आत्मा का प्रतीक है नारियल

हम मंदिर में नारियल क्यों तोड़ते है? पहले हम् नारियल का जटा हटाते है, ये जटा है। हमारी इच्छाएं है जिन्हें सबसे पहले हटाना है। फिर उसका कठोर हिस्सा तोड़ते है, ये है हमारा अहंकार, जिसे हटाना बहुत जरुरी है। फिर निकलता है पानी….ये हमारे अंदर के नकारात्मक विचार है। जिनके निकल जाने के बाद फिर आता है। सफ़ेद गरी, जो आत्मा का प्रतीक है, बिना इच्छा, अहंकार और नकारात्मक सोच हटाये हम परमात्मा से नहीं मिल सकते है। भगवांन के सामने इसीलिए नारियल फोड़ा जाता है। या फिर ऐसा भी कह सकते है कि-

आत्मा का प्रतीक है नारियल

नारियल :  नारियल को आत्मा को प्रतीक क्यों कहा जाता है? आएये जानते है जैसा कि हम जानते है कि हम लोग मन्दिरों में नारियल क्यों फोडते हैं। नारियल फोडने का एक तरीका होता है, एक बार में ही टूटना चाहिए। फोडने के पहले कुछ लोग पहले उसके ऊपर सिंदूर चढाते हैं, तो कुछ नहीं चढाते। नारियल फोडना एक सिद्वांत और पराम्परा के रूप में मान लिया गया है। कुछ लोग यह पसंद है, तो कुछ लोगों को नहीं।

                                                 आत्मा का प्रतीक है (नारियल)

पहले जमाने में लोग पशुओं की बलि थे। अब ऐसा नहीं होता है। पशुओं के अधिकारों की रक्षा की जाती है। हम अहिंसा चाहते हैं, पर नारियल फोडना बलि का सूचक है। कुछ लोग मानते हैं कि यह प्रतीक है हमारे अहंकार को तोडने का। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग मानते हैं कि नारियल फोडते ही अंदर से पानी निकलता है। नारियल के पानी को आत्मा से जोडकर देखा जाता है।

हमे उसके ऊपर ध्यान केंन्द्रित करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि शब्दार्थ को न देखें, भावार्थ को देखें। दक्षिण भारत में केवल नारियल ही नहीं फोडत हैं, बल्कि कद्दू भी काटते हैं। बलि के तौर पर। तंत्र पूजा में नारियल को ऊपर से तोडकर उसके अंदर घी डाला जाता है। फिर इसे अग्नि को समर्पित किया जाता है। यह प्रकिया भी बलि का ही प्रतीक है।


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