इलायची के फायदे और नुकसान -Elaichi (cardamom) Benefits and Side Effects in hindi

इलायची के फायदे और नुकसान -Elaichi (cardamom) Benefits and Side Effects in hindi

इलायची का सेवन आमतौर पर माउथ फ्रेशनर के लिए या मसाले के रूप में किया जाता है। छोटी इलायची का उपयोग खाने के अलावा पूजा पाठ और तंत्र मंत्र में भी किया जाता है। इसके द्वारा इलायची के टोटके, इलायची वशीकरण में इस्तेमाल होता है। यह दो प्रकार की होती है। हरी या छोटी इलाइची तथा बड़ी इलायची।

  • बड़ी इलाइची – जहाँ बड़ी इलाइची व्यंजनों को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है।
  • छोटी इलायची – वहीं हरी इलाइची मिठाइयों की खुशबू बढ़ाती है। मेहमानों की आवभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है।

लेकिन इसकी अहमियत केवल यहीं तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है। संस्कृत में इसे एला कहा जाता है। छोटी इलाइची को संस्कृत में ‘एला’, ‘तीक्ष्णगंधा’ इत्यादि और लैटिन में Alteria cardamomum कहते हैं।

इलायची में पाए जाने वाले पोषक तत्व –  Nutritional and Health Benefits of Cardamom or Elaichi in hindi

1आयरन
2विटामिन C
3नियासिन
4रिबोफ्लेविन
5पोटेशियम
6मैग्नीशियम
7कैल्शियम

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हरी इलायची का उपयोग – green cardamom medicinal uses in hindi

हरी इलायची का उपयोग - green cardamom medicinal uses in hindi

भारत में इसके बीजों का उपयोग अतिथि-सत्कार, मुखशुद्धि तथा पकवानों को सुगंधित करने के लिए होता है। ये पाचनवर्धक तथा रुचिवर्धक होते हैं। आयुर्वेदिक मतानुसार इलाइची शीतल, तीक्ष्ण, मुख को शुद्ध करने वाली, पित्तोत्पादक तथा वात, श्वास, खाँसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रकृच्छ तथा हृदयरोग में लाभदायक है।

इलाइची के बीजों में एक प्रकार का उड़नशील तैल (Essential OIL) होता है।

छोटी इलायची का पौधा कैसा होता है – परिचय | cardamom plant information in hindi

छोटी इलायची का पौधा सदा हरा तथा पाँच फुट से 10 फुट तक ऊँचा होता है। इसके पत्ते बर्छे की आकृति के तथा दो फुट तक लंबे होते हैं। यह बीज और जड़ दोनों से उगता है। तीन चार वर्ष में फसल तैयार होती है तथा इतने ही काल तक इसमें गुच्छों के रूप में फल लगते हैं। सूखे फल बाजार में ‘छोटी इलायची’ के नाम से बिकते हैं। पौधे का जीवकाल 10 से लेकर 12 वर्ष तक का होता है। समुद्र की हवा और छायादार भूमि इसके लिए आवश्यक हैं। इसके बीज छोटे और कोनेदार होते हैं। मैसूर, मंगलोर, मालाबार तथा श्री लंका में इलायची बहुतायत से होती है।

इलायची कितने प्रकार की होती है – Types of cardamom in hindi

छोटी और बड़ी Elaichi (Small and big cardamom) इलायची की जो दो प्रमुख प्रजातियाँ उगाई जाती हैं।

  • अलटेरिया, जिसे हरी या छोटी Elaichi भी कहते हैं, भारत से लेकर मलेशिया तक उगाई जाती है।
  • ऍमोमम, जिसे बड़ी इलायची, Kali Elaichi , Bhuri Elaichi , Nepali Elaichi , Bangali Elaichi या Lal Elaichi भी कहते हैं, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में उगाई जाती है।

इलायची के घरेलू नुस्खे – Benefits and Home remedies of Cardamom in hindi

गले की खराश की समस्या में फायदेमंद है इलायची

यदि आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठते समय और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाएँ तथा गुनगुना पानी पीएँ।

सूजन को कम करने में बहुत लाभदायक इलायची

यदि गले में सूजन आ गई हो, तो मूली के पानी में छोटी इलायची पीसकर सेवन करने से लाभ होता है।

सूखी खांसी, गले की खराश और बंद नाक से छुटकारा दिलाती है  इलायची

सर्दी-खाँसी और छींक होने पर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाएँ।

उल्टी में इलायची के फायदे –  Cardamom powder effect on nausea and vomiting in hindi

बड़ी इलाइची पाँच ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबाल लें। जब पानी एक-चौथाई रह जाए, तो उतार लें। यह पानी पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं।

इलायची से पाएं मुंह के छालों से छुटकारा – Cardamom Benefits For Mouth Ulcer In Hindi

मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर उसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखें। तुरंत लाभ होगा।

पुराने से पुराना पेट का रोग भी इलायची कर देता है खत्म – cardamom treatment for stomach problems in hindi

यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हों, तो तत्काल एक इलाइची खा लें। केले पच जाएँगे और आपको हल्कापन महसूस होगा।

जी मिचलाना य उलटी आना में इलायची के आयुर्वेदिक फायदे –  Ayurvedic remedies of cardamom for Nausea or vomiting in hindi

बहुतों को यात्रा के दौरान बस में बैठने पर चक्कर आते हैं या जी घबराता है। इससे निजात पाने के लिए एक छोटी इलाइची मुँह में रख लें।

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छोटी इलायची खाने के नुकसान – Elaichi Side Effects in hindi

एलर्जी – इलाइची नियमित रूप से खाने या ज्यादा इलाइची खाने से शरीर में इसके दुष्प्रभाव होने लगता है। किसी भी प्रकार की एलर्जी होना, जो खुजली का कारण बनती है, त्वचा पर लाल चकत्ते, शरीर में लाल धब्बे इलाइची के साइड इफ़ेक्ट के कारण होते हैं। आमतौर पर लोग इसपर ध्यान नहीं देते और इसका सेवन करते रहते है। ऐसे में साँस लेने में भी परेशानी होती है। इस एलर्जी के कुछ लक्षण होते जो निम्न हैं

  • गले और छाती में खिंचाव और दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • जी मचलाना या उलटी होना

पथरी का कारक – कई बार इलाइची के नियमित सेवन से पथरी बनने लगती है। एक शोध के अनुसार, ह्यूमन बॉडी इलाइची पूरी तरह से पचा नहीं पता जिससे यह धीरे धीरे पित्ताशय की थैली में जमा होने लगते है। जो आगे पथरी का रूप ले लेता है। वैसे तो पथरी बनने का मुख्य कारण पानी का सेवन कम करना होता है यदि आप पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करते है तो यह कई बीमारी को शरीर में पनपने नहीं देता है।

इलाइची के दुष्प्रभाव

  1. दवाई के साथ इलाइची का सेवन करने से उस दवा का असर नहीं होता है कई बार यह रिएक्शन करके नई समस्या पैदा कर देता है।
  2. इसलिए, जो किसी भी दवा का सेवन करते है। उनको इलाइची का सेवन नहीं करना चाहिए।
  3. यदि आप किसी प्रकार की दवाएं ले रहे हैं, तो इलाइची अक्सर उनके साथ प्रतिक्रिया करके अन्य समस्याएं पैदा करती है।
  4. या कई बार आप दवाइयों के प्रभाव को रोक देंगे।
  5. यदि आप कोई दवा लेते हैं, तो आपको इलायची  खाने की आदत छोड़नी चाहिए।

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