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पड़ोसी होने का फर्ज

ड़ोसी होने का फर्ज: आज संयुक्त की जगह एकल परिवार परिवारों ने ले ली है।  और सगे-संबंधियों की जगह पड़ोसियों ने, आज के भागदौड़ भरी और प्रतिस्पर्धात्मक युग में नौकरी और व्यवसाय के लिए परिवार से दूर दूसरे शहर में रहना मजबूरी बनता जा रहा है। ऐसे में पड़ोसी और मित्र लोगों का सहारा होता है। पड़ोसी हर सुख दुख में सबसे नजदीकी होते हैं। इसलिए पड़ोसी धर्म को निभाना बहुत जरुरी है। ताकि जरूरत के समय आप उनके और वह आपके साथी बन सके।
आइये  ध्यान दें। इस नाजुक रिश्ते की डोर को कैसे बांध कर रखा जाए। ताकि उसमें कोई गांठ न  आ सके। यह तो सच है, कि पड़ोसी जरुरत के समय सबसे अधिक नजदीकी होते हैं।  पर इस बात का ध्यान रखें कि,

पड़ोसी होने का फर्ज The duty of neighbors.

  1. वक्त बेवक्त उनके पास जाकर उन्हें, बोर नहीं करना चाहिए। हो सकता है। उस समय में आराम के मूड में हो, या बच्चों को पढ़ा लिखा रहे हो, या फिर कोई उनका संबंधी उनसे मिलने आया हो।  मजबूरी में ही बेवक़्त  उनके घर जाए
  2. पड़ोसी होने का अर्थ यह नहीं है कि, उनके हर मामले में हस्तक्षेप करें। उनकी पारिवारिक बातों को आगे कुरेदने  का प्रयास ना करें। और ना ही उनके परिवार के मामलों में दखल अंदाजी करें। आवश्यकता हो तो उनकी मदद करें।
  3. एक पड़ोसी की बातें दूसरी पड़ोसी से ना करे। कभी पड़ोसी से किसी प्रकार का मनमुटाव होने पर भी दूसरे पड़ोसी से उनकी कमियों का बखान ना करें। चुगली करने से अपना ही व्यक्तित्व खराब होता है।
  4. इस बात का ध्यान रखें। इससे पड़ोसी आप पर विश्वास करना छोड़ देंगे और आप पड़ोसियों के लिए हंसी का पात्र बन कर रह जाएंगे।
  5. पड़ोसियों से हर चीज मांगने की आदत ना डालें। बार बार मांगने की आदत से, आप का पड़ोसी आप से परेशान भी हो सकता है। कभी इमरजेंसी में कुछ लेना भी पड़े तो, उनकी वस्तुओं समय पर सही स्थिति में लौटा दें।
  6. अपने घर के राशन के सामान के खत्म होने से पहले ही खरीद कर रखने की आदत बनाएं। ताकि कोई वस्तु खत्म होने पर किसी से मांगना पड़े।
  7. पड़ोस के बच्चे और आपके बच्चे साथ रहते हैं, तो इकट्ठे खेलेंगे भी और लड़ेंगे भी। बच्चों की लड़ाई को अधिक तूल ना दें। कभी बच्चों में लड़ाई हो जाती है, तो आप बच्चों के मां-बाप तक बात ना ले जाए।
  8. ना ही उनसे झगड़ा करें। बच्चे तो बच्चे हैं। कुछ समय बाद फिर से खेलेंगे। ऐसी छोटी-छोटी बातों के लिए आपसी संबंध खराब ना करें।
  9. कभी समस्या गंभीर लगे तो अकेले में प्यार मोहब्बत से बात करें। और बात को समझाने का प्रयास करें। उलझाए नहीं।
  10. आपने परिवारिक संबंधों की चर्चा पड़ोसियों से अधिक ना करे। कभी भी, आपका कोई पड़ोसी उस बात का लाभ उठा सकता है। आपके परिवार के संबंधों में दरार ला सकता है। बेहतर है, अपने घर की समस्याओं से स्वयं ही निपटे।
  11. अपने पड़ोसी की तरक्की से किसी प्रकार की ईर्ष्या ना करें। उनकी खुशी में स्वयं को शामिल करें। नहीं तो आप अलग-थलग पड़ जाएंगे। मुसीबत आने पर जितनी मदद आप अपने पड़ोसी की कर सकते हैं। करें,
  12. अकेले होने पर उसे एहसास दिलाएं कि, आप उसके साथ है। आवश्यकता होने पर दी गई मदद से पड़ोसी रिश्तो में मधुरता बनती है। और इससे अधिक मजबूत होते हैं ध्यान रखें ,

अपने आप को उस पर न थोपे। पड़ोसी की बात को ध्यान से सुनें और आवश्यकता पड़ने पर उसे सलाह दे। उनकी  निजी जिंदगी में फालतू की दखलअंदाजी ना करें। हर समय पड़ोसियों को उपदेश ना दे। ना ही उदाहरण देते रहें। इस से पड़ोसी आप से नजरें चुराने लगेंगे।
पड़ोस में ऐसी इमेज बनाकर रखें कि, लोग आपसे बात कर प्रसन्न हो और  आपका दिल से स्वागत करें। अपने बोल मीठी और सीमित रखें। पड़ोसियों से हाथों और आंखों से बात ना करें। स्पष्ट बोले थोड़ा बोले और मर्यादित रहे। इन सब बातों का ध्यान रखते हुए। आप एक आदर्श   पड़ोसी बन सकते हैं।

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