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गृहस्थी की जिम्मेदारी पूरी करो

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(जय गुरुदेव ) जब विवेक हो, मोह भ्रम भागे तभी दया होगी। मोह भ्रम जाएगा नहीं, विवेक जागेगा नहीं तो क्या कोई साधना करेगा। किसी को साधु बनाना नहीं। गृहस्थी की जिम्मेदारी पूरी करो। परिवारिक सामाजिक जो भी जिम्मेदारी है उसे निभावो। बहुत सी चीजें महात्माओं ने आप को दी महात्माओं की चीजें यह है कि आप की चोरी ना करो, झूठ ना बोलो, किसी को धोखा मत दो, हिंसा मत करो, रहम और दया रखो और शाकाहारी रहो। Adhyatmik anmol vachan

कुछ भजन कर लो

कुछ भजन कर लो और यहां से निकल चलो। ऐसा ना किया तो देखते देखते वक़्त पूरा हो जाएगा। यह मनुष्य जीवन दुनिया के हीरे जवाहरात को देने पर भी नहीं मिलेगा। इस मनुष्य शरीर में जीवात्मा को बैठाया है। महात्माओं से रास्ता ले लो और अंदर ही अंदर चले चलो अंदर खुले मैदान में रोशनी और लाइट है। अंतर ही अंतर से अंदर का रास्ता है। बाहर का रास्ता बाहर की तरफ से जो माया चर्म आंखों से देखते हो आपको बताया गया था कि घर गृहस्ती में रहकर अपनी मनोकामना पूरी करो पर कोई ना कोई जरिया तो होना चाहिए। उस जरिये से आप को काम करना चाहिए।

प्रारंभ खत्म कर दिया जाए तो संसार टिकेगा नहीं

कर्मों के बोझे को खत्म करने के लिए रास्ता तो आपको अपनाना ही पड़ेगा। उसका असर मन पर बुद्धि पर, चित पर जबरदस्त पड़ेगा। कुछ ऐसे कर्म होते हैं जो बहुत ही निकृष्ट होते हैं और शरीर के साथ ही जुड़े रहते हैं। वह हल्के तो कर दिए जाते हैं पर पूरा खत्म नहीं हो सकता। उसमे रियायत दी जाती है। बर्दाश्त कर लो। क्रियामान और संचित कर्मों का भंडार जलाया जा सकता है। वह कोई मुश्किल नहीं किंतु प्रारंभ खत्म कर दिया जाए तो संसार टिकेगा नहीं।

जीवात्माओं के जगाने का अधिकार

नाम वह चीज है जिसके आगे स्वर्ग वैकुंठ कुछ भी नहीं। नाम एक ऐसी अगोचर महान समुद्र का आनंद और आत्मा की शक्ति है। इसलिए नाम की कमाई कर लो। वह समय दूसरा था जब सबको bhajan  करने का अधिकार नहीं था। छुआछूत खानपान का विचार था। अब तो सब कुछ खत्म हो गया। केवल कहने को सब बातें हैं। ऐसे समय पर जीवात्माओं के जगाने का अधिकार सभी नर नारियों को मिला।

यह परदेश है परदेश में आराम नहीं

तुम्हारा घर कहीं और है अपने घर चलो। यह परदेश है परदेश में आराम नहीं और कोई अपना नहीं कितने लोग परदेश में अपना घर बसाते हैं पर एक मिनट में निकाल कर बाहर कर दिए जाते हैं। आराम तो अपने घर में ही होगी। एक दफे नाम की डोरी पकड़कर चल चलो फिर ना कभी आना होगा, ना कभी जाना होगा। उधर चलोगे तो कितना बड़ा आनंद मिलेगा, कितनी शक्ति मिलेगी।

महापुरुषों ने पर्व त्यौहार, पूजा पाठ रखा

आप पर्व और त्यौहार मनाते हो इच्छा रखते हो कि हमें भगवान का दर्शन मिल जाए उसका ज्ञान मिल जाए। यह त्योहार और पर्व महात्माओं ने ही रखा है। बिना उनके तुम इन में फंस जाते हो। ना आप महात्माओं को समझ पाते होना, न पर्व त्यौहार समझ पाते हो। पूजा करो, व्रत करो तो इंद्रिय दमन होंगी इसलिए महापुरुषों ने पर्व त्यौहार, पूजा पाठ रखा था। आप करते थे आपको देख कर बच्चे भी करते थे। उनमें अच्छे संस्कार पड़ते थे। माता पिता का आदर करते थे। बड़े बूढ़ों का सम्मान करते थे। घर से निकलने से पहले वह भी भगवान का आशीर्वाद लेते थे। प्रणाम करते थे। बड़ों का आशीर्वाद लेते थे। पैर छूते थे। वह जमाना हमने देखा आज के लोग उसका सपना देखते हैं।

मेहनत और ईमानदारी को मत छोड़ो

बहुत कुछ बदल गया अच्छे लोगों की जरुरत हमेशा रही है और हमेशा रहेगी। आप अपने उद्देश्य को अपने लक्ष्य को मत छोड़ो। अपनी मेहनत और ईमानदारी को मत छोड़ो वह परमात्मा सब देखता है। अगर आप छोड़ दोगे तो सर्वनाश हो जाएगा। दिनोदिन दिन बढ़ती जनउपस्थिति देखकर ऐसा लगता है कि अनजाने में अज्ञान में ही परोक्ष रूप में आत्मा जागने लगी है। अज्ञानता से आप उसके लिए छलांग मारो, उझलो कूदो उसी में कोई ना कोई चीज निकल जाएगी।

लौकीक हो या पारलौकिक हो।

मैं कोई ऐसा आदेश नहीं दे रहा हूं। जिसे करने में आपकी क्षमता ना हो। मैं तो वही कहता हूं जो आप कर सको। लौकीक हो या पारलौकिक हो। बोलचाल में रहन सहन में और साधना में उतना ही कहता हूं जिसे आप कर सकते हो। इधर भी आपकी उन्नति और उधर भी आपकी उन्नति। आपको क्षणिक सुख लेना है और आध्यात्मिक आनंद भी लेना है। आप महात्माओं के पास पहुंचो सबको आपको सब मिलेगा। Adhyatmik anmol vachan

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