श्री प्रेतराज चालीसा – Shree Pretraj Chalisa

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Shree Pretraj Chalisa

श्री प्रेतराज चालीसा – Shree Pretraj Chalisa- प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दंड देने वाले देवता के रूप मे पूजा जाता है। अत्यंत भक्ति भाव से उनकी आरती , भजन कीर्तन किये जाते हैं। प्रेतराज सरकार की बालाजी के सहायक देवता के रूप मे आराधना की जाती है। आमतौर पर चावलों का भोग लगवाया जाता है| यहाँ पर बूंदी के लड्डूओं का भोग भी लगाया जाता है।

Shree Pretraj Chalisa

|| चोपाई ||

गणपति की कर वंदना , गुरू चरनन चित लाय |
प्रेतराज जी का लिखूँ, चालीसा हरषाय |

|| श्री प्रेतराज चालीसा ||

जय जय भूतादिक प्रबल, हरण सकल दुख भार |
वीर शिरोमणि जयति , जय प्रेतराज सरकार |
जय जय प्रेत्राज जगपावन, महा प्रबल त्रय ताप नसावन |
विकट वीर करूणा के सागर , भक्त कष्ट हर सब गुण आगर |
रतन जडित सिहासन सोहे , देखत सुर नर मुनि मन मोहे |
जगमग सिर पर मुकुट सुहावना, कनन कुण्डल अति मनभावन |
धनुष कृपाण बाण अरु भाला, वीर वेष अति भृकुटि कराला |
गजारूढ संग सेना भारी, बाजत ढोल मृदंग जुझारी |
छ्त्र चँवर पंखा सिर डोले , भक्त वृंद मिल जय जय बोले |
भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा, दुष्ट दलन शोभीत भुजदण्डा |
चलत सैन कांपत भूतलहूँ , दर्शन करत मिटत कलिमलहूँ |
घाटा मेहदीपुर मे आकर, प्रकटे प्रेतराज गुण सागर |
लाल ध्वजा उड रही गगन मे, नाचत भक्त मगन हो मन मे |
भक्त कामना पुरन स्वामी, बजरंगी के सेवक नामी |
इच्छा पुरन करने वाले , दुख संकट सब हरने वाले |
वो जिस इच्छा से आते है , वे सब मनवाछित फल पाते है |
रोगी सेवा मे जो आते , शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते |
भूत, पिशाच, जिन्न बेताला, भागे देखत रुप कराला |
भौतिक शारीरिक सब पीडा, मिटा शीघ्र करते है क्रीडा |
कठिन काज जग मे है जेते, रटत नाम पूरा सब होते |
तन मन धन से सेवा करते , उनके सकल कष्ट प्रभू हरते |
हे करुणामय स्वामी मेरे, पडा हुआ हूँ चरण सहारे |
या विधि अरज करे तन मन से , छूटत रोग शोक सब तन से |
मेहदीपुर अवतार लिया है, भक्तो का दुख दूर किया है |
रोगी पागल सान्ति हीना, भूत व्याधि अरु धन छीना |
जो जो तेरे द्वारे आते , मनवांछित फल पा घर जाते है |
महिमा भूतल पर छाई है, भक्तो ने लीला गाई है |
महंत गणेश पूरी तपधारी, पूजा करते तन मन वारी |
हाथो मे ले मुगदर घोटे , दूत खडे रहते है मोटे |
लाल देह सिन्दूर बदन मे, कापत थर- थर भूत भवन में |
जो कोई प्रेतराज चालीसा, पाठ करत नित एक अरु बीसा |
प्रतः काल स्नान करावै, तेल और सिन्दूर लगावै |
चंदन इत्र फुलेल चढावै, पुष्पन की माला पहनावै |
चंदन इत्र फुलेल चढावै, पुष्पन की माला पहनावै |
ले कपूर आरती उतारे, करे प्रार्थना जयति उचारे |
इच्छा पूरण करते जन की , होती सफल कामना मन की |
भक्त कष्ट हर अरि कुल घातक, ध्यान करत छूटत सब पातक |
जय जय जय प्रेताधिराज जय, जयति भूपति संकट हर जय |
जो नर पढत प्रेत चालीसा, रहत न कबहुँ दु:ख लवलेशा |
कह सुखराम ध्यानधर मन मे , प्रेतराज पावन चरनन में |

|| दोहा ||

दुष्ट दलन जग अध हरन, समन सकल भव शूल |
जयति भक्त रक्षक प्रबल, प्रेतराज सुख मूल |
कष्ट हरो सब जनन के , प्रेतराज बल धाम |
बसु निरंतर मम ह्रदय, कहत दास सुखराम |

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