लाल किताब में कमजोर चंद्रमा के लिए उपाय

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चंद्रमा शांति के उपाय – वैसे तो चन्द्र देव का स्वभाव स्वभाव बहुत शांत और ठंडा होता है और यही वजह है कि वो हम सभी को शीतलता प्रदान करते है किन्तु जब वे गुस्से में आते है तो उसके परिणाम बहुत भयंकर और विनाशकारी हो सकते है. इसलिए कभी भी चन्द्र देव को कुपित ना होने दें और अगर वे कभी आपसे रुष्ट हो भी जाएँ तो आप तुरंत कुछ उपायों को अपनाकर उन्हें जल्दी से प्रसन्न कर लें. आज हम चन्द्र देव से जुडी कुछ ऐसी बातें बताने वाले है जिन्हें जानकार आप पता लगा सकते हो कि चन्द्र देव आपसे रुष्ट है या नहीं और अगर है तो उन्हें किस तरह मनाया जा सकता है |

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कुण्डली में चन्द्रमा नीच अथवा मंदा 

आपकी कुण्डली में चन्द्रमा अगर नीच का है अथवा मंदा है और इससे सम्बन्धित क्षेत्र में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो इसके लिए आपको कुछ विशेष उपाय करना होगा. दान को सभी शास्त्रों में श्रेष्ठ और उत्तम कहा गया है अत: शास्त्रों को ध्यान में रखकर आपको भी दान करना चाहिए.

चन्द्रमा के नीच अथवा मंद होने पर शंख का दान करना उत्तम होता है. इसके अलावा सफेद वस्त्र, चांदी, चावल, भात एवं दूध का दान भी पीड़ित चन्द्रमा वाले व्यक्ति के लिए लाभदायक होता है. जल दान अर्थात प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना से भी चन्द्रमा की विपरीत दशा में सुधार होता है. अगर आपका चन्द्रमा पीड़ित है तो आपको चन्द्रमा से सम्बन्धित रत्न दान करना चाहिए |

चन्दमा से सम्बन्धित वस्तुओं का दान

दिनचन्दमा से सम्बन्धित वस्तुओं का दान करते समय ध्यान रखें कि दिन सोमवार हो और संध्या काल हो
दान के लिएज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा से सम्बन्धित वस्तुओं के दान के लिए महिलाओं को सुपात्र बताया गया है अत: दान किसी महिला को दें.
कमज़ोर चन्द्रमाआपका चन्द्रमा कमज़ोर है तो आपको सोमवार के दिन व्रत करना चाहिए
गाय/कौए गाय को गूंथा हुआ आटा खिलाना चाहिए तथा कौए को भात और चीनी मिलाकर देना चाहिए.
दूध में बनाकिसी ब्राह्मण अथवा गरीब व्यक्ति को दूध में बना हुआ खीर खिलाना चाहिए|
मातासेवा धर्म से भी चन्द्रमा की दशा में सुधार संभव है. सेवा धर्म से आप चन्द्रमा की दशा में सुधार करना चाहते है तो इसके लिए आपको माता और माता समान महिला एवं वृद्ध महिलाओं की सेवा करनी चाहिए

यह अपनी दशा/अन्तर्दशा के दौरान उन परिस्थितियों का निर्माण करता है जिससे जातक को मानसिक पीड़ा होती है! जैसा सोचता है उसके ठीक विपरीत फल प्राप्त होता है! चन्द्रमा मन का कारक है! सुख दुःख की अनुभूति मन के द्वारा ही होती है! इसीलिए मानसिक कष्टों का कारन चन्द्रमा ही होता है|

नीच अथवा कमज़ोर चन्द्र होने पर नहीं करें

  • चन्द्रमा कमज़ोर अथवा पीड़ित होने पर व्यक्ति को प्रतिदिन दूध नहीं पीना चाहिए.
  • स्वेत वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए.
  • सुगंध नहीं लगाना चाहिए और चन्द्रमा से सम्बन्धित रत्न नहीं पहनना चाहिए |

कुपित चन्द्रमा के प्रभावी संकेत

  • मानसिक परेशानी –  चंद्रमा के रुष्ट होते ही जो पहला संकेत सामने आता है वो है मानसिक चिंता व परेशानी, ऐसे में जातक खुद को फंसा फंसा महसूस करता है, उसे समझ नहीं आता कि वो अपनी समस्याओं से कैसे बाहर निकलें.
  • माता से दूर होना – जातक की माता भी उससे रुष्ट हो जाती है और वो अपनी माँ के सुख की कमी महसूस करता है. कहने का अर्थ ये है कि उसके और उसकी माता के बीच का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता.
  • बायीं आँख में कमजोरी – अगर किसी व्यक्ति की बायीं आँख अचानक कमजोर हो जाती है तो उन्हें समझ जाना चाहियें कि उनकी कुंडली में चन्द्रमा रुष्ट हो चुके है.
  • आँखों के पास कालापन – यहीं नहीं जातक की आँखों के पास कालापन भी दिखने लगता है जो उसके बुरे समय और थकान को दर्शाता है.
  • छाती में बलगम जमना  सुनने में तो ये आपको सामान्य सा लक्षण लगता है किन्तु जब अगर आप बाकी संकेतों के साथ इसे देखा जाए तो ये पुष्टि करता है कि हाँ सच में चन्द्रमा कुपित हो चुके है. यहीं नहीं उन्हें अन्य वात रोग भी अपना शिकार बना लेते है.
  • पुराने दिनों का स्मरण – क्योकि चन्द्रमा के गुस्सा होने पर जातक का बुरा समय आरम्भ हो जाता है इसलिए उसे बार बार अपने पुराने दिन स्मरण होते रहते है.
  • अधिक नींद आना – ऐसे में जातक खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना थका लेता है कि उसे नींद आने लग जाती है और वो बिस्तर पर पड़ा रहता है |
  • मासिक धर्म में अनियमितता – अगर किसी महिला पर चन्द्र रुष्ट होते है तो उनके माहवारी चक्र में अनियमितता होनी शुरू हो जाती है.
  • बालों का सफ़ेद होना कहा जाता है कि चिंता करने से बाल सफ़ेद होते है जबकि बालों के सफ़ेद होने के पीछे भी चन्द्र देव का ही हाथ होता है.
  • सिर दर्द – जातक को धीरे धीरे अन्य बीमारियाँ अपना शिकार बना लेती है और उनमे सबसे पहले आता है साइनस.
  • जल का असंतुलन – इसके अलावा जातक के अंदर जल का अभाव व असंतुलन बना रहता है, उसकी त्वचा शुष्क हो जाती है, वो खुद को कमजोर महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कुछ लोग तो जल्दी जल्दी पानी पीना आरम्भ कर देते है.
  • शरीर में कैल्शियम की कमी – पानी के साथ साथ पीड़ित के शरीर का कैल्शियम भी लगातार कम होता जाता है और उसके शरीर से दुर्गन्ध भी आने लगती है.

तत्व अनुसार रुष्ट चंद्रमा को मनाएं

  • अग्नि तत्व –  अगर चन्द्रमा अग्नि तत्व में होने पर कुपित होता है तो जातक को सोमवार के व्रत रखने के साथ साथ चंद्रा की हवन सामग्री से हवन अवश्य कराना चाहियें.
  • वायु तत्व – वहीँ उनके वायु तत्व में नाराज होने पर आपको चन्द्रमा के सामान को जमीन में दबा देना चाहियें. अगर आप ये ना कर सकें तो आप चन्द्रमा की अंगूठी को अवश्य पहनें.
  • जल तत्व – लेकिन अगर चन्द्र जल तत्व में रुष्ट है तो आपको सोमवार के दिन कच्चे चावल लेने है और उन्हें बहते पानी में प्रवाहित करना है. इसके अलावा आप किसी महिला को चन्द्रमा का सामान भी अवश्य दें.
  • पृथ्वी तत्व – पृथ्वी तत्व में चन्द्र के गुस्सा होने पर आपको “ ॐ श्राम् श्रीं श्रोम् सः चंद्रमसे नमः ” मंत्र का जाप करना है, ध्यान रहें कि मंत्र जाप रात को या शिवजी की पूजा के वक़्त ही करें.

लाल किताब में कमजोर चंद्रमा के लिए उपाय

चन्द्रमा को मजबूत करना हो तथा धन प्राप्ति की इच्छा हो तो मोती युक्त चन्द्र यंत्र गले में धारण करें।
चंद्रमा जनित कष्ट दूर करने के लिए (चन्द्रमा की शांति के लिए) पूर्णिमा व्रत सहित चन्द्र मन्त्र का विधिवत अनुष्ठान करना चाहिए।
दूध का बर्तन रात क सिरहाने रखकर सुबह कीकर या यगीवृक्ष की जड़ में डालना चाहिए।
चारपाई के चारों पायों में चांदी की कील गाड़ना चाहिए।
घर की छत के नीचे कुआ या हैंडपंप न लगाना चाहिए।
चन्द्र नीच का हो तो चन्द्र की चीज़ो का दान करें। यह उपाय ५, ११, या ४३ दिन या सप्ताह या एक मास लगातार करें।
केतु के साथ चन्द्र होने पर गणपति की उपासना करें।
चन्द्र निर्बलता से शरीर में कैल्शियम की विशेष कमी हो जाती है, अतः उसका सेवन (विशेषकर बच्चों को) बहुत हितकारी है।
कर्क या वृष के निर्बल चन्द्र के लिए भगवती गौरी अथवा पराम्बा ललित की आराधना करें।
चावल , चांदी, दूध आदि का दान करें।
चन्द्र पीड़ा की विशेष शांति हेतु चांदी,मोती,शंख, सीप, कमल और पंचगव्य मिलाकर सात सोमवार तक स्नान करें।
चन्द्र पीड़ित को प्रदोष तथा श्रावण सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए।
शिव चालीसा का नियमित पाठ करें।
सदैव दक्षिणावर्ती शंख जो मंत्रित व सिद्ध हो उसकी पूजा करनी चाहिए |
प्रत्येक सोमवार को बबूल की झाड़ियों में दूध सींचे |
मंत्रसिद्ध नवरतन जड़ित श्रीयंत्र लॉकेट गले में धारण करें।
हरिवंश पुराण के अनुसार जातक को शिव की उपासना करनी चाहिए।
दुर्गासप्तशती का पाठ, चन्द्र सहित सभी ग्रहोंकी अनुकूलतादायक एवं सर्वसिद्धिप्रद होता है।
बलारिष्ट के अनिष्ट से बचाव के लिए बच्चे के गले में चांदी का चन्द्र व सूर्य बनवा कर पहनाये तो बच्चे सुरक्षित व निरोगी रहते है |
द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा व उनका पूजन करना चाहिए।
आसमानी बर्फ (ओले) शीशी में भरकर रखें या गंगाजल का प्रयोग करें।
चन्द्रमा उच्च का हो तो चन्द्र की चीज़ों का दान नहीं देवें।
घर में मंत्रसिद्ध चैतन्य स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित करें एवं उसके सामने श्रीसूक्त के मंत्रो का नियमित पाठ करें।
ॐ नमः शिवाय की नित्य एक माला का जाप मंत्र सिद्ध चैतन्य रुद्राक्ष माला से करें.
अत्यंत दुर्लभ असली एक मुखी रुद्राक्ष को पूजा स्थान पर स्थापित कर उसकी नियमित पूजा करें। अथवा दोमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
तीन सफ़ेद पुष्प प्रति सोमवार एवं पूर्णिमा को कुँए में अथवा बहते जल में प्रवाहित करें।
मंत्रसिद्ध चैतन्य पारद शिवलिंग प्राप्त करके उसका यथाविधि पूजन करने से चन्द्र पीड़ा शीघ्र शांत होती है।
पार्वती माता की पूजा करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें।
मंत्र : ‘ॐ श्रां श्रीं श्रोक्तं चंद्रमसे नम:’। चंद्र के मूल मंत्र का 40 दिन में 11,000 मंत्र का जाप करें।
दान द्रव्य : मोती, सोना, चांदी, चावल, मिश्री, दही, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, सफेद बैल, सफेद चंदन। बुजुर्गो का आशीर्वाद लें ,माता की सेवा करे, घर के बुजुगों ,साधु और ब्राह्मणों का आशीर्वाद लेना ।
रात में सिराहने के नीचे पानी रखकर सुबह उसे पौधों में डालना ।
माता, नानी, दादी, सास एवं इनके पद के समान वाली स्त्रियों को कष्ट नही देना चाहिए।
चांदी का कड़ा या छल्ला पहनना चाहिए।
चंदन का तिलक लगाना चाहिए।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाना चाहिए ।
पलंग के नीचे चांदी के बर्तन में जल रखें या चांदी के आभूषण धारण करना चाहिए ।
गन्ना, सफेद गुड़, शक्कर, दूध या दूध से बने पदार्थ या सफेद रंग की मिठाई का सेवन करना चाहिए ।
चमेली तथा रातरानी का परफ्यूम या इत्र का उपयोग करता चाहिए ।
’ऊं श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:’’ का पाठ करे और जप करें।

जानिए जन्म कुंडली के सभी भावो के लिये अशुभ चन्द्रमा का उपाय

यदि आपकी जन्म कुंडली में चन्द्रमा अशुभ हो तो इसे शुभ बनाये रखने हेतु उपाय करना चाहिए और मंदा होने पर उपचार करना चाहिए–

  1. चंद्रमा शांति के उपाय –  भाव एक में चन्द्रमा की शुभता के लिए बुजुर्ग स्त्री की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए.वट वृक्ष की जड़ को जल से सींचन करना चाहिए.
  2. चंद्रमा शांति के उपाय – भाव दो चन्द्रमा के लिए 40 से 43 दिनों तक कन्याओं को हरे रंग का कपड़ा देना चाहिए
  3. चंद्रमा शांति के उपाय –  भाव तीन में चन्द्रमा के उपचार हेतु गेहूं और गुड़ का दान करना चाहिए.
  4. चंद्रमा शांति के उपाय –  भाव चार में मंदे चन्द्रमा के लिए चन्द्र की वस्तु जैसे चावल, दूध, दही, मोती, सफेद वस्त्र घर में रखना चाहिए,
  5. चंद्रमा शांति के उपाय –  चन्द्रमा पंचम स्थान पर मंदा हो उन्हें बुध की वस्तुएं जैसे हरे रंग का कपड़ा, पन्ना घर में नहीं रखना चाहिए इससे परेशानी बढ़ती है
  6. चंद्रमा शांति के उपाय – भाव छ: में चन्द्रमा की शुभता के लिए रात्रि के समय दूध का सेवन नहीं करना चाहिए.दूध से बने पदार्थ का सेवन किया जा सकता है.
  7. चंद्रमा शांति के उपाय – सातवें स्थान की शुभता के लिए ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे माता को कष्ट हो.
  8. चंद्रमा शांति के उपाय – आठवे स्थान की शुभता के लिए बड़ों का आशीर्वाद एवं चरणस्पर्श लाभप्रद होता है.
  9. चंद्रमा शांति के उपाय –  नवम स्थान में चन्द्रमा के उपचार हेतु मंगल की वस्तुएं जैसे लाल वस्त्र, मसूर की दाल, शहद का दान करना चाहिए.
  10. चंद्रमा शांति के उपाय –  दसवें भाव में चन्द्रमा मंदा होने पर उपचार हेतु चन्द्र की वस्तु घर में रखना लाभप्रद होता है.केले के वृक्ष में जल देने से भी लाभ मिलता है.
  11. चंद्रमा शांति के उपाय – बुध की वस्तुएं जैसे मूंग की दाल, हरे रंग का कपड़ा व पन्ना घर में नहीं लाना चाहिए.
  12. चंद्रमा शांति के उपाय – द्वादश स्थान में चन्द्रमा के मंदे फल से बचाव हेतु बड़ों का आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए.चांदी के बर्तन में दूध पीने से चन्द्रमा शुभ रहता है.

जानिए चंद्र नमस्कार के लाभ— चंद्रमा शांति के उपाय

सूर्य नमस्कार आसन के बारे में आपको तो पता ही होगा। अब हम बात कर रहे हैं चंद्र नमस्कार के बारे में। यह आसन इंसान को उर्जा देता है। चंद्र नमस्कार को केवल पंद्रह से दस मिनट तक करने से इंसान को कई तरह के फायदे मिलते हैं जैसे शरीर में उर्जा का आना, कल्पनाशक्ति का बढ़ना, शंाति देना और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनता है ये आसन।

कैसे करें चंद्र नमस्कार— चंद्रमा शांति के उपाय

ओम् चंद्राय नम: – इस आसान को करने से पहले आप सीधे खड़े हो जाएं। और अपने हाथों को उपर की ओर उठालें। शरीर का सारा हिस्सा पीछे की ओर झुका लें। और अपने दोनो हाथों को आसमान की ओर खोल दें।

ओम् सोमाय नम: – चंद्र आसन का दूसरा चरण में आप अपने हाथों और कमर को समाने की तरफ झुकाते हुए पैरी की तरफ ले जाएं। और सिर को घुटनों से छूने की कोशिश करें। ध्यान रहे घुटने मुड़े ना

ओम् इन्द्रेव नम: – तीसरे चरण में आब आप बांए पैर को पीछे की तरफ ले जाकर उसे सीधे रखें। अब घुटने से दांए पैर को मोड़ते हुए अपने शरीर का भार दाएं पैर पर रख दें। और अपने हाथों को दाएं पैर की ओर ही रखें।

ओम् निशाकराय नम: – यह चंद्र आसन का चौथा चरण है। बाएं पैर के घुटने से जमीने को छूएं। और पैर को 90 डिग्री के कोण में रखें। इसके बाद अपने हाथों को उठाते हुए कमर के उपरी भाग को पीछे की तरफ झुकाएं।

ओम् कलाभृताय नम: – बाएं पैर पर आप अपने शरीर का सारा वजन डाल दें। और दांए पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और हाथों को अपने पंजों के परस में रखें।

ओम् सुधाधराय नम: – इस स्थिति में बांए पैर पर अधिक वजन दें और एैसे खड़ें रह जाएं कि दांए पैर का घुटना जमीन से स्पर्श कराएं। और आपने हाथों को उपर की ओर उठाएं।

ओम् निशापतये नम: – दोनों हाथों को जमीन पर रखें। और कमर के उपरी भाग को जितना हो उतना ही उपर उठा सकें। आप इसे पांच बारी तक कर सकते हो।

ओम् शिवशेखराय नम: –  दोनों घुटनों को जमीन पर टिका लें। और अपने सिर को जमीन पर के साथ स्पर्श करा लें और अपने दोनों हाथों को जमीन पर रख दें।

ओम् अमृतदिधित्ये नम: – इस चरण में दोनों घुटनों को जमीन पर रखें और अपने सिर को हल्का सा पीछे की तरफ झुकाकर अपने हाथों को उपर की ओर रखें।  अब शरीर के सारे वजन को घुटनों व एड़ियों पर रखें।

ओम् तमोध्यानाम नम: – चंद्र आसन के इस चरण में अपने दोनों हाथों को सामने की तरफ रखें, इस आसन में हाथों और पंजों के बल बैठें और घुटनों को जमीन से उपर उठा लीजिए।

ओम् राजराजाय नम: – इस चरण में पैर के दोनों पंजों पर वजन देकर बैठने की कोशिश करें। और जमीन से अपने हाथों को स्पर्श कराएं।

ओम् शशांक देवाय नम: – सीधे खड़े हो जाएं और नमस्ते की मुद्रा में रहें।

चंद्र नमस्कार की सावधानियां— इस आसन की कुछ सावधानियां है

  • जिन लोगों को कमर में दर्द या कमर की हड्डी टूटी हुई हो वे इस आसन को ना करें।
  • गर्भवती महिला भी इस योग को ना करें।
  • इस आसन को धीरे धीरे करें।

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