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रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें

आमतौर पर आपने देखा होगा की मार्किट में रुद्राक्ष हर दुकान ,चौराहे कई तो कम्पनिया इसे बेच रही है, परन्तु इसकी पहचान करना बहुत ही कठिन है! एक मुखी व एकाधिक मुखी रुद्राक्ष महंगे होने के कारण नकली भी बाजार में बिक रहे है! मनुष्य असली के रूप में इन्हे खरीद तो लेता है परन्तु उसका फल नही मिलता! जिस कारण वह रुद्राक्ष के फायदे से वंचित रह जाता है व जीवन भर उसकी मन में यह धारणा रहती है कि रुद्राक्ष एक बेकार वस्तु है! कई लोग लाभ के लालच में कैमिकल का इस्तेमाल कर इसका रंग रूप असली रूद्राक्ष जैसा कर देते है व इसके ऊपर धारिया बना कर मंहगे भाव में बेच देते है! कई बार दो रुद्राक्षों को बड़ी सफाई से जोड़ कर बेचा जाता है!

आपने देखा होगा कि कई रूद्राक्षोंपर गणेश, सर्प, वशिवलिंग की आकृति बना कर भी लाभ कमाया जाता है! ऐसी और भी बातों के कारण रूद्राक्ष मंहगे भाव में बेच दिय जाते हैं पर देखा जाये तो जो आदमी अध्यात्मिक विश्वास में रुद्राक्ष खरीदता है अगर उसे ऐसा रुद्राक्ष मिल जाये तो उसे कोई लाभ नही बल्कि उसके अध्यात्मिक मन के साथ धोखा होता है! आप ने कभी भी कोई रुद्राक्ष लेना तो विश्वसनीय स्थान से ही खरीदे! परन्तु आप भी अपने ढंग से जान सकते है

असली और नकली रुद्राक्ष कैसे होते है!

अकसर यह माना जाता है की पानी में डूबने वाला रुद्राक्ष असली और तैरने वाला नकली होता है! यह सत्य नही है रुद्राक्ष का डूबना व तैरना उसके कच्चे पन व तेलियता की मात्रा पर निर्भर होता है पके होने पर व पानी में डूब जायेगा! दुसरा कारण तांबे के दो सिक्को के बीच रुद्राक्ष को रख कर दबाने पर यो घूमता है यह भी सत्य नही!

 रुद्राक्ष की पहचान

कोई दबाव अधिक लगायेगा तो वो किसी न किसी दिशा में असली घूमेगा ही इस तरह की और धारणाये है जो की रुद्राक्ष के असली होने का प्रणाम नही देती! असली के लिए रुद्राक्ष को सुई से कुदेरने पर रेशा निकले तो असली और कोई और रसायन निकले तो नकली असली रुद्राक्ष देखे तो उनके पठार एक दुसरे से मेल नही खाते होगे पर नकली रुद्राक्ष देखो या उनके ऊपरी पठार एक जैसे नजर आयेगा जैसे गोरी शंकर व गोरी पाठ रुद्राक्ष कुदरती रूप से जुड़े होते है परन्तु नकली रुद्राक्ष को काट कर इन्हे जोड़ना कुशल कारीगरों की कला है परन्तु यह कला किसी को फायदा नही दे सकती! ऐसे ही एक मुखी गोल दाना रुद्राक्ष काफी महंगा व अप्राप्त है पर कारीगर इसे भी बना कर लाभ ले रहे है! परन्तु पहनने वाले को इसका दोष लगता है!

नकली रुद्राक्ष की धारिया सीधी होगी पर असली रुद्राक्ष की धारिया आढी टेडी होगी! कभी कबार बेर की गुठली पर रंग चढ़ाकर कारीगर द्वारा उसे रुद्राक्ष काआकार दे कर भी मार्किट में बेचा जाता है! इसकी परख के लिए इसे काफी पानी में उबालने से पता चल जाता है! परन्तु असल में कुछ नही होता वो पानी ठण्डा होनेपर वैसा ही निकलेगा! कोई भी दो जोड़े हुए रुद्राक्षों को आप अलग करेंगेतो बीच में से वो सपाट निकलेगें परन्तु असली आढा टेढा होकर टुटेगा! नोमुखी से लेकर 21 मुखी व एक मुखी गोल दाना गोरी शंकर ,गोरीपाठ आदि यह मंहगे रुद्राक्ष है!

 असली रुद्राक्ष की पहचान

रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें

यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा| इसके आलावा आप रुद्राक्ष को पानी में डाल दें अगर वह डूब जाता है तो असली नहीं   नकली| लेकिन यह जांच अच्छी नहीं मानी जाती है क्योंकि रुद्राक्ष के डूबने या तैरने की क्षमता उसके घनत्व एवं कच्चे या पके होने पर निर्भर करती है और रुद्राक्ष मेटल या किसी अन्य भारी चीज से भी बना रुद्राक्ष भी पानी में डूब जाता है|

#सरसों के तेल मे डालने पर रुद्राक्ष अपने रंग से गहरा दिखे तो समझो वो एक दम असली है|

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