आयुर्वेदिक पौधे गर्भावस्था

धतूरा के औषधीय प्रयोग फायदे और नुकसान – Dhatura stramonium Benefits And Side Effects in Hindi

Quick Facts

बहरापन का इलाज – Deafness

धतूरे के पीले पत्तों को हल्का सा गर्म करके उसका रस निकालकर 2-2 बूंदे करके कान में डालने से बहरेपन का रोग दूर हो जाता है।

स्तनों का दर्द और सूजन – Breast pains and swelling

धतूरा के बीज दर्द में:

  • लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग धतूरे के बीज को दही के साथ खाने से वेदना (दर्द) कम होती है और उल्टी भी नहीं होती है।
  • प्रयोग से पहले धतूरे के बीज को 12 घंटे तक गाय के मूत्र में या दूध में उबालकर शोधन कर लें।

स्तनों में होने वाले दर्द में धतूरे के पत्तों पर एरण्ड का तेल

धतूरे के पत्तों पर एरण्ड का तेल गर्म-गर्म करके स्तनों के उस भाग पर बांधना चाहिए जहां दर्द हो इससे स्तन कठोर हो जाते हैं।

कील, कांटा चुभने पर तुरंत करें ये धतूरा+ गुड़ के उपाय

  • जब कोई कील, कांटा आदि चाहे कितना भी कठोर क्यों न हो, शरीर के अन्दर कहीं चुभ जाये तो धतूरे को गुड़ के साथ खिलाने से कांटा पानी की तरह गल जायेगा।

धतूरे के पत्ते पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक दवा –

  • धतूरे के पत्तों को पीसकर बने रस को सरसों के तेल में मिलाकर सिर की मालिश करने से सिर में मौजूद जुंए समाप्त हो जाते हैं।
  • धतूरे के पत्तों का पेस्ट (लुगदी) या धतूरे के पत्तों के रस के साथ पकाये हुए तेल की मालिश करने से सिर की जुएं तुरन्त समाप्त हो जाती हैं।
  • 3-4 बूंद धतूरे के पत्तों का रस, आधा-आधा चम्मच अजवायन और शहद में मिलाकर सोते समय रोगी को पिलाने से कुछ ही दिनों में पेट के सारे कीडे़ मल के साथ निकल जाते हैं।

धतूरा का टिंचर (टेटनस)

  • 3 से 5 बूंद धतूरा का टिंचर (टिंचर स्ट्रामोनियम) टेटनस के रोगी को उग्रता के अनुसार 3-4 दिन दूध में मिलाकर लेने से रोगी ठीक हो जाता है।

स्तनों में दूध का अधिक मात्रा में होना

  •  धतूरा के पत्तों को हरिद्रा में मिलाकर स्तनों पर बांधने से स्तन में आने वाली सूजन मिट जाती हैं।
  • धतूरे के पत्तों को गर्म करके दिन में 2-3 बार सूजन से पीड़ित स्तन पर बांधने से दूध कम हो जाता है।

सिर की छोटी-छोटी फुंसियों में धतूरे

  • धतूरे या नागरबेल के पत्तों के रस में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर उसमें कपड़े या रूई को भिगोकर सिर पर बांधने से अरुंषिका (सिर की छोटी-छोटी फुंसियों) में लाभ मिलता है। इससे सिर की जूं और कीड़े भी मर जाते हैं।
  • धतूरे के पत्तों को सरसों के तेल में पकाकर तेल को छान लें, और इस तेल को सिर में लगाने से अरुंशिका रोग (सिर की छोटी-छोटी फुंसियां) ठीक हो जाती है।

स्‍तनों में पीड़ा और मास्‍टालजि में धतूरे के पत्तों का लेप

हल्दी और धतूरे के पत्तों का लेप करने से स्तनों की पीड़ा नष्ट हो जाती है।

अंगुलबेल, डिठौन (अंगुली की सूजन)

  • धतूरे के पत्तों को पीसकर, उसमें ‘शहद मिलाकर लेप करने से मवाद वाली अंगुली में छेद हो पीव निकल जाता है। इससे रोगी की अंगुली जल्द ठीक हो जाती है।

पेट में दर्द होने पर धतूरे के बीज…

धतूरे के बीज को दूध में अच्छी तरह से उबालकर शुद्ध करे या गाय के पेशाब मे लगभग 12 घण्टें तक भिगो कर रख लें, फिर इसे 6 मिलीग्राम की मात्रा में दही को मिलाकर खाने से पेट के दर्द में आराम होकर दर्द ठीक हो जाता हैं।

सिफलिस (उपदंश) में धतूरे की जड़

  • लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग धतूरे की जड़ को पान में रखकर खाने से उपदंश से सम्बन्धी रोग मिट जाते हैं।

फोड़ा सुखाने की दवा

  • पीला धतूरा (सत्यानाशी) के बीजों को ठण्डे पानी में पीसकर फोड़े और फुन्सियों पर लेप की तरह से लगाने से सिर का फोड़ा ठीक हो जाता है।

पैरों में ऐंठन और दर्द से राहत दिलाते हैं धतूरे के फल के घरेलू उपाय

हाथ व पैरों की अकड़न व दर्द में धतूरे के 2 फल काटकर 125 ग्राम सरसों के तेल में जलाकर फिर ठण्डा करके छान लें। इस तेल की मालिश करने से हाथ-पैरों की अकड़न ठीक हो जाती है।

हाथ-पैरों की ऐंठन (सायटिका)

आक, पीलवान, काला धतूरा और लाल एरण्ड के 5-5 पत्ते गर्म आग में जलाकर तिल के तेल में मिलाकर उसकी मालिश करके धूप में बैठने से सायटिका मिट जाती है।

नहरूआ (स्यानु)

धतूरे के पत्ते को सिल पर पीसकर लगाने से नहरूआ का रोग ठीक होता है।

मिर्गी (अपस्मार)

धतूराके पत्तों का रस रोगी को मिर्गी की तीव्रता के अनुसार देने से मिर्गी दूर हो जाती है।

फेवस और फंगस के रूप में

धतूरा के पत्तों से बने तेल का लेप करने से ऐसे चमड़ी के रोगों में बहुत लाभकारी होता है।

फीलपांव (गजचर्म)

फीलपांव के रोगी को धतूरे की जड़, एरण्डी की जड़, सम्भालू की जड़, सांठी की जड़, सहजना की जड़ तथा सरसों सबको बारीक पीसकर लेप करने से फीलपांव रोग दूर हो जाता है।

साइटिका – Datura benefits for Cytica in hindi

धतूरे के पत्तों का काढ़ा बनाकर पैरों की सिंकाई करने तथा पत्तों से बने तेल की मालिश करने से रोगी का रोग दूर हो जाता है।

धतूरे के बीज और अकरकरा लिंग दोष – Datura benefits for Penis defect

5-5 ग्राम धतूरा के बीज और अकरकरा, 3 ग्राम अफीम और 20 ग्राम काली मिर्च को पीसकर छानकर उसमें 40 ग्राम चीनी मिलाकर पानी डालकर उसकी मटर के बराबर गोलियां बनाकर रखें। 1 गोली सुबह-शाम पानी से लेने से लिंग की इिन्द्रयों के दोष दूर होते हैं।

सिर का दर्द – Datura benefits for Headache in hindi

नाड़ी का दर्द – Datura benefits for Pulse pain

नाड़ी के दर्द में धतूरा के पत्तों का लेप बनाकर या पत्तों का काढ़ा बनाकर सिंकाई करने से या पत्तों से बने तेल की मालिश करने से लाभ होता है।

बच्चों के आंखों में दर्द – Pain in the eyes of children

जिस दिन आंखों में दर्द हो, उसी दिन धतूरे की पत्तियों का रस निकालकर और थोड़ा गर्म करके कान में डालें। अगर बांई आंख में दर्द हो तो दाहिने कान में डाले और अगर दाहिनी आंख में दर्द हो तो बायें कान में डालें।

सिर की जुएं व लीख

  • सरसों का तेल 4 किलो, धतूरे के पत्तों का रस 16 किलो को लेकर हल्की आग पर पकाते हैं जब तेल मात्र शेष रह जाए तो बोतल में भरकर रख लें। इस तेल को बालों में लगाने से सिर की जूं मर जाती है।
  • धतूरे के पत्तियों के रस को सिर के बालों की जड़ों में लगाने से जुएं व लीखे नष्ट हो जाती हैं। रस में कपूर को मिलाकर लगाने से अधिक प्रभावशाली असर होता है।

उन्माद (पागलपन) – Mania (madness)

  • काले धतूरे के शुद्ध बीजों को पित्त पापड़ा के रस में घोंटकर पीने से उन्माद (पागलपन) शान्त हो जाता है।
  • शुद्ध धतूरे के बीज और कालीमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर बारीक करके पानी के साथ उबाल करके लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की गोलियां बना लेते हैं। यह 1-2 गोली सुबह व रात को मक्खन के साथ देने से नया उन्माद रोग (पागलपन) समाप्त हो जाता है।
  • या उन्माद रोग मस्तिक आघात, शराब या गांजा के सेवन या धूप में घूमने से या प्रसूतावस्था में हुआ हो जिसमें नींद न आती हो उस अवस्था में इस उन्मत्त वटी का सेवन कराने से थोड़े ही दिनों में मन स्वस्थ होकर शान्त हो जाता है।

आंखों की जलन और सूजन – Eye irritation and swelling

धतूरे के ताजे पत्तों का रस आंख पर लेप करने से आंखों का लालपन दूर हो जाता है तथा सूजन और जलन समाप्त हो जाती है।

स्तनों की सूजन – Swelling of the breasts

  • स्त्री के स्तनों की सूजन में धतूरे के पत्तों को गर्म करके बांधने से आराम मिलता है।
  • जिस स्त्री के दूध अधिक होने से स्तन में गांठे हो जाने का डर हो उसके दूध को रोकने के लिए स्तन पर धतूरे के पत्ते बांधने से लाभ होता है।

हैजा (कालरा)

  • हैजे में केवल धतूरा की केसर बताशे में रखकर निगल जाने से हैजा नष्ट हो जाता है।
  • हैजा रोग में धतूरे के पत्ते रस 5 से 6 चम्मच दही में मिलाकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

गर्भधारण

धतूरे के फलों का चूर्ण घी और शहद में मिलाकर चाटने से गर्भ ठहर जाता है।

पागलपन में धतूरा के फायदे एवं सेवन विधि – Datura’s benefits and consumption method in madness in hindi

  • उन्माद (पागलपन) में कृष्ण धतूरा के शुद्ध बीजों को पित्त पापड़ा के स्वरस में घोंटकर पीने से पागलपन (madness) की उत्दंडता शांत होता हैं।
  • शुद्ध धतूरा के बीज और काली मिर्च बराबर लेकर, महीन चूर्ण करके 100-100 मिलीग्राम की गोली बना लें। जल के साथ गर्म करके 1-1 रत्ती की गोली बनायें। 1-2 गोली सुबह-शाम को मक्खन के साथ सेवन करने से उन्माद रोग (psychosis) शांत हो जाता हैं।
  • पागलपन मस्तिष्क में आघात, जन्य अथवा शराब, गंजाम, सूर्य के ताप में भ्रमण आदि से या प्रसूतावस्था में हुआ हो जिसमें नींद न आती हो, उस अवस्था में इस उन्मत्त वटी का सेवन कराने से थोड़े ही दिनों में मन स्वस्था होकर उत्तेजनहीन हो जाता हैं।

सूजन में में धतूरा के फायदे एवं सेवन विधि – Dutura trees and flower properties in hindi

सूजन (inflammation) में धतूरा के पिसे हर पत्तों में शिलाजीत मिश्रित कर, लेप करने से अंडकोष की सूजन, पेट के अंदर की सूजनम फुफ्फुस के पर्दे की सूजन, संधियों की सूजन और हडिड्यों की सूजन में शीघ्र लाभ होता हैं।

धतूरे के बीज खाने के नुकसान – Datura stramonium Side Effects in Hindi

अधिक मात्रा में धतूरे का सेवन करना विष है। ये अपने बेहद खुश्की की वजह से बदन को सुन्न कर देता है। सिर में दर्द पैदा करता है और पागलपन, बेहोशी पैदा करके व्यक्ति की जान ले लेता है। काला धतूरा का सेवन करने से पहले इसकी कौन से बीमारियों में कितनी मात्रा लेनी चाहिए जांच ले। आयुर्वेद चिकित्सको के अनुसार इसके पत्तो के चूर्ण की मात्रा एक ग्रेन तक, बीजो के चूर्ण की मात्रा आधे ग्रेन तक और इसके सत्व की मात्रा पावग्रेन तक है।

स्वभाव : धतूरा गर्म प्रकृति का होता है।

  • हानिकारक : धतूरा नशा अधिक लाता है और प्राणों का भी नाश कर देता है।
  • धतूरे के पत्ते और बीज काफी विषैले होते हैं।
  • धतूरे की निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने पर मुंह, गले, आमाशय में तेज जलन और सूजन पैदा होती है।
  • व्यक्ति को तेज प्यास लगती हैं। त्वचा सूख जाती है। आंखे व चेहरा लाल हो जाता है। शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
  • चक्कर आने लगता है। आंखों के तारे फैल जाते हैं और व्यक्ति को एक वस्तु देखने पर एक से दिखाई पड़ने लगती है।
  • रोगी रोने लगता है। नाड़ी कमजोर होकर अनियमित चलने लगती है। यहां तक की श्वासावरोध होकर या हृदयावरोध होकर मृत्यु तक हो सकती है।
  • धतूरे के विषाक्तता के लक्षण मालुम पड़ते ही तुरन्त ही चिकित्सक की सेवाएं लेनी चाहिए।

दोषों को दूर करने वाला : शहद, मिर्च, सौंफ धतूरा के दोषों को नष्ट करते हैं।

तुलना : धतूरा की तुलना भांग के बीज से की जाती है।

मात्रा : धतूरा के सेवन की मात्रा लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग तक होती है।

गुण : धतूरा नशा, गर्मी, गैस को बढ़ाता है, बुखार और कोढ़ को नष्ट करता है तथा सिर की लीखों व जुओं को खत्म करता है।

धतूरे के जहर को शान्त करने के उपाय :

  • धतूरे के बीज या फल को खा लेने पर शरीर में बड़ी गर्मी पैदा हो जाती है और जलन के साथ खुश्की होने लगती है। धीरे-धीरे बेहोशी भी आने लगती है। धतूरे के जहर की सबसे उत्तम औषधि पलाश (ढाक) है। अगर धतूरे का फल किसी ने खा लिया हो तो ढाक का फूल खिलाइये। पत्तों के जहर में ढाक के पत्तों का रस पिलाइये। धतूरे के जहर में पलाश (ढाक) के बीज खिलाना चाहिए। इससे बढ़कर कोई अन्य उपयोग नहीं है।
  • कपास का पंचांग मिल जाए तो पानी में घोटकर रोगी को पिला दीजिए इससे धतूरे का जहर शान्त हो जाता है।
  • सहजना की जड़ को पानी में पीसकर छान लें। इस दवा को थोड़े शहद के साथ मिलाकर पीने से शरीर के भीतरी भाग के फोड़े, जिगर तिल्ली आदि के रोगों में जरूर फायदा होता है। यह आरोग्यवर्द्धिनी वटी पुनर्नवादि काढे़ के साथ देनी चाहिए।
  • कपास के फूल और पत्ते इनका शीत निर्यास देने से धतूरे का जहर समाप्त हो जाता है।

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