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मंगलवार व्रत,विधि,कथा और फायदे

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मंगलवार व्रत,विधि,कथा और फायदे – सुख-सम्पत्ति, यश और संतान प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत रखना शुभ माना जाता है. हनुमान जी से जुड़ी मंगलवार व्रत कथा का पाठ

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करके इस उपवास को पूरी श्रद्धा के साथ पूर्ण करें. हनुमान जी का यह व्रत सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को रखा जाता है।

मंगलवार व्रत विधि

मंगलवार व्रत/उपवास विधि (Mangalvar Vrat Vidhi in Hindi)

मंगलवार व्रत करने वाले व्यक्ति को मंगलवार के दिन ब्रह्मचर्य का विशेष रूप से पालन करना चाहिए। हर मंगलवार को सुबह सूर्य उगले से पहले यानी ब्रम्हा मुहूर्त उठ जाना चाहिए। स्नान करने के बाद व्यक्ति को लाल रंग का वस्त्र पहनना चाहिए।
सबसे पहले अपने आप को शुद्ध करने के लिये पवित्रीकरण करें।

पवित्रीकरण

हाथ में जल लेकर मंत्र –उच्चारण के साथ अपने ऊपर जल छिड़कें:-

ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

इसके बाद लाल फूल, सिंदूर, कपड़े आदि हनुमान जी को चढ़ाना चाहिए। पूरे भक्तिभाव और शारीरिक शुद्धि से हनुमान जी के सामने बैठकर ज्योति जलाने के बाद हनुमान चालीसा या सुंदर कांड का पाठ करना चाहिए। शाम के समय हनुमान जी को बेसन के लड्डू का भोग लगाकर बिना नमक का भोजन खाना चाहिए। हनुमान जी को खीर का भी भोग लगाया जा सकता हैं।

मंगलवार व्रत कथा

एक निःसन्तान ब्राह्मण दम्पत्ति काफ़ी दुःखी थे। ब्राह्मण वन में पूजा करने गया और हनुमान जी से पुत्र की कामना करने लगा। घर पर उसकी स्त्री भी पुत्र की प्राप्त के लिये मंगलवार का व्रत करती थी।मंगलवार के दिन व्रत के अंत में हनुमान जी को भोग लगाकर भोजन करती थी। एक बार व्रत के दिन ब्राह्मणी ना भोजन बना पायी और ना भोग ही लगा सकी। तब उसने प्रण किया कि अगले मंगल को ही भोग लगाकर अन्न ग्रहण करेगी। भूखे प्यासे छः दिन के बद मंगलवार के दिन तक वह बेहिओश हो गयी। हनुमान जी उसकी निष्ठा और लगन को देखकर प्रसन्न हो गये। उसे दर्शन देकर कहा कि वे उससे प्रसन्न हैं और उसे बालक देंगे, जो कि उसकी सेवा किया करेगा। इसके बाद हनुमान जी उसे बालक देकर अंतर्धान हो गये। ब्राह्मणी इससे अति प्रसन्न हो गयी और उस बालक का नाम मंगल रखा। कुछ समय उपरांत जब ब्राह्मण घर आया, तो बालक को देख पूछा कि वह कौन है। पत्नी ने सारी कथा बतायी। पत्नी की बातों को छल पूर्ण जान ब्राह्मण ने सोचा कि उसकी पत्नी व्यभिचारिणी है। एक दिन मौका देख ब्राह्मण ने बालम को कुंए में गिरा दिया और घर पर पत्नी के पूछने पर ब्राह्मण घबराया। पीछे से मंगल मुस्कुरा कर आ गया। ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गया। रात को हनुमानजी ने उसे सपने में सब कथा बतायी, तो ब्राह्मण अति हर्षित हुआ। फ़िर वह दम्पति मंगल का व्रत रखकर आनंद का जीवन व्यतीत करने लगे।

मंगलवार व्रत में क्या खाना चाहिए

इस उपवास में संध्या समय में मीठा भोजन किया जाता है और गेहूँ तथा गुड़ का उपयोग उत्तम कहा गया है. केवल एक समय का ही भोजन करना चाहिए. वैसे तो इस व्रत को अपनी इच्छानुसार जब तक चाहे रख सकते हैं

मंगलवार का व्रत किसे करना चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का व्रत उन लोगो को करना चाहिए, जिन की कुण्डली में मंगल पाप प्रभाव में हों यानी मंगल निर्बल होने के कारण अपने शुभ फल देने में असमर्थ हों, उन लोगो को यह व्रत जरूर करना चाहिए. यह उपवास मंगल ग्रह की शान्ति के लिये तथा पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। जिस व्यक्ति के स्वभाव में उग्रता हो, या हिंसात्मक प्रवृ्ति हो, उन व्यक्ति को अपने गुस्से को शांत करने के लिये , मंगलवार का व्रत करना चाहिए। इससे उनके मन को शांत करता है। लडके इस उपवास को बुद्धि और बल विकास के लिये कर सकते है। मंगलवार का व्रत करने सें व्यवसाय और नौकरी में भी सफलता मिलती है।

मंगलवार के व्रत की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।
जाके बल से गिरिवर कांपै । रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।।
अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ।।
लंका जारि असुर सब मारे । सियाराम जी के काज संवारे ।।
लक्ष्मण मूर्च्छित पड़े सकारे । लाय संजीवन प्राण उबारे ।।
पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ।।
बाईं भुजा असुर संहारे । दाईं भुजा संत जन तारे ।।
सुर नर मुनि आरती उतारें । जय जय जय हनुमान उचारें ।।
कंचन थार कपूर लौ छाई । आरति करत अंजना माई ।।
जो हनुमान जी की आरती गावे । बसि बैकुण्ठ परमपद पावे ।।
लंक विध्वंस किए रघुराई । तुलसिदास प्रभु कीरति गाई ।।

मंगलवार व्रत उद्यापन विधि

मंगलवार के इक्कीस उपवास करने के बाद इच्छा पूर्ति करने के लिये मंगलवार व्रत का उद्यापन किया जाता है. उद्यापन करने के बाद इक्कीस ब्रहामणों को भोजन कराकर यथाशक्ति दान -दक्षिणा दी जाती है

मंगलवार व्रत महत्व/फायदे

हर एक उपवास का अपना महत्व और फल हैं। उपवास करने से व्यक्ति अपने आराध्य देवी- देवताओं को प्रसन्न करने में सफल होता है, और साथ ही इससे सुख-शान्ति की प्राप्ति भी होती है. इस उपवास को करने से धन, जीवनसाथी और असाध्य रोगों से मुक्ति आदि के लिये भी किया जाता है। मंगल व्रत करने से ग्रहो के कष्ट से राहत खासकर शनि ग्रह, मंगल ग्रह के लिए किया जाता है। हकीकत में इस माया रुपी संसार से मुक्ति प्राप्ति के लिये भी उपवास किये जाते है।

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