फाइनेंसियल

बैंक क्या है और कैसे काम करती है। पूरी जानकारी हिंदी में

बैंक (Bank) एक ऐसा वित्तीय संस्था होता हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से या फिर ब्याज कमाने के लिए इन संस्थाओं में जमा करते और जरुरत पड़ने पर समय समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर interest कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं Banking व्यवस्था एक जरुरी आवश्यकता मानी जाती है।

पैसा जमा करने तथा Loan देने के अलावा bank अन्य काम भी करते हैं जैसे, सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषणादि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना, अपने ग्राहकों के लिए उनके चेकों का संग्रहण करना, व्यापारिक बिलों की कटौती करना, एजेंसी का काम करना, गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना देना। अत: बैंक केवल मुद्रा का लेन देन ही नहीं करते वरन् साख का व्यवहार भी करते हैं। इसीलिए बैंक को साख का सृजनकर्ता भी कहा जाता है। बैंक देश की बिखरी और निठल्ली संपत्ति को केंद्रित करके देश में उत्पादन के कार्यों में लगाते हैं जिससे पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और उत्पादन की प्रगति में सहायता मिलती है।

सबसे पहला आधुनिक बैंक

सबसे पहला आधुनिक बैंक इटली के जेनोवा में 1406 में स्थापित किया गया था, इसका नाम बैंको दि सैन जिओर्जिओ (सेंट जॉर्ज बैंक) था

बैंकों का इतिहास

ईसा से दो हजार वर्ष पहले भी राशि उधार लेने देने की प्रथा प्रचलित थी। मनुस्मृति में ब्याज के बदले राशि उधार देने का पर्याप्त संकेत मिलता है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र (ग्रंथ) से भी इस बात का पता चलता है कि प्राचीन काल में साहूकारी का

Bank क्या है और इसका इतिहास – What is Bank in Hindiनियम था परंतु ब्याज की दर एवं राशि वसूल करने के नियम आज जैसे न थे। मध्य एशिया में हुंडी का प्रयोग 12वीं शती के आसपास होने लगा जबकि विदेशी व्यापार का क्षेत्र बढ़ने लगा और एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन या राशि (रकम) भेजने की जरुरत हुई। मुगल सम्राटों ने धनी महाजनों और साहूकारों को करवसूली के अधिकार सौंपे और उन्हें स्थान-स्थान पर कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। जनसाधारण अपनी बचत राशि को इन महाजनों के पास जमा करते और जमा राशि पर महाजन ब्याज भी देते थे। आवश्यकता पड़ने पर लोग इन्हीं महाजनों से राशि उधार लेते थे जिसपर उन्हें ब्याज देना पड़ता था। इस प्रकार आधुनिक बैंकों का प्रारंभ होने के पूर्व महाजन ही बैकिंग का काम करता था, जिसके पास धन राशि जमा की जाती थी और रुपया उधार भी मिलता था।

अंगरेजों ने अपनी व्यापारिक एवं मौद्रिक आवश्यकताओं के लिए एजेंसी गृह और ज्वाइन्ट स्टाक बैंक स्थापित किए। 18वीं शताब्दी के अंत में औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप इंग्लैंड और यूरोप में व्यापार की वृद्धि हुई और वहाँ नए नए व्यापारिक केंद्र बनते गए। भारत में भी सन् 1806 में ‘बैंक ऑव कलकत्ता’ स्थापित हुआ तथा इसके पश्चात् सन् 1840 तथा सन् 1843 में एक के बाद एक ‘बैंक ऑफ़ बंबई’ और ‘बैंक ऑफ़ मद्रास’ स्थापित किए गए। ये तीन प्रेसीडेंसी बैंक विदेशी पूँजी और संचालन से चलाए गए थे और इनका काम ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार में सहायता करना था। इसी काल में सन् 1844 में बैंक चार्टर ऐक्ट के अनुसार इंग्लैंड में बैंक ऑफ़ इंग्लैंड बनाया गया। अंशधारियों का बैंक भारत में सीमित देनदारी के आधार पर सबसे पहले सन् 1881 में ‘अवध कमर्शियल बैंक’ बनाया गया। हालांकि इससे पहले भी इलाहाबाद बैंक और एलायंस बैंक ऑफ़ शिमला बन चुके थे परंतु ये दोनों बैंक विदेशी प्रबंध में थे। इसके पश्चात् व्यावसायिक बैकों की संख्या बढ़ती गई। सन् 1906 से लेकर सन् 1913 तक बैंकों में काफी वृद्धि हुई। भारत के प्रसिद्ध बैंक, जैसे बैंक ऑफ़ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ बड़ौदा इसी बीच स्थापित हुए। परंतु सन् 1913 के बाद बैंकों का संकटकाल आया जिसमें अनेक बैंक बंद करने पड़े। सन् 1913 -17 के बीच भारत में लगभग 90 बैकों को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ा। पहले महायुद्ध समाप्त होने पर बैकों की स्थिति में पुन: सुधार हुआ। सन् 1921 में भारत के तीनों प्रेसीडेंसी बैंकों को मिलाकर इंपीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया बनाया गया। यह एक सरकारी बैंक था पर जनता के साथ भी लेनदेन करता था। १ अप्रैल 1935 को भारत में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना की गई।

दूसरे विश्व युद्धकाल में अनेक नए नए बैंक खोले गए। भारत का युनाइटेडश् कमर्शियल बैंक इसी काल में बनाया गया। युद्ध समाप्त होने के पश्चात् बैंकिंग व्यवसाय में कुछ शिथिलता आने लगी। बैकिंग कानूनों में परिवर्तन संशोधन किए जाने लगे ताकि बैंकों के प्रबंध संचालन में कुशलता एवं मितव्ययिता आ जाए। भारत का बैंकिंग कंपनी कानून सन् 1949 में पास किया गया। भारत में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया तथा इंपीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया का राष्ट्रीयकरण क्रमश: सन् 1949 और सन् 1955 में कर लिया गया।

सेवाएँ

बैंक की क्रियाओं और सेवाओं को चार वर्गों में बाँटा जा सकता है :

  • जनता से राशि लेकर जमा करना,
  • जनता को ऋण तथा अग्रिम धन देना,
  • ग्राहको के लिए एजेंट बनकर काम करना,
  • विविध सेवाएँ प्रदान करना।

राशि जमा करना 

राशि जमा करने में बैंक प्राय: तीन प्रकार के लेखे खोलते हैं : (१) चल लेखे, (२) स्थिर लेखे, (३) बचत लेखे। चल लेखे में जमा राशि बैंक को जमाकर्ता की माँग पर किसी समय भी भुगतान करनी पड़ती है। अत: इसे बैंक की ‘माँग देनदारी’ भी कहते हैं। स्थिर लेखों में एक निश्चित अविध के लिए राशि जमा की जाती है जो अवधि समाप्त होने से पहले नहीं निकाली जा सकती। यदि कोई जमाकर्ता स्थिर लेखे में जमा अपनी राशि को अवधि पूर्ण होने से पूर्व निकालना चाहे तो उसे राशि पर ब्याज नहीं मिलता। इस प्रकार की जमा राशि को बैंक ‘काल देनदारी’ कहते हैं। तीसरे प्रकार की जमा बचत लेखे में की जाती है। बचत लेखे में निर्धारित सीमा से अधिक राशि जमा नहीं की जा सकती। इस प्रकार के लेखे कम आयवाले लोगों की बचत को प्रोत्साहन देने के लिए खोले जाते हैं। कभी कभी विशेष कार्यों के लिए विशेष प्रकार के लेखे भी खोले जाते हैं। उदाहरणार्थ, विवाह के लिए धनराशि संग्रह के हेतु विवाह लेखा, शिक्षा के लिए राशि संग्रह करने के हेतु शिक्षा लेखा आदि।

ऋण 

बैंक द्वारा ऋण तथा अग्रिम कई रूपों में दिए जाते हैं :

  • सामान्य ऋण एवं अग्रिम राशि स्वीकृत करके,
  • अधिविकर्श द्वारा,
  • नकद साख के रूप में,
  • बिलों की कटौती करके

बैंक अपने ग्राहकों और अन्य विश्वसनीय व्यक्तियों तथा संस्थाओं को केवल व्यवसाय एवं उत्पादन संबंधी कार्यों के लिए ऋण देते हैं। ऋण देते समय बैंक ऋणयाचक के नाम से एक लेख खोलकर उसमें ऋणराशि जमा कर देते हैं जिसके बल पर ऋणयाचक आवश्यकतानुसार समय समय पर चेक लिखकर राशि लेता रहता है। इससे बैंक को सकल ऋणराशि एक साथ ही ऋणायाचक को दे देने की आवश्यकता नहीं होती जिससे बैंक का हानिभय कम हो जाता है। ऋण वैयक्तिक साख तथा माल की जमानत पर स्वीकृत किए जाते हैं। अधिविकर्श द्वारा ऋण देने से बैंक अपने जमाकर्ता को उसके चल तथा बचत लेखों में जमा राशि से अधिक राशि निकालने का अधिकार दे देता है। पर ऐसा अधिकार प्राप्त करने से पूर्व ग्राहक को अपने बैंक के साथ अधिविकर्श की राशि, उसकी अवधि, ब्याज की दर आदि मामलों पर निश्चित समझौता करना पड़ता है। बैंक व्यावसायिक माल की जमानत पर तथा प्रणपत्रों और साखपत्रों की साख पर भी ऋण देते हैं। माल को अपने गोदामों में रखकर या व्यापारियों के गोदामों में अपना ताला लगाकर उसकी जमानत पर ऋण दिए जाते हैं। पर इस प्रकार ऋण देने से पहले बैंक माल के वास्तविक मूल्य पर छूट लगा लेते हैं।

बिलों की कटौती द्वारा भी बैंक से ऋण प्राप्त किया जा सकता है। कोई भी मालविक्रेता अपने खरीदार के नाम विनिमय बिल लिखकर उसपर उसकी स्वीकृति प्राप्त करके किसी बैंक से उस स्वीकृत बिल की कटौती करा लेता है। कटौती करने पर बैंक अपना कमीशन काटकर बिल की शेष राशि बिलधारक को दे देता है और फिर बिल की अवधि समाप्त होने पर उसे बिल के स्वीकृतिकर्ता से पूरी राशि मिल जाती है। इस प्रकार दिया गया ऋण प्राय: अल्पकालीन होता है।

एजेंसी

बैंक अपने ग्राहकों के लिए एजेंसी का काम भी करता है। एजेंसी संबंधी क्रियाएँ इस प्रकार हैं : ग्राहकों के लिए बिलों, चेकों तथा प्रणपत्रों की राशि वसूल तथा उनकी ओर से चुकाए जानेवाले बिलों, चेकों तथ प्रणपत्रों का भुगतान करना, किसी व्यक्ति अथवा संस्था को नियमित रूप से एक निश्चित राशि भुगताना, बीमा कंपनियों को प्रव्याजि (बीमा की किश्त) की राशि चुकाना, सरकार का ग्राहकों की ओर से आयकर चुकाना तथा उनकी ओर से मालगुजारी चुकाने की व्यवस्था करना, कंपनी के अंशों पर लाभांश तथा ऋणपत्रों पर ब्याज वसूल करना और सरकारी सिक्यूरिटियों का क्रय-विक्रय करना तथा उनके सलाहकार और प्रतिनिधि की हैसियत से काम करना।

पारंपरिक बैंकिंग गतिविधियाँ 

बैंक जाँच या चालू लेखा (checking or current accounts) को संचालित करने के लिए ग्राहकों को चेक (cheque) जमा करने पर और चेक को ग्राहाकों के चालु खातों में जमा करने पर संगृहीत करते हैं बैंक ग्राहकों को तार अंतरण (telegraphic transfer), EFTPOS (EFTPOS) और एटीएम (ATM) जैसे अन्य भुगतान विधियों में भी योग्य हैं

बैंक चालु खाते में धनराशि को स्वीकार कर रुपया स्वीकार करते हैं और banknotes (banknotes) और बांड (bonds) जैसे उधार प्रतिभूति जारी कर मियादी जमा स्वीकार करते हैं बैंक अग्रिम बनाकर ग्राहकों को चाऊ खाते पर रुपया उधार देते हैं, किस्त ऋण और बाजारू उधार प्रतिभूति और उधार के अन्य प्रारूपों में उधार देते हैं

बैंक, प्रायः सब भुगतान सेवा को प्रदान करते हैं और एक बैंक खाता अधिकाँश व्यापारिओं, व्यक्तियों और सरकार द्वारा अनिवार्य मन जाता है गैर बैंक जो प्रेषण कंपनियों की तरह भुगतान सेवा प्रदान कर रही है, सामान्यतः एक बैंक खाता का पर्याप्त विकल्प माना जाता है

बैंक अधिकाँश धन घरेलु और गैर वित्तीय व्यापार से उधार लेता है और अधिकाँश धन घरेलु और गैर वित्तीय व्यापार को देता है, पर गैर बैंकिंग उधारदाता एक महत्वपूर्ण और कई मामलों में पर्याप्त विकल्प बैंक ऋण के लिए देता है और धन बाज़ार कोष, नकद प्रबंधन न्यास और अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय न्यास और अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान कई मामलोंमे बैंक को उधार के लिए विकल्प प्रदान करते हैं

परिभाषा

बैंक की परिभाषा हर देश के अनुरूप अलग-अलग है। अंग्रेज़ी आम कानून (English common law) के तहत, एक बैंकर एक व्यक्तिके रूप में परिभाषित है जो बैंकिंग के व्यापार को करता है, जो इस प्रकार निर्दिष्ट है[1]

  1. अपने ग्राहकों के लिए चालू खातों के संचालन
  2. उस पर तैयार की चेक और भुगतान
  3. अपने ग्राहकों के लिए चेक का संग्रह

NRI के लिए बैंकिंग सेवा

जो लोग इंडिया से बाहर रहते हैं वो भी अकाउंट खुलवा सकते हैं। NRI लगभग सभी भारतीय बैंको में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं. NRI के लिए 3 तरह के अकाउंट खोलने की सुविधा दी जाती है.

  1. Non-resident Account(Simple) – NRO
  2. NRI (External) Rupee Accounts – NRE
  3. Non Resident (foreign currency) Account – FCNR

विभिन्न भारतीय कमर्शियल बैंक – Different type of India’s Commercial Banks
भारत में बहुत तरह के कमर्शियल बैंक हैं. जिनको हम यहाँ अलग अलग category के रूप में विभाजित करते हैं. तो चलिए इन के बारे में जानते हैं.

Central bank:

RBI भारत का सेंट्रल बैंक है जो भारत सरकार के अंतर्गत काम करता है. इसका सारा कंट्रोल सेंट्रल गवर्नमेंट के पास होता है. इस का सारा कमांड एक गवर्नर को दिया जाता है जिसका चुनाव सेंट्रल गवर्नमेंट करती है. सेंट्रल बैंक ही देश की सारी बैंको को संचालन के लिए दिशा निर्देश देती है.

Public Sector bank :

भारतीय स्टेट बैंक और उसके सभी एसोसिएट बैंक्स एक ग्रुप के रूप में कामकरति है जिसे ‘स्टेट बैंक ग्रुप’ के नाम से जाना जाता है। इस में 20 nationalized हैं. रीजनल रूरल बैंक भी प्राइवेट सेक्टर बैंक के द्वारा ही स्पांसर किये जाते हैं.

Private Sector Bank :

प्राइवेट सेक्टर के अंडर इस तरह के बैंक आते है।

  • Active foreign bank in India
  • Old- Generation
  • New generation
  • Non-Scheduled
  • Scheduled Co-operative

Development Bank:

किसी स्पेशल सेक्टर के डेवलपमेंट या विकास के लिए जिन बैंको को शुरू किया जाता है उन्हें डेवलपमेंट बैंक बोला जाता है. जैसे बिज़नेस, कृषि, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, ये बहुत खास होते हैं जिनकी कुछ विशेस्ताएं मैं यहाँ बता रहा हूँ.

दूसरे साधारण बैंक्स की तरह ये जनता से पैसे को डिपाजिट करने का काम नहीं करती है.
ये commercial बैंक्स की तरह short term लोन नहीं बल्कि long term लोन देने का काम करते है.
इसका मुख्य काम अपने अंतर्गत आने वाले सेक्टर को लोन देना और बिज़नेस को तेज़ी से डेवेलोप करना और देश की प्रगति की रफ्तार को बढ़ाना है.

Industrial sector से related:

  1. IDBI – Industrial development bank of India
  2. UTI – Unit trust of India
  3. ICICI Ltd. – Industrial Credit and Investment Corporation of Indian bank
  4. IFCI – Industrial Finance Corporation of India Ltd.
  5. SIDBI – Small Industrial Development Bank of India
  6. Agriculture से related :
  7. NABARD – National bank for Agriculture and Rural Development
  8. LDB – Land Development Bank.

इसके 2 प्रकार होते हैं.

1. State level

2. District Level

Import/Export se related:

EXIM – Export-Import bank of India.

Cooperative Sector Bank :

इसे सहकारी बैंक के नाम से भी जाना जाता है. सहकारी टाइप ग्रामीण (रूरल) लोगों के लिए बहुत लाभ दायक होता है. इस तरह से सहकारी को भी 3 भागों में विभाजित किया जाता है।
Primary Agricultural Credit Society

  • State cooperative
  • Central cooperative

दोस्तोँ अब आप हमारे देश में बहुत तरह के established बैंक्स के बारे में जान चुके होंगे. साथ ही इनके काम क्या क्या है और किस आधार पर इन्हे अलग अलग भागो में बांटा गया है वो भी समझ चुके होंगे. बैंकिंग का इतिहास भारत में भी बहुत पुराना है जैसा की हमने देखा की पूरी दुनिया में इसका चलन कैसे और कहाँ से शुरू हुआ. साथ ही ये भी जानने को मिला की भारत में इसकी शुरुआत कैसे हुई.

इसे अपने Facebook, ट्विटर, गूगल प्लस अकाउंट के माध्यम से सोशल मीडिया पर भी शेयर करे और इस ब्लॉग को आगे बढ़ने में मदद करे. इस ब्लॉग के हर नए पोस्ट के अपडेट पाने के लिए newsletter को सब्सक्राइब करे. इससे आपको आपके ईमेल नए पोस्ट के अपडेट मिलते रहेंगे.

About the author

inhindi

Leave a Comment

Add Comment