अजी नो मोटो – Aji-No-Moto | Ajinomoto

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।

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जान लें कि कैसे-

सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।

इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।

1. पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।

2. अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।

3. उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।

4. व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।

5. अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।

6. अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है।

7. इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए।

8. इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है।

9. जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

Msg can cause Knee pain in hindi

MSG/ एमएसजी पाए जाने वाले फूड आइटम

  1. फूड फैकेट
  2. शूप पैकेट
  3. ग्रेवी पैकेट
  4. नूडल्स और कप नूडल्स
  5. प्रिजर्व्ड फिश और मीट
  6. टैमेटो केचअप
  7. सोया सॉस
  8. चैनीज सभी प्रकार के फूड
  9. सभी प्रकार के प्रिजवर्ड फूड

अजी नो मोटो के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उत्तर

QA . ग्लूटामेट क्या है?

ग्लूटामेट एक अमिनो अम्ल है जो मांस, सब्जियाँ, मुर्गी तथा माँ के दूध जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों में प्राकतिक रूप से पाया जाता है।

मानव शरीर भी बड़ी मात्रा में ग्लूटामेट उत्पन्न करता है। मांसपेशियों, मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों में लगभग चार पौंड जितना ग्लूटामेट पाया जाता है। गाय के दूध की तुलना में माँ के दूध में ग्लूटामेट की मात्रा बहुत अधिक होती है । ग्लूटामेट दो रूपों में पाया जाता है। “संयुक्त ग्लूटामेट” (अन्य अमिनो अम्ल से जुड़े हुए जो प्रोटीन के अणु बनाते हैं) और मुक्त ग्लूटामेट (प्रोटीन से जुड़ा हुआ नहीं)। भोजन के स्वाद को बढ़ाने में केवल मुक्त ग्लूटामेट ही प्रभावशाली होता है। अपने स्वादिष्ट गुणों के कारण भोजन में अक्सर उपयोग में लिये जाने वाले टमाटर और मशरूम जैसे खाद्य पदार्थों में प्राकतिक रूप से उत्पन्न मुक्त ग्लूटामेट की मात्रा अधिक होती है।

QA . मोनोसोडियम ग्लूटामेट क्या है?

मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एम एस जी) ग्लूटामिक अम्ल का सोडियम नमक (ग्लूटामेट) है। एम एस जी स्वादवर्धक है जिसका व्यापक उपयोग लगभग एक शताब्दी से भोजन के श्रेष्ठ स्वाद को उभारने के लिए किया जा रहा है।

जब एम एस जी भोजन में मिलाया जाता है तब वह उसे खाद्य में प्राकतिक रूप से उपस्थित ग्लूटामेट जैसी ही स्वाद-क्रिया प्रदान करता है। एम एस जी में पानी, सोडियम और ग्लूटामेट समाविष्ट होते हैं। एम एस जी का सेवन करने पर शरीर द्वारा उन्हें सोडियम के छोटे अंशों में और ग्लूटामेट में विभक्त किया जाता है।

QA .  अजीनोमोटो / एम.एस जी कैसे बनता है?

सामान्यतया एम एस जी खमीरीकरण की प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। यह सोया सॉस, सिरका और दही बनाने जैसी ही प्रक्रिया है।

प्रक्रिया मकई, चुकुंदर या गन्ने के खमीरीकरण से प्रारंभ होती है। तैयार उत्पाद शुद्ध, सफेद कणदार होता है जो आसानी से पिघल जाता है और अनेक भोज्य पदार्थों में अच्छी तरह से समाहित हो जाता है।

QA . एम एस जी किन व्यंजनों में उपयोग किया जाता है?

एम एस जी का उपयोग कई नमकीन व्यंजनों जैसे मांस, मछली, मुर्गा तथा अनेक सब्जियों और सूप, सॉस तथा मेरिनेड्स में किया जा सकता है। जहाँ एम एस जी नमकीन और खट्टे स्वाद के साथ अच्छी तरह से एकरूप हो जाता है वहीं यह मीठे या कड़वे व्यंजन के साथ थोड़ा सा या नहीं के बराबर सहायक होता है।

QA . एक दिन में एम एस जी का उपयोग कितनी मात्रा में करें?

खाद्य योज्य के रूप में एम एस जी के प्रति दिन के उपयोग की कोई सीमा नहीं है क्योंकि खाद्य योज्य की एफ ए ओ /डब्ल्यू एच ओ के विशेषज्ञों की संयुक्त समिति (जे ई सी एफ ए)* जैसे वैज्ञानिक और विनियामक संगठोनों ने अपने गहन वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर एम एस जी को सुरक्षित श्रेणी ” स्वीकार्य दैनिक सेवन निर्दिष्ट नहीं” में रखा है।

  • वैसे भी एम एस जी स्वयं-सीमित तत्व है। एक बार पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने के बाद
  • भोजन के स्वाद पर अतिरिक्त मात्रा का प्रभाव, यदि पड़ता भी है तो, बहुत कम पड़ता है।
  • वास्तव में एम एस जी के अधिक उपयोग से स्वाद बिगड़ जाता है और पैसे की बरबादी होती है।

QA . क्या एम एस जी युक्त भोजन से और भोजन में प्राकतिक रूप से उपलब्ध ग्लूटामेट से शरीर में चयापचय की क्रिया भिन्न-भिन्न होत है?

नहीं।*भोजन में प्राकतिक रूप से पाया जाने वाला ग्लूटामेट और एम. एस.जी द्वारा प्राप्त ग्लूटामेट एक समान है।

इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप एक ओर टमाटर, परमेसन, चीज़, अखरोट और सोय सॉस जैसे ग्लूटामेट से भरपूर खाद्य और सामग्री को चुनें या दूसरी ओर एम एस जी चुनें। दोनों में ग्लूटामेट के गुण समान हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ दशकों से यह जानते हैं कि हमारा शरीर खाद्य में प्राकृतिक रूप से मिले ग्लूटामेट और एम एस सी से मिले ग्लूटामेट के बीच कोई अंतर नहीं करता। यहाँ तक कि आज की अति आधुनिक तकनीकी भी इसे भिन्न नहीं बता सकती। उदाहरण के लिए यदि आप एक थाली में रखें स्पेगेटि का विश्लेषण करें तो आप उसमें रहे ग्लूटामेट की कुल मात्रा का अनुमान लगा सकतें है। वैसे भी, ग्लूटामेट तो ग्लूटामेट है, यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि यह ग्लूटामेट किससे आया है? टमाटर से, परमेसन चीज़ से या एम एस जी से ।

QA . एम एस जी द्वारा भोजन में कितना सोडियम आता है?

एम एस जी में रहे कम सोडियम के कारण सामान्य भोजन के कुल सोडियम में इसका योगदान बहुत ही कम है। तुलना करके देखें, एम एस जी में लगभग 12… सोडियम है जबकि नमक में 39* है और नमक से कई कम मात्रा में एम एस जी का उपयोग किया जाता है।

QA . क्या एम एस जी सुरक्षित है?

हाँ। एम एस जी का अनेक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने वैज्ञानिक और नैदानिक रूप से गहन अध्ययन किया है उन सभी को यही निष्कर्ष मिला है। एम एस जी बार बार सुरक्षित सिद्ध हुआ है। [1]

QA . क्या एम एस जी गर्भवती महिलाओं और नवजात के लिए सुरक्षित है?

हाँ। व्यापक अनुसंधान द्वारा देखा गया है कि एम एस जी गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं सहित सभी मनुष्यों के लिए सुरक्षित है।

  • माँ के दूध में प्राकतिक रूप से ही ग्लूटामेट की अधिकता होती है।
  • एक औसत नवजात माँ के दूध से प्रतिदिन 150 से 200 मि.ग्रा. तक मुक्त ग्लूटामेट का सेवन करता है।
  • दूध पिलाने वाली माँ को यह भी ज्ञात होना चाहिए कि अतिरिक्त ग्लूटामेट का सेवन करने पर भी उनके दूध में ग्लूटामेट का स्तर अधिक नहीं होता।

QA . क्या एम एस जी का केंद्रीय स्नायु तंत्र या मस्तिष्क पर असर पड़ता है?

नहीं। पशुओं पर किए गए परीक्षणों से प्रमाणित हुआ है कि आहारिक एम एस जी के कारण मनुष्यों में केंद्रीय स्नायु तंत्र (मस्तिष्काघात) पर कोई असर नहीं होता। इसके विपरीत मनुष्य का मस्तिष्क स्वयं पर्याप्त मात्रा में ग्लूटामेट उत्पन्न करता है जिसके बिना वह कार्य नहीं कर सकता।

  • मुक्त ग्लूटामेट मानव शरीर की चयापचय क्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूँकि मुक्त ग्लूटामेट मस्तिष्क की क्रिया में मुख्य भूमिका निभाता है तो इसका पर्किंसन तथा अलज़ाइमर जैसे केंद्रीय स्नायु तंत्र और मस्तिष्क संबंधी रोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखने के लिए व्यापक अनुसंधान किये जा चुके हैं।
  • 1960 के अंत में किये गये एक मात्र अध्ययन ने एम एस जी के विषय में कुछ चिता पैदा कर दी। इस अनुसंधान में नवजात चूहे के मस्तिष्क में एम एस जी की बड़ी खुराक इंजेक्शन द्वारा सीधी डाली गई। परिणाम स्वरूप आहरिक एम एस जी की बड़ी खुराक मुँह से सेवन करने का अनुसंधान किया गया, इनमें से किसी भी अनुसंधान में पहले किये गये अध्ययन के परिणामों का पुनरावर्तन नहीं देखा गया तथा वे दुष्प्रभाव और मानव द्वारा एम एस जी के उपयोग के बीच संबंध की पुष्टि करने में असफल रहे।
  • कुछ वर्ष पहले 1995 में प्रयोगात्मक जीव विज्ञान के अमरिकी समुदाय के फेडरेशन (एफ ए एस ई बी) ने स्पष्ट रूप से बताया कि मुँह से सेवन किये गये ग्लूटामेट के हानिकारक प्रभाव की पुष्टि करने पाला कोई प्रमाण नहीं है।
  • अनुसंधान से देखा गया है कि मस्तिष्क में रहे ग्लूटामेट की मात्रा पर स्वयं मस्तिष्क ही कस के नियंत्रण रखता है। रक्त का रोध मस्तिष्क में प्रवेश करने वाली ग्लूटामेट की मात्रा पर कड़ा काबू रखता है। वास्तव में, ग्लूटामेट रक्त से होकर मस्तिष्क तक नहीं जाता बल्कि मस्तिष्क ही ग्लूटामेट का निर्यातक है।

QA . क्या अनुसंधान से देखा गया है कि माइग्रेन/सिर दर्द का कारण एम एस जी है?

नहीं। आहार और तनाव सहित सिरदर्द के अनेक जानेमाने ‘उत्तेजक’ हैं।

सिरदर्द के उत्तेजक के रूप में अनेक प्रकार के खाद्य बताये जाते हैं। अनुवांशिक, स्नायु संबंधी मस्तिष्क विकार और रक्त वाहिनी विकार सहित माइग्रेन/सिरदर्द के कारण दर्शाने वाले अनेक मत हैं।

QA . क्या एम एस जी एलर्जीजन्य तत्व है?

नहीं, एम एस जी एलर्जीजन्य नहीं है। [2]

जिन खाद्यों से एलर्जीक प्रतिक्रिया होती है उन्हें एलर्जीन कहा जाता है। किसी खाद्य को एलर्जीन की श्रेणी में रखने के लिए उसमें प्रोटीन होना आवश्यक है। एम एस जी तो वास्तव में ग्लूटामेट का एक रूप, सोडियम नमक है, जो कि एक बहुत सामान्य अमिनो अम्ल है। ग्लूटामेट एक अमिनो अम्ल है जो प्रोटीन में होता है, फिर भी एम एस जी का ग्लूटामेट मुक्त ग्लूटामेट है, जिसका अर्थ है कि यह अन्य अणुओं से जुड़ा हुआ नहीं है और इसलिए यह प्रोटीन नहीं हो सकता। आगे कुछ लोग मानते हैं कि उन्हें एम एस जी से विपरीत प्रतिक्रियाएँ होतीं हैं। यदि ऐसा है तो जब वे पका हुआ टमाटर, मशरूम, शतावरी, चीज़, माँस और समुद्री खाद्य पदार्थ खाते हैं तब भी उनको इन खाद्य पदार्थों से विपरीत प्रतिक्रिया होनी चाहिए क्योंकि इन खाद्यों में प्रचुर मात्रा में मुक्त ग्लूटामेट होता है।

क्योंकि व्यापक रूप से ऐसे आरोप लगे हैं कि एम एस जी के कारण विविध विपरीत प्रतिक्रियाएँ (चीनी रेस्टोरेंट संलक्षण) होती हैं, कई लोग ऐसा मानने लगे हैं कि उन्हें किसी आहार से विपरीत प्रतिक्रिया होती है तो वह उसमें रहे एम एस जी के कारण होती है।

QA . क्या एम एस जी कैंसरकारक है?

नहीं, एम एस जी कैंसरकारक नहीं है। [3]

एम एस जी तो मात्र ग्लूटामेट है अति सामान्य अमिनो अम्ल, सोडियम नमक के रूप में कैंसरजन्य गुण न ग्लूटामेट में है और न ही सोडियम में। इतना ही नहीं अनेक अनुसंधानों के बावजूद अभी तक इस ग़लत दावे का समर्थन करने वाला न ही कोई वैज्ञानिक प्रमाण है और न ही नैदानिक सबूत। इसके विपरीत, खाद्य योज्य की एफ ए ओ /डब्ल्यू एच ओ के विशेषज्ञ की संयुक्त समिति (जे ई सी एफ ए) ने कुछ खाद्य योज्य का विषाक्तता मूल्यांकन करके निष्कर्ष दिया कि अनेक प्रजातियों के आहारिक प्रशासकीय उपयोग द्वारा एम एस जी के पारंपरिक विषाक्तता के अध्ययन में कोई भी विष विशेष अथवा कैंसरकारक प्रभाव नहीं पाया गया, न ही पुनरावर्तन करने पर और विरूपता विज्ञान के अध्ययनों से विपरीत परिणाम मिले।

यह अफवाह गैर-नैदानिक अध्ययन के लापरवाहयुक्त हवाला देने और ग़लत अर्थ निकालने पर आधारित नज़र आती है। अध्ययन में देखा गया कि जब अमिनो अम्ल को 300-500 सेंटिग्रेड पर गरम किया जाए तब कुछ केंसरकारक तत्व मिल सकते हैं। यह जाँच न ही किसी भी तरह एम एस जी से संबंधित थीं और न ही हो सकती है क्योंकि आहार में ग्लूटामेट के सेवन के लिए इतने अत्यधिक तापमान की आवश्यकता नहीं रहती और पकाने का साधारण तापमान सामान्यतः 250 सेंटिग्रेड से कम होता है।

QA . क्या एम एस जी उच्च रक्तचाप का कारक है?

नहीं, एम एस जी उच्च रक्तचाप का कारक नहीं है।

एम एस जी में नमक की तुलना में केवल 1/3 मात्रा में सोडियम पाया जाता है और भोजन की वही ग्रहणशीलता प्राप्त करने के लिए काफ़ी कम मात्रा में उपयोग किया जाता है। वास्तव में तो नमक के स्थान पर एम एस जी लेने से सोडियम का सेवन घटाने में सहायता मिलती है।

QA . क्या एम एस जी प्यास का कारण है?

नहीं, इस दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

आहार में अधिक नमक प्यास का कारण हो सकता है। यदि नमक का मुख्य घटक, सोडियम – बढ़ जाता है, तो स्वाभाविक परिणाम है कि प्यास लगेगी। एम एस जी में सोडियम की मात्रा 12% है जबकि नमक में 39% और आहार में एम एस जी का उपयोग नमक से कई गुना कम होता है। अतः नमक की तुलना में एम एस जी के कारण कम प्यास लगनी चाहिए।

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