आध्यात्मिक विचार :समय निरर्थक, समझ निरर्थक, सामर्थ्य निरर्थक

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adhyatmik-vichar आध्यात्मिक हिंदी कहानी- अपनी योग्यता से परमात्मा नहीं मिलते। योग्यता से संसार में नाम होता है। संसार की वस्तु मिलती है। भगवान के यहां योग्यता की क्या कमी है। आपकी योग्यता वहां काम करेगी, जहां योग्यता की कमी है।

आध्यात्मिक विचार :समय निरर्थक, समझ निरर्थक, सामर्थ्य निरर्थक adhyatmik-vichar 

गांव में लखपति की बड़ी इज्जत होती है। परंतु जहां सभी करोड़पति हो, वहां लखपति की क्या इज्जत है?
ऐसे ही परमात्मा के यहां समझ की कमी नहीं है। अतः वहां आपकी समझ की कोई जरूरत नहीं है।
आपके पास अपने उद्धार के लिए काफी सामग्री है। केवल सरलता से और विवेकपूर्वक उसका सदुपयोग करना है।
उसका सदुपयोग कैसे करें — इसकी शिक्षा सत्संग से, सद्विचार से, प्राप्त विवेक का आदर करने से मिलती है।
जो बिल्कुल गांव में रहने वाले हैं। पढ़े लिखे नहीं हैं, उनको परमात्मा तत्व का बोध हो गया और बड़े-बड़े पंडित रोते रह गए। समय निरर्थक, समझ निरर्थक, सामर्थ्य निरर्थक, इसलिए परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो रही है।adhyatmik-vichar 
इनका सदुपयोग करो। समझते हैं कि सच बोलना ठीक है, फिर भी झूठ बोलते हैं। न्याय करना ठीक  है, फिर भी अन्याय करते हैं। किसी को दुख देना ठीक नहीं है, फिर भी दुख देते हैं। यह अपने ज्ञान का निरादर है। अपने ज्ञान का निरादर ना करें।
उसका सदुपयोग ठीक करें तो पूर्णता हो जाएगी। adhyatmik-vichar 

(स्वामी रामसुखदास)

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