाते है

खरपतवार नियत्रंण :- weed control

पौधे की अच्छी तरह पैदावार बढे इसके लिए अति आवश्यक है की खेत में हमारी मुख्य फसल के साथ बढ़ने वाले खरपतवारो का समय समय पर निराई गुड़ाई या अन्य रासानिक कीटनाशको द्वारा खात्मा करते रहे जिससे की गेंदा के फूलों की गुणवत्ता हमे अच्छी मिलती रहे

गेंदे की खेती से कमाई :- Earning from Marigold cultivation in hindi

भारतीय फूलों में सबसे आधिक उपयोगी लोकप्रिय,और हर तरह की मिट्टी और मौसम के अनुकूल लगाया जाने वाला गेंदा का फूल की खेती से की जाने वाली कमाई तो करते है इसके अलावा हम गेंदा की फ़सल से की जाने वाली आमदनी को हम गेंदा के बीजो उत्पादन से और भी ज्यादा हम बढ़ा सकते है समय के साथ ही अब गेंदा की नवीन उन्नत और संकर किस्मों की आवश्यकता भी बढ़ी है बीजो उत्पादन तकनीक को समझ कर हम प्रति 1 किलो बीज को करीब 1250/ तक में बेचा जा सकता है जी की गेंदा की फसल से होने वाली सामान्य खेती से कई गुणा आधिक है

Marigold flower cultivation seeds online / Genda ke Beej

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