निर्जला एकादशी, आज करें ये उपाय सभी मनोकामनाएं पूरी होगी

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ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है। निर्जला एकादशी को वर्ष की सभी चौबीस एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी के दिन बिना पानी के उपवास करने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य फल मिलता है। इस एकादशी व्रत के दौरान पानी पीना वर्जित माना जाता है, इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहा जाता है। निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी 2 जून यानि आज है।

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी पर निर्जल रहकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस व्रत को रखने से वर्ष की सभी एकादशी का व्रत फल मिलता है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

भीम ने ही यह व्रत रखा था और बेहोश हो गए थे। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

निर्जला एकादशी पूजा

– सुबह उठकर स्नान करें और सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इसके बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें।

उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी की दाल अर्पित करें। इसके बाद श्री हरि और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।

– किसी गरीब व्यक्ति को पानी, भोजन-कपड़ा या जूते छाता दान करें।

– आज के दिन निर्जल उपवास रखा जाता है, लेकिन यदि आवश्यक हो, तो जलीय भोजन और फल ले सकते हैं।

उपाय

इस दिन, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद जीवन की इच्छा पूरी हो सकती है।

1. सुबह जल्दी उठें और उठते ही सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियां देखें। मंत्र बोलें-
कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविंद, प्रभातेकरदर्शनम्।।
2. पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालें और स्नान करें। ऐसा करने से घर पर ही तीर्थ स्नान का फल मिल सकता है।
3. स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। मंत्र बोलें ऊँ सूर्याय नम:।
4. किसी गरीब को या मंदिर में तिल, वस्त्र, धन, फल और मिठाई का दान करें।
5. अगर संभव हो सके तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान करते समय वरुण मंत्र- ऊँ वरुणाय नमःका जाप करें।
6. इस दिन निर्जल रहकर व्रत करना चाहिए। निर्जल यानी बिना पानी का व्रत। अगर निर्जल व्रत नहीं कर सकते हैं तो फलाहार और दूध का सेवन करते हुए व्रत कर सकते हैं।
7. इस तिथि पर स्नान के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। पितरों के लिए तर्पण करें। किसी मंदिर जाकर भगवान के सामने धूप, दीप जलाएं। प्रसाद, हार-फूल, केसर आदि चीजें चढ़ाएं।
8. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भी विशेष पूजा करें। भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं। माता पार्वती को सुहाग की चीजें अर्पित करें।
9. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा जरूर करें। पूजा में भगवान विष्णु की किसी भी कथा का पाठ करें। कथा जैसे रामायण, सत्यनारायण की कथा, विष्णु पुराण आदि।
10. किसी नजदीकी शिव मंदिर जाएं और भगवान को नारियल, बिल्वफल, सीताफल, सुपारी, मौसमी फल आदि चीजें चढ़ाएं।
11.निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं। इसमें तुलसी का पत्ता अवश्य डालें। तुलसी पत्र सहित खीर से भगवान विष्णु का भोग लगाने पर घर-परिवार में शांति बनी रहती है।
12.निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, फल और अनाज अर्पित करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के उपरांत इस चीजों को किसी ब्राह्मण को दान देना चाहिए। ऐसा करने से घर में कभी क्लेश नहीं होते हैं।
13. निर्जला एकादशी के दिन किसी गरीब को या मंदिर में तिल, वस्त्र, धन, फल और मिठाई का दान करें।
14. निर्जला एकादशी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पण करना चाहिए। पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
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