सभी प्रकार का बुखार घरेलू उपचार- How to Reduce a Fever Naturally Remedy

How to Reduce a Fever in hindi – तेज बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, यह किसी छुपी हुई परिस्थिति का संकेत हो सकता है। आमतौर पर यह बुखार या तबीयत खराब का संकेत हो सकता है। हालांकि, बुखार के कई गैर-संक्रामक कारण भी हो सकते हैं, लेकिन वायरल संक्रमण बुखार का एक सामान्‍य लक्षण हो सकता है। वायरल संक्रमण कई प्रकार के वायरस से हो सकता है। इनमें इंफ्लूएंजा यानी फ्लू सबसे ज्‍यादा प्रचलित है। वायरल शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है जैसे आंत, फेफड़े, वायु मार्ग और अन्‍य कई हिस्‍से। इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि आपके शरीर का कौन सा हिस्‍सा इससे प्रभावित हुआ है, आपको सामान्‍य तौर पर बुखार की शिकायत होती है। इसके अलावा सिरदर्द, बहती नाक, गले में सूजन, आवाज बैठना, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, पेट में दर्द, डायरिया और/अथवा उल्‍टी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

बुखार की रामबाण औ‍षधि है ‘गिलोय’

पान के पत्‍तों की तरह दिखने वाले गिलोय के पत्‍ते एक तरह की बेल है। गिलोय के सेवन से हमारी इम्‍यूनिटी स्‍ट्रॉग होती है और शरीर बीमारियां से बचा रहता है। आयुर्वेद में तो गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। पान के आकार के होने के कारण गिलोय की पत्तियों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

गिलोय के बारे में आपने कभी न कभी किसी से जरूर सुना होगा। यहां तक कि हमारी मां और दादी तो पुराने बुखार या डेंगू जैसी गंभीर मामले में इसे लेने की सलाह देती है। जी हां गिलोय सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक दवाओं में से एक है। यह इतनी गुणकारी होती है कि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे अमृता के रूप में जाना जाता है,

गिलोय के पोषक तत्‍व

  • यह शरीर को ठंडा रखता है जिससे बुखार कम करने में मदद मिलती है। साथ ही क्रोनिक फीवर जैसे डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी प्रभावी है।
  • गिलोय का सेवन वाइट ब्‍लड सेल्‍स को रेगुलेट करने में मदद करते है।
  • गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी और अल्‍कालाइन गुण पाचन में मदद करते हैं।
  • इसके अलावा यह अर्थराइटिस और अस्‍थमा के उपचार और टाइप -2 डायबिटीज के लिए ब्‍लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है।

क्या शिशुओं और बच्चों को गिलोय दिया जाना चाहिए?

सिमरन के अनुसार, शिशुओं के लिए यह उचित नहीं है यह केवल 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्‍चों के लिए सुरक्षित है। बच्चों को एक दिन में 250 मिलीग्राम तक ही देना चाहिए।

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