आयुर्वेदिक पौधे गर्भावस्था

101 धतूरा के औषधीय फायदे और उपयोग विधि- Health Benefits Of Datura In Hindi

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काला धतूरा (Kala Dhatura) को अन्य भाषाओं में मदन, उन्मत्त, शिवप्रिय, महामोही, कृष्ण धतूरा, खरदूषण, शिवशेखर, सविष, कनक, धुतूरा, सादा धुतूरा, धोत्रा, काला धतूरी, जन्जेलमापिल, ततूर, दतुरम, (kala dhatura) आदि नामो से जाना जाता है। ये एक क्षुप जाति की वनस्पति है। इसके पत्ते बड़े डंठल युक्त, नोकदार, अण्डाकृत होते है। इसके फूल घंटे के आकार के होते है, फूल का रंग बीच में सफ़ेद होता है। इनमे पांच पंखुडिया होती है।इसके फल गोल, कांटेदार और भीतर बहुत बीजो वाला होता है। इसके वनस्पति के सूखे पत्ते और बीज औषधि प्रयोग के काम आते है। इसके बीज कालेपन लिए भूरे रंग के, चपटे, खुरदरे और कड़वे होते है। इनमे कोई सुगंध नहीं होती, मगर कूटने पर एक प्रकार की उग्र गंध आती है।

धतूरा के फायदे, गुण, नुकसान और औषधीय प्रयोग – Kala Dhatura ke fayde

धतूरा के 60 लाजवाब फायदे और उपयोग विधि | Benefits of Datura

धतूरा के 60 लाजवाब फायदे और उपयोग विधि | Benefits of Datura

1- धतूरा के फायदे सुजाक – Benefits in gonorrhea

इसके पत्तो को पीसकर उसके रस को निकाल ले। और उसे घी निकाले हुए दूध के साथ पिलाने से सूजाक बहुत लाभ मिलता है।

2-कान के सूजन में लाभ – ear inflammation and pain

धतूरा के पत्तो के रस लेकर उसे आग पर रखकर गाढ़ा करे। इसे कान के पीछे की सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

3-कामशक्ति बढ़ाने में धतूरा उपयोगी – Datura is useful in increasing the sex power

धुतूरा के बीज, अकलकरा और लौंग इन तीनो चीजों की पीसकर गोलिया बना ले। इन गोलियों के खिलाने से कामशक्ति बढ़ती है।

4-बुखार में धतूरा के उपाय

काले धतूरे के बीज को पीसकर इसका चूर्ण बना ले। इसे आधी रत्ती के मात्रा में बुखार आने से पहले देते पर बुखार छूट जाता है और शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है।

5-गर्भधारण करने में धतूरा के फायदे- Get Pregnant Faster

इसके फलो को पीसकर चूर्ण बना ले और इसे घी और शहद में मिलाकर खिलाने से गर्भधारण करने में सहायता मिलती है।

6-वीर्यस्राव में लाभदायक – Beneficial in semen

kala dhatura के बीज और काली मिर्ची को पानी में पीसकर, काली मिर्च के बराबर गोलियां बना ले। इसमें से एक-एक गोली सुबह शाम सौंफ के अर्क के साथ ले। इक्कीस दिन में पुरानी से पुरानी अनैच्छिक वीर्यस्राव की बीमारी दूर हो जाती है। लेकिन इसमें खटाई और बाड़ी की चीजों से परहेज करने चाहिए।

7-क्षय रोग – Tuberculosis

kala dhatura के पत्तो का स्वरस एक रत्ती के मात्रा में देने से क्षय रोग में बहुत लाभदायक होता है।

8-गठिया रोग या हड्डी के दर्द में धतूरा के उपाय – Benefits of Arthritis or Bone Disease

इसके पत्तो को पीसकर सूती कपडे में पुल्टिस बांधकर या पेस्ट बनाकर दर्द वाली जगह पर लेप करने से गठिया और हड्डी के दर्द में बहुत लाभ मिलता है।

9-दांत के दर्द में धतूरा के औषधीय प्रयोग – Benefits of toothache

शिवशेखर के बीजो को पीसकर गोली बना ले। इसे दांत में हुए सूराख या दांत के दर्द वाले स्थान पर रखने से लाभ मिलता है।

10-दमा के दौरे पड़ने पर इसके लाभ –  home remedy for asthma attack

तम्बाकू, धतूरा, अपामार्ग और जवासा इन चारो चीजों को समान भागो में लेकर चूर्ण बना लेना चाहिए। इसमें से दो चुटकी चूर्ण चिलम में रख कर पीने से दमे का दौरा पड़ना बंद हो जाता है।

11-बादी के दर्द में धतूरा के औषधीय प्रयोग

काले धतूरे का पंचांग का रस निकालकर उसको तिल्ली के तेल में पचा देना चाहिए, इस तेल को मालिश करके ऊपर धतूरे के पत्ते से बाँध देने से बादी का दर्द मिट जाता है।

12- जोड़ों की सूजन – Swelling of joints

धतूरे के पिसे हुए पत्तों में शिलाजीत मिश्रित कर लेप करने से अण्डकोष की सूजन, पेट के अन्दर की सूजन, संधियों (जोड़ों) की सूजन और हडि्डयों की सूजन में बड़ा लाभ मिलता है।

13-  धतूरा के पत्तों की पोटली बांधने से नारू, बाला…

नारू की बीमारी में धतूरे के पत्तों की पोटली बांधने से बहुत ही लाभ मिलता है।Datura ke Fayde aur Nuksan in Hindi1

14- तिजारी

धतूरे के पत्तों का 5-6 बूंद रस में लगभग 25 ग्राम दही मिलाकर पिलाने से 1 या दो बार में तिजारी चली जाती है।

15- धतूरा के पत्तों की लुगदी से बिच्छूदंश : Scorpion Stinger:

धतूरा के पत्तों की लुगदी, बिच्छू दंश पर लगाने से आराम मिलता है।

16- धतूरा के पत्तों की पोटली (घाव )

जिस घाव पर गहरा पीप या पपड़ी जम गया हो उसको गुनगुने पानी की धार से धोकर दिन में 3-4 बार धतूरा के पत्तों की पोटली बांधनी चाहिए।

17- कान की सूजन, दर्द धतूरा का रस – Ear swelling, pain

• धतूरे के पत्तों के रस को आग पर गाढ़ा करके, कान के पीछे की सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।
• कान में यदि मवाद बहता हो तो 8 भाग सरसों का तेल, 1 भाग गंधक, 32 भाग धतूरा के पत्तों का रस मिलाकर गर्म कर लें, फिर इस तेल की एक बूंद कान में सुबह-शाम डालने से कान के दर्द में आराम आता है।
• धतूरे के पत्तों को गर्म करके 2-3 बूंदों को कान में टपकाने से कान दर्द से छुटकारा मिलता है।
• 400 ग्राम धतूरा का रस, धतूरा के रस में चटनी की तरह पिसी हुई हल्दी 25 ग्राम और तिल का तेल 100 ग्राम लेकर हल्की आग पर पका लेते हैं। तेल शेष रहने पर छान लेते हैं। यह कान के और नाड़ी के घाव के लिए लाभकारी होता है।
• जिस कान में दर्द हो उसके अन्दर धतूरे के ताजे पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस की 2 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

18- खालित्य (गंजापन) – Alopecia (baldness)

धतूरे के पत्तों के रस का लेप करने से खालित्य (गंजेपन का रोग) नष्ट हो जाता है।

19-धतूरा की जड़ों के चूर्ण पिटका

धतूरा की जड़ों के चूर्ण को पानी में पीसकर बाधंने से पिटका नष्ट हो जाती है।

20- धतूरा के बीजों की राख हाथ-पैरों में पसीने की अधिकता Hypertension

• धतूरे के बीजों की राख बनाते हैं। फिर इसे 1-1 ग्राम की मात्रा में 8-10 दिन रोजाना एक बार सेवन करने से हाथ-पैरों में अधिक पसीना आने का रोग दूर हो जाता है।

• लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग धतूरे के बीजों को खाने से हाथ-पैरों में पसीना आने वाले रोगी को लाभ मिलता है।

21- कुत्ते के काटने पर धतूरे के फायदे- Dog Bites: Preventing Infections and Treating Injuries

  • धतूरे के पत्तों के रस में लाल मिर्च को पीसकर काटे हुए स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

22- धतूरा के पंचांग दमा या श्वास रोग -Asthma or breathing disease

  • धतूरे के पंचांग को पीसकर सुखा लेते हैं और चिलम में रखकर धूम्रपान की तरह उपयोग करते हैं। इससे श्वास रोग (दमा) नष्ट हो जाता है।
  • धतूरे के पत्ते का भी धूम्रपान करने से खांसी खत्म हो जाती है।
  • धतूरे के दूध को छाती पर लगाने से श्वास (दमा) और पुराना दिल का रोग मिट जाता है।
  • धतूरे के सूखे पत्तों को चिलम में रखकर पीने से तीव्र वेग का श्वास (दमा) भी सामान्य हो जाता है।

धतूरे के बीज और ग्राम अफीम

  • dhature ke beej ke fayde -6 ग्राम धतूरे के बीज और 2 ग्राम अफीम को पानी में पीसकर 33 गोलियां कालीमिर्च के समान आकार की बना लेते हैं और इसे छाया में सुखा लेते हैं। दिन में 3 बार 1-1 गोली चूसने से दमा रोग ठीक हो जाता है।
  • धतूरे के फलों की राख लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की मात्रा में लेकर शहद के साथ सेवन करने से दमा खत्म हो जाता है।
  • धतूरे के फूल पर फल आते हैं। 1 फल को तोड़कर ले आएं और इसे 2 बराबर हिस्सों में काट लेते हैं। आधे भाग के बीज निकालकर फेंक देते हैं और उसमें छोटी इलायची का चूर्ण अच्छी तरह से भर लेते हैं। दूसरे भाग के बीज नहीं निकालने हैं।
  • अब दोनों हिस्सों को मिलाकर धागे से लपेटकर पहले की तरह जोड़ देते हैं। इसके ऊपर बारीक कपड़ा लगाकर ऊपर गीली मिट्टी से पूरे फल पर लेप कर कण्डे (उपले) को जलाकर उसके बीच अच्छी तरह से रख देते हैं, जब कण्डे अच्छी तरह जल जाएं तथा ठण्डी राख शेष रहे तब इस कपड़े में मिट्टी में लिपटे धतूरे के फल को निकालकर सावधानी से साफ करके मिट्टी आदि हटाकर फल को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लेते हैं। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग तक की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लेते हैं।
  • अब 2-3 गोली श्वास या दमे के रोगी को शहद में मिलाकर दें। इस दवा के उपयोग से रोगी शीघ्र लाभ महसूस करने लगेगा। कुछ दिनों तक लगातार प्रयोग करने से दमा रोग नष्ट हो जाता है।
  •  धतूरा के आधे सूखे हुए पत्तों के चूर्ण को लगभग आधा ग्राम की मात्रा में लेकर बीड़ी पिलानी चाहिए। यदि 10 मिनट तक दमें का दौरा शान्त न हो तो अधिक से अधिक 15 दिनों बाद दूसरी बीड़ी पिलानी चाहिए। तब भी आराम न हो तो तीसरी बीड़ी नहीं पिलानी चाहिए। जिन्हें धतूरा अनुकूल न हो उन्हें इसे नहीं देना चाहिए।

23- धतूरे के पत्ते पर तेल अण्डकोष की सूजन – Swelling of the ovaries

  • धतूरा के पत्ते पर तेल लगाकर अण्डकोषों पर बांधने से अण्डवृद्धि जल्द मिट जाती है।

24- धतूरे के बीज का चूर्ण  पुनरावर्तक ज्वर – Recurrent fever

धतूरा के बीज का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लेकर 1 ग्राम तक दही के साथ बुखार आने से पहले खिला दें तो बुखार दुबारा नहीं चढ़ता है। इस प्रयोग से पहले बीजों को लगभग 12 घंटे तक गाय के मूत्र में भिगोकर रख दें।

25-अण्डकोष के एक सिरे का बढ़ना

धतूरे के ताजे पत्ते पर सरसों के तेल के लेप को आग में सेंक दें। फिर उसे अण्डकोष पर बांध दें। रोजाना रात में सोते समय इस उपचार को करें। इससे लाभ होता है।

26-फेफड़ों की सूजन – pneumonia

फेफड़ों की सूजन में धतूरा के पत्तों का लेप छाती और पीठ पर या पत्तों के काढ़े से मालिश करने से लाभ होता है।

27-आंखों का दर्द – Eye pain

अगर आंखों में दर्द हो रहा हो तो पके धतूरे के पत्ते का रस अथवा नीम के कोमल पत्तों का रस या दोनों के पत्तों का रस एक साथ मिलाकर दोनों कानों में डालने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है।

28- खांसी – cough

धतूरे के पत्ते, भांग के पत्ते और कलमी शोरा को बराबर मात्रा में लेकर पीस लेते हैं। श्वास (सांस) का दौरा उठने पर इस 2-3 चुटकी चूर्ण को कटोरी में डालकर जला लेते हैं जब कटोरी में से धुंआ निकलने लगे तो तो धुंए को मुंह के द्वारा खींचने से खांसी ठीक हो जाती है।

29- अफारा (गैस का बनना) – Afara (gas formation)

धतूरा के पत्तों का लेप या पत्तों के काढ़े से सेंकने या पत्तों के तेल से मालिश करने से पेट की गैस दूर होती है।

30- धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग  नपुंसकता – impotency

धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग को बराबर मात्रा में पीसकर चने के बराबर 1-1 गोलियां बनाकर रोज सुबह-शाम लेने से नपुंसकता के रोग में लाभ होता है।

31- लिंग शिथिलता (ढीलापन) पुरुष रोग – Male disease

धतूरा के 15 फलों को बीज सहित लेकर पीसकर बारीक चूर्ण को 20 किलोग्राम दूध में डालकर दही जमा देते हैं। अगले दिन दही को मथकर घी निकाल लेते हैं। इस घी की 125 ग्राम की मात्रा पान में रखकर खाने से बाजीकरण होता है तथा लिंग पर घी की मालिश करने से उसकी शिथिलता (ढीलापन) दूर हो जाती है।

32- धतूरा का पीला पत्ता कान से कम सुनाई देना – Less hearing

धतूरा का पीला पत्ता (बिना छेद वाला) को गर्म करके उसका रस निकाल लें। इस रस को लगातार 15 दिन तक कान में डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।

33- धतूरे की जड़  गर्भपात रोकना – Preventing abortions

• यदि बार-बार गर्भ गिर जाता है तो धतूरे की जड़ चार अंगुल के बराबर लेकर कमर में बांधने से गर्भ स्थिर हो जाता है।
• काले धतूरे की जड़ अथवा अनार की जड़ को रविवार को सफेद कपड़े में बांधकर कमर में धारण करने से गर्भपात का डर समाप्त हो जाता है।

34- धतूरे के फल का रस कमरदर्द – lumbar

200 मिलीमीटर धतूरे के फल का रस, 200 मिलीमीटर आक के पत्तों का रस, 200 मिलीमीटर एरण्ड के पत्तों का रस, 800 मिलीमीटर तिल्ली का तेल। सबको मिलाकर अच्छी तरह से पकाएं। फिर इसे छानकर शीशी में भर लें। इस तेल के कमर पर मालिश से कमर का दर्द सही हो जाता है।

35- धतूरा के फायदे योनि में दर्द – Vaginal pain

धतूरा के पत्तों को पीसकर उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक और घी मिलाकर कपडे़ की पोटली बना लें। रात में सोने से पहले पोटली योनि में रखने और सुबह निकाल लेने से दर्द में आराम मिलता है।

36-बहरापन – Deafness

धतूरे के पीले पत्तों को हल्का सा गर्म करके उसका रस निकालकर 2-2 बूंदे करके कान में डालने से बहरेपन का रोग दूर हो जाता है।

37- स्तनों का दर्द और सूजन – Breast pains and swelling

38- धतूरा के बीज दर्द : dhature ke beej ke fayde–

  • लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग धतूरे के बीज को दही के साथ खाने से वेदना (दर्द) कम होती है और उल्टी भी नहीं होती है।
  • प्रयोग से पहले धतूरे के बीज को 12 घंटे तक गाय के मूत्र में या दूध में उबालकर शोधन कर लें।

39- धतूरे के पत्तों पर एरण्ड का तेल स्तनों का कठोर होना – small hard lump in breast

धतूरे के पत्तों पर एरण्ड का तेल गर्म-गर्म करके स्तनों के उस भाग पर बांधना चाहिए जहां दर्द हो इससे स्तन कठोर हो जाते हैं।

40- धतूरा  गुड़ कील, कांटा चुभना

  • जब कोई कील, कांटा आदि चाहे कितना भी कठोर क्यों न हो, शरीर के अन्दर कहीं चुभ जाये तो धतूरे को गुड़ के साथ खिलाने से कांटा पानी की तरह गल जायेगा।

41-पेट के कीड़े – Tapeworms

  • धतूरे के पत्तों को पीसकर बने रस को सरसों के तेल में मिलाकर सिर की मालिश करने से सिर में मौजूद जुंए समाप्त हो जाते हैं।
  • धतूरे के पत्तों का पेस्ट (लुगदी) या धतूरे के पत्तों के रस के साथ पकाये हुए तेल की मालिश करने से सिर की जुएं तुरन्त समाप्त हो जाती हैं।
  • 3-4 बूंद धतूरे के पत्तों का रस, आधा-आधा चम्मच अजवायन और शहद में मिलाकर सोते समय रोगी को पिलाने से कुछ ही दिनों में पेट के सारे कीडे़ मल के साथ निकल जाते हैं।

42-धतूरा का टिंचर (टेटनस)

  • 3 से 5 बूंद धतूरा का टिंचर (टिंचर स्ट्रामोनियम) टेटनस के रोगी को उग्रता के अनुसार 3-4 दिन दूध में मिलाकर लेने से रोगी ठीक हो जाता है।

43- स्तनों में दूध का अधिक मात्रा में होना

  •  धतूरा के पत्तों को हरिद्रा में मिलाकर स्तनों पर बांधने से स्तन में आने वाली सूजन मिट जाती हैं।
  • धतूरे के पत्तों को गर्म करके दिन में 2-3 बार सूजन से पीड़ित स्तन पर बांधने से दूध कम हो जाता है।

44- अरुंषिका (वराही)

  • धतूरे या नागरबेल के पत्तों के रस में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर उसमें कपड़े या रूई को भिगोकर सिर पर बांधने से अरुंषिका (सिर की छोटी-छोटी फुंसियों) में लाभ मिलता है। इससे सिर की जूं और कीड़े भी मर जाते हैं।
  • धतूरे के पत्तों को सरसों के तेल में पकाकर तेल को छान लें, और इस तेल को सिर में लगाने से अरुंशिका रोग (सिर की छोटी-छोटी फुंसियां) ठीक हो जाती है।

45- स्तनों की पीड़ा (धतूरे के पत्तों का लेप )

हल्दी और धतूरे के पत्तों का लेप करने से स्तनों की पीड़ा नष्ट हो जाती है।

46- अंगुलबेल (डिठौन)

  • धतूरे के पत्तों को पीसकर, उसमें ‘शहद मिलाकर लेप करने से मवाद वाली अंगुली में छेद हो पीव निकल जाता है। इससे रोगी की अंगुली जल्द ठीक हो जाती है।

47- पेट में दर्द होने पर धतूरे के बीज…

धतूरे के बीज को दूध में अच्छी तरह से उबालकर शुद्ध करे या गाय के पेशाब मे लगभग 12 घण्टें तक भिगो कर रख लें, फिर इसे 6 मिलीग्राम की मात्रा में दही को मिलाकर खाने से पेट के दर्द में आराम होकर दर्द ठीक हो जाता हैं।

48- उपदंश में धतूरे की जड़

  • लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग धतूरे की जड़ को पान में रखकर खाने से उपदंश से सम्बन्धी रोग मिट जाते हैं।

49- फोड़ा

  • पीला धतूरा (सत्यानाशी) के बीजों को ठण्डे पानी में पीसकर फोड़े और फुन्सियों पर लेप की तरह से लगाने से सिर का फोड़ा ठीक हो जाता है।

50- सरसों के तेल में धतूरे के फल हाथ-पैरों की अकड़न

हाथ व पैरों की अकड़न व दर्द में धतूरे के 2 फल काटकर 125 ग्राम सरसों के तेल में जलाकर फिर ठण्डा करके छान लें। इस तेल की मालिश करने से हाथ-पैरों की अकड़न ठीक हो जाती है।

51- हाथ-पैरों की ऐंठन (सायटिका)

आक, पीलवान, काला धतूरा और लाल एरण्ड के 5-5 पत्ते गर्म आग में जलाकर तिल के तेल में मिलाकर उसकी मालिश करके धूप में बैठने से सायटिका मिट जाती है।

52-नहरूआ (स्यानु)

धतूरे के पत्ते को सिल पर पीसकर लगाने से नहरूआ का रोग ठीक होता है।

53- मिर्गी (अपस्मार)

धतूराके पत्तों का रस रोगी को मिर्गी की तीव्रता के अनुसार देने से मिर्गी दूर हो जाती है।

54- फेवस और फंगस के रूप में

धतूरा के पत्तों से बने तेल का लेप करने से ऐसे चमड़ी के रोगों में बहुत लाभकारी होता है।

55- फीलपांव (गजचर्म)

फीलपांव के रोगी को धतूरे की जड़, एरण्डी की जड़, सम्भालू की जड़, सांठी की जड़, सहजना की जड़ तथा सरसों सबको बारीक पीसकर लेप करने से फीलपांव रोग दूर हो जाता है।

56- साइटिका – Datura benefits for Cytica in hindi

धतूरे के पत्तों का काढ़ा बनाकर पैरों की सिंकाई करने तथा पत्तों से बने तेल की मालिश करने से रोगी का रोग दूर हो जाता है।

57- धतूरे के बीज और अकरकरा लिंग दोष – Datura benefits for Penis defect

5-5 ग्राम धतूरा के बीज और अकरकरा, 3 ग्राम अफीम और 20 ग्राम काली मिर्च को पीसकर छानकर उसमें 40 ग्राम चीनी मिलाकर पानी डालकर उसकी मटर के बराबर गोलियां बनाकर रखें। 1 गोली सुबह-शाम पानी से लेने से लिंग की इिन्द्रयों के दोष दूर होते हैं।

58- सिर का दर्द – Datura benefits for Headache in hindi

3-4 बीज धतूरे के बिना चबाये निगलने से पुराने से पुराना सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

59- नाड़ी का दर्द – Datura benefits for Pulse pain

नाड़ी के दर्द में धतूरा के पत्तों का लेप बनाकर या पत्तों का काढ़ा बनाकर सिंकाई करने से या पत्तों से बने तेल की मालिश करने से लाभ होता है।

60-बच्चों के आंखों में दर्द – Pain in the eyes of children

जिस दिन आंखों में दर्द हो, उसी दिन धतूरे की पत्तियों का रस निकालकर और थोड़ा गर्म करके कान में डालें। अगर बांई आंख में दर्द हो तो दाहिने कान में डाले और अगर दाहिनी आंख में दर्द हो तो बायें कान में डालें।

61- सिर दर्द : datura seeds benefits

धतूरा के 2-3 बीज रोजाना निगलने से पुराने सिर का दर्द दूर हो जाता है।

62- सिर की जुएं व लीख

  • सरसों का तेल 4 किलो, धतूरे के पत्तों का रस 16 किलो को लेकर हल्की आग पर पकाते हैं जब तेल मात्र शेष रह जाए तो बोतल में भरकर रख लें। इस तेल को बालों में लगाने से सिर की जूं मर जाती है।
  • धतूरे के पत्तियों के रस को सिर के बालों की जड़ों में लगाने से जुएं व लीखे नष्ट हो जाती हैं। रस में कपूर को मिलाकर लगाने से अधिक प्रभावशाली असर होता है।

63- उन्माद (पागलपन) – Mania (madness)

  • काले धतूरे के शुद्ध बीजों को पित्त पापड़ा के रस में घोंटकर पीने से उन्माद (पागलपन) शान्त हो जाता है।
  • शुद्ध धतूरे के बीज और कालीमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर बारीक करके पानी के साथ उबाल करके लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की गोलियां बना लेते हैं। यह 1-2 गोली सुबह व रात को मक्खन के साथ देने से नया उन्माद रोग (पागलपन) समाप्त हो जाता है।
  • या उन्माद रोग मस्तिक आघात, शराब या गांजा के सेवन या धूप में घूमने से या प्रसूतावस्था में हुआ हो जिसमें नींद न आती हो उस अवस्था में इस उन्मत्त वटी का सेवन कराने से थोड़े ही दिनों में मन स्वस्थ होकर शान्त हो जाता है।

64- आंखों की जलन और सूजन – Eye irritation and swelling

धतूरे के ताजे पत्तों का रस आंख पर लेप करने से आंखों का लालपन दूर हो जाता है तथा सूजन और जलन समाप्त हो जाती है।

65- स्तनों की सूजन – Swelling of the breasts

  • स्त्री के स्तनों की सूजन में धतूरे के पत्तों को गर्म करके बांधने से आराम मिलता है।
  • जिस स्त्री के दूध अधिक होने से स्तन में गांठे हो जाने का डर हो उसके दूध को रोकने के लिए स्तन पर धतूरे के पत्ते बांधने से लाभ होता है।

66- हैजा (कालरा)

  • हैजे में केवल धतूरा की केसर बताशे में रखकर निगल जाने से हैजा नष्ट हो जाता है।
  • हैजा रोग में धतूरे के पत्ते रस 5 से 6 चम्मच दही में मिलाकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

67- गर्भधारण

धतूरे के फलों का चूर्ण घी और शहद में मिलाकर चाटने से गर्भ ठहर जाता है।

पागलपन में धतूरा के फायदे एवं सेवन विधि – Datura’s benefits and consumption method in madness

  • उन्माद (पागलपन) में कृष्ण धतूरा के शुद्ध बीजों को पित्त पापड़ा के स्वरस में घोंटकर पीने से पागलपन (madness) की उत्दंडता शांत होता हैं।
  • शुद्ध धतूरा के बीज और काली मिर्च बराबर लेकर, महीन चूर्ण करके 100-100 मिलीग्राम की गोली बना लें। जल के साथ गर्म करके 1-1 रत्ती की गोली बनायें। 1-2 गोली सुबह-शाम को मक्खन के साथ सेवन करने से उन्माद रोग (psychosis) शांत हो जाता हैं।
  • पागलपन मस्तिष्क में आघात, जन्य अथवा शराब, गंजाम, सूर्य के ताप में भ्रमण आदि से या प्रसूतावस्था में हुआ हो जिसमें नींद न आती हो, उस अवस्था में इस उन्मत्त वटी का सेवन कराने से थोड़े ही दिनों में मन स्वस्था होकर उत्तेजनहीन हो जाता हैं।

सूजन में में धतूरा के फायदे एवं सेवन विधि – Dutura trees and flower properties

सूजन (inflammation) में धतूरा के पिसे हर पत्तों में शिलाजीत मिश्रित कर, लेप करने से अंडकोष की सूजन, पेट के अंदर की सूजनम फुफ्फुस के पर्दे की सूजन, संधियों की सूजन और हडिड्यों की सूजन में शीघ्र लाभ होता हैं।

धतूरे के बीज खाने के नुकसान

अधिक मात्रा में धतूरे का सेवन करना विष है। ये अपने बेहद खुश्की की वजह से बदन को सुन्न कर देता है। सिर में दर्द पैदा करता है और पागलपन, बेहोशी पैदा करके व्यक्ति की जान ले लेता है। काला धतूरा का सेवन करने से पहले इसकी कौन से बीमारियों में कितनी मात्रा लेनी चाहिए जांच ले। आयुर्वेद चिकित्सको के अनुसार इसके पत्तो के चूर्ण की मात्रा एक ग्रेन तक, बीजो के चूर्ण की मात्रा आधे ग्रेन तक और इसके सत्व की मात्रा पावग्रेन तक है।

स्वभाव : धतूरा गर्म प्रकृति का होता है।

  • हानिकारक : धतूरा नशा अधिक लाता है और प्राणों का भी नाश कर देता है।
  • धतूरे के पत्ते और बीज काफी विषैले होते हैं।
  • धतूरे की निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने पर मुंह, गले, आमाशय में तेज जलन और सूजन पैदा होती है।
  • व्यक्ति को तेज प्यास लगती हैं। त्वचा सूख जाती है। आंखे व चेहरा लाल हो जाता है। शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
  • चक्कर आने लगता है। आंखों के तारे फैल जाते हैं और व्यक्ति को एक वस्तु देखने पर एक से दिखाई पड़ने लगती है।
  • रोगी रोने लगता है। नाड़ी कमजोर होकर अनियमित चलने लगती है। यहां तक की श्वासावरोध होकर या हृदयावरोध होकर मृत्यु तक हो सकती है।
  • धतूरे के विषाक्तता के लक्षण मालुम पड़ते ही तुरन्त ही चिकित्सक की सेवाएं लेनी चाहिए।

दोषों को दूर करने वाला : शहद, मिर्च, सौंफ धतूरा के दोषों को नष्ट करते हैं।

तुलना : धतूरा की तुलना भांग के बीज से की जाती है।

मात्रा : धतूरा के सेवन की मात्रा लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग तक होती है।

गुण : धतूरा नशा, गर्मी, गैस को बढ़ाता है, बुखार और कोढ़ को नष्ट करता है तथा सिर की लीखों व जुओं को खत्म करता है।

धतूरे के जहर को शान्त करने के उपाय :

  • धतूरे के बीज या फल को खा लेने पर शरीर में बड़ी गर्मी पैदा हो जाती है और जलन के साथ खुश्की होने लगती है। धीरे-धीरे बेहोशी भी आने लगती है। धतूरे के जहर की सबसे उत्तम औषधि पलाश (ढाक) है। अगर धतूरे का फल किसी ने खा लिया हो तो ढाक का फूल खिलाइये। पत्तों के जहर में ढाक के पत्तों का रस पिलाइये। धतूरे के जहर में पलाश (ढाक) के बीज खिलाना चाहिए। इससे बढ़कर कोई अन्य उपयोग नहीं है।
  • कपास का पंचांग मिल जाए तो पानी में घोटकर रोगी को पिला दीजिए इससे धतूरे का जहर शान्त हो जाता है।
  • सहजना की जड़ को पानी में पीसकर छान लें। इस दवा को थोड़े शहद के साथ मिलाकर पीने से शरीर के भीतरी भाग के फोड़े, जिगर तिल्ली आदि के रोगों में जरूर फायदा होता है। यह आरोग्यवर्द्धिनी वटी पुनर्नवादि काढे़ के साथ देनी चाहिए।
  • कपास के फूल और पत्ते इनका शीत निर्यास देने से धतूरे का जहर समाप्त हो जाता है।

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