साढ़ेसाती

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साढ़ेसाती

वह चलते-चलते थक गया था, लेकिन अब मंजिल सामने थी। वह रास्ते के किनारे बैठ गया। वह अलीशान आश्रम को देखने लगा। हां, यही आश्रम हैं महान तांत्रिक रोहित स्वामी का। किसी ने उससे कहा था कि इस महान तांत्रिक से मिलो, बडे सिद्ध पुरूष हैं। तुम्हारे ऊपर जो देवी प्रकोप है, उसका शमन कर देंगे और तुम्हारा भाग्य चमक उठेगा। यहां एक-से-एक मुसीबतजदा लोग आते हैं, और प्रसन्न होकर जाते हैं। वह दस कोस पैदल चलकर यहां पहुंचा था। सोचा, अंदर चलूं और तांत्रिक का आर्शीर्वाद लूं।
लेकिन यहां तो एक-से-एक शानदार गडियां रूक रही हैं। इनमें से एक से बढकर एक चिकने नर-नारी चेहरे उतर रहे हैं। कारों से चमचमाते हुए पैकेट उतारे जा रहे हैं, शायद चढावे के लिए हों वह सोच रहा था कि इन देवताओं को कौन-सा दुख है भाई कि उसे दूर कराने के लिए तांत्रिकजी की शरण में आ रहे हैं। आगे बढने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। पुलिस का पहरा लगा था। गेट पर साधुओं के वेष में कुछ लोग खडे थे। बहुत देर हो गई बैठे हुए। वह आगे बढा, तो एक साधु ने कहा, ‘अरे भाई, तू कहां अंदर घुसा जा रहा है? देखता नहीं है, मंत्री जी अंदर गए हैं।
‘अरे स्वामी जी, मैं बहुत दुखी आदमी हूं। मैं गुरूजी के दर्शन करना चाहता हूं।, ताकि मेरा दुःख दरिद्र दूर हो। वह बताएंगे कि मेरा भाग्य इतना खराब क्यों चल रहा है?‘

देख भाई, गुरूजी इतने सस्ते नहीं हैं कि इखारियों-भिखारियों का भाग्यa देखते चलें। जिसका कोई भाग्य ही नहीं है, उसका कोई क्या भाग्य देखेगा। भाग्य ही है तो देख, फुटपाथ पर तोता लिए हुए बहुत से ज्योतिषी बैठे रहते हैं, उन्हें दिखा लें।‘ ‘स्वामी जी, दया कीजिए।‘
‘अरे हट, देख मंत्रीजी आ रहे है।‘ कहते हुए एक स्वामी ने उसे ढकेल दिया और पुलिस का एक सिपाही उसे पकडकर दूर ठेल आया। वह आहत हुआ। थोडी दूर पर एक ढाबा दिखा। वह उधर को सरकने लगा। उसने जेब टटोली। हां, चाय भर को पैसे हैं। वह एक बेंच पर बैठ गया। उसकी बगल में दो नवयुवक चाय पी रहे थे। आपस में बात कर रहे थे, ‘सुबह से ही कई मंत्री आ चुके हैं। कल सुपर स्टार अनंग जी आए थे। परसों करोडपति भिखारी लाल जी आए थे और छोटे-मोट नेता- अभिनेता तथा सेठ तो दिन-भर आते ही रहते हैं।,
‘भैया, मैंने तो सुना था कि रोहित स्वामीजी लोगों का दुख- दरिद्र दूर करते हैं, यहां तो सारे देवता लोग आ रहे हैं उन्हें क्या दुःख है?’ उसने डरते-डरते उन युवकों से पूछा

उन दोनों ने एक साथ उसे देखा वह थोड़ा घबराया कि कहीं ये सब बुरा न मन गाए हों
भाई आप कहीं से नए-नए आये हो अरे, सबसे बड़ा दुख तो इन्हीं लोगों को है इतना कहकर वह युवक चुप हो गया
उसे लगा कि बात तो और उलझ गई सबसे बड़ा दुख इन्हीं लोगों का है’ इसका क्या मतलब? लेकिन वह युवक बुरा न मान जाए, इसलिए आगे पूछने की हिम्मत नहीं हुई किंतु वह युवक समझ गया कि यह बेचारा गरीब आदमी उलझन में पड़ गया है?’
‘हां, सुन तो रहा हूं’
‘और यह भी जानते हो न कि एक बार जो मंत्री की कुर्सी पर बैठ जाता है, वह देश को अपनी जागीर समझने लगता है और न जाने उससे क्या-क्या उगाहता रहता है और जब चुनाव आता है तब वह डर जाता है कि उसकी इतनी बड़ी जागीर कहीं छीन न जाए उसका दिन का चैन और रत कि नींद हराम हो जाती है तब रोहित स्वामी के यहां भागता है किसी की जागीर छीन जाना कम तकलीफ की बात है क्या? ‘समझ?’ के भाव से सर हिलाने लगा
‘और देखो, चुनाव के दिन आते ही सभी मंत्रियों को साढ़ेसाती लगा जाती है और सेठों को देखो तो लगता है, बेचारे कितनी विपत्ति के मारे हुए है उन्हें चिंता रहती है कि रातों रात एक करोड़ का दस करोड़ कैसे हो? कैसे वे अपने खिलाफ उठे मजदूरों के आंदोलन को दबा सकें? इन्हीं चिंताओं में न तो वे ढंग से कह पते है, न सो पते हैं और इलाज खोजने स्वमीजी के पास चले आते हैं कुछ समझ रहे हैं आप?’

‘हां बाबू, समझ रहा हूं ‘
‘और ये अभिनेता भी तो यश, पैसे और भविष्य की असुरक्षा के डर के मारे हुए हैं जनता कब तक उनकी जय बोल रही हैं और कब उठाकर बाहर फेंक

जब किसी को आप जिंदा नहीं कर सकते हैं तो मारने…

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