आयुर्वेदिक पौधे

अफीम खाने के फायदे और नुकसान – Afeem Benefits and Side effects

अफीम (Afeem)- Opium Benefits and Side effects in hindi
अफीम (Afeem)- Opium Benefits and Side effects in hindi

अफ़ीम (Opium ; वैज्ञानिक नाम : lachryma papaveris) अफ़ीम के पौधे पैपेवर सोमनिफेरम के ‘दूध’ (latex) को सुखा कर बनाया गया पदार्थ है, जिसके सेवन से मादकता आती है। इसका सेवन करने वाले को अन्य बातों के अलावा तेज नीद आती है। अफीम में १२% तक मार्फीन (morphine) पायी जाती है जिसको प्रसंस्कृत (प्रॉसेस) करके हैरोइन (heroin) नामक मादक द्रब्य (ड्रग) तैयार किया जाता है। अफीम का दूध निकालने के लिये उसके कच्चे, अपक्व ‘फल‘ में एक चीरा लगाया जाता है; इसका दूध निकलने लगता है, जो निकल कर सूख जाता है। यही दूध सूख कर गाढ़ा होने पर अफ़ीम कहलाता है। यह लसीला (sticky) होता है।

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अफ़ीम

अफ़ीम

नाम
1हिंदीअफीम
2अंग्रेजीOpium
3संस्कृतअहिफेन
4पंजाबीਅਫੀਮ
5गुजरातीઅફીણ, अफीण
6मराठीअफू, आफीमु
7अरबीاللودنوم مستحضرأفيوني, लब्नुल, खखास
8बंगालीঅহিফেনের আরক
9उर्दूاوپنیم
10तेलगुనల్లమందు ద్రావకం

 

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यह भारत में विशेषत: उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम और मध्यप्रदेश में पैदा होती है। पश्चिमोत्तर प्रान्त में इसकी खेती की जाती है।

  • अफीम के गुण : यह स्वाद में कड़वी, कसैली, पचने पर कटु तथा गुण में रूखी होती है। इसका मुख्य प्रभाव नाड़ी-संस्थान पर मदकारी (नशा लानेवाला) होता है। यह नींद लानेवाली, वेदना-रोधक, श्वास-केन्द्र की अवसादक, शुक्रस्तम्भक और धातुओं को सुखानेवाली है।

मुख्यतः फूलों के रंगों के अनुसार यह तीन प्रकार की होती है :

  1. पिलाई लिये सफेद (खसखस सफेद)
  2. लाल (खसखस मन्सूर)
  3. काला या नीला (खसखस स्याह) ।

रासायनिक संघटन : इसमें मार्फिन, नर्कोटीन, कोडीन, एपोमॉर्फीन, आपिओनियन, पापावरीन आदि क्षारतत्त्व (एल्केलाइड) तथा लेक्टिक एसिड, राल, ग्लूकोज, चर्बी व हल्के पीले रंग का निर्गन्ध तेल होता है।

असली अफीम की पहचान

अफीम के औषधीय गुण, सेवन विधि 

गर्भस्राव को रोकने में – In prevention of eclampsia in hindi

40 मिलीग्राम अफीम पिण्ड खजूर के साथ मिलाकर दिन में 3 बार खिलाएं। गर्भस्राव शीघ्र रुकेगा।

दस्त के उपचार में – Opium Benefits of diarrhea in hindi

चार रत्ती अफीम एक छुहारे के अन्दर रख उसे आग में भुने। फिर उसे पीसकर, मूँग के बराबर 1-1 रत्ती की गोली बना लें। इसके सेवन से मरोड़ देकर आँवसहित होनेवाले दस्तों में लाभ होता है। बच्चों को आधी मात्रा देनी चाहिए। पोस्त (फल के छिलके या ‘पोस्त-डोंडा’) उबालकर पीने से अतिसार और पतले दस्त रुक जाते हैं। अधिक मात्रा में यह मादक हो जाता है।

मस्तक पीड़ा में अफीम की दवाएं

1 ग्राम अफीम और दो लौंग पीसकर लेप करने से बादी और सर्दी की मस्तक पीड़ मिटती है।

नेत्र रोग में अफीम की दवाएं

आँख के दर्द और आँख के दूसरे रोगों में इसका लेप बहुत लाभकारी है।

नकसीर में अफीम की दवाएं

अफीम और कुंदरू गोंद दोनों बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर सुंघाने से नकसीर बंद होती है।

केश में अफीम की दवाएं

इसके बीजों को दूध में पीसकर सिर पर लगाने से इसमें होने वाले फोड़े फुंसियां एवं रुसी साफ़ हो जाती है।

अनिद्रा की शिकायत –Insomnia Complaint in hindi

गुड़ और पीपलामूल का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिला लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में अफीम की 80 मिलीग्राम मात्रा मिलाकर रात्रि में भोजन के बाद सेवन कराएं।

अफीम के बीजों के फायदे – Benefits of Afeem seeds

अफीम के बीजों के कई फायदे हैं। अफीम के बीजों में 44 से 50 प्रतिशत तक ऑयल होता है, इन्हें दबाकर तेल निकाला जाता है। इस ऑयल में मुख्यतः लिनोलिक और ओलिक फैटी एसिड होता है। अफीम के बीजों के फायदे अफीम के बीज बालों के लिए बहुत लाभकारी हैं। ये बाल झड़ने, दो मुहे बाल, डैंड्रफ और बालों की अन्य कई बीमारियों में मददगार हैं। इन्हें अन्य सामग्रियों के साथ बालों में लगाया जा सकता है क्यों कि इनमें मिनरल्स और असंत्रप्त फैटी एसिड की अधिकता होती है।

केवल बालों के लिए ही नहीं ये त्वचा के लिए भी फायदेमंद हैं। ये एक शानदार मोश्चुराइजर हैं। यह खुजली और जलन संवेदना में आराम प्रदान करते हैं। यह स्क्रब के लिए अच्छी चीज है। अफीम के बीज एक्ज़िमा के इलाज में भी कारगर है। अफीम के बीजों के फायदे यदि आपको नींद नहीं आने की समस्या है तो ये आपकी सोने में मदद करेंगे। इसे अपने खाने में शामिल करें और अपनी नसों को आराम करने दें और मजे से सोएँ।

 

अफीम के ये आयुर्वेदिक फायदे – Benefits of Afeem in Hindi

अफीम का अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर सांवला हो जाता है। अफीम दोषों को दूर करने वाला होता हैं। भांग के बीज अफीम के दोषों को खत्म कर देती हैं। आयुर्वेद के अनुसार अफीम की प्रकृति गर्म और प्रभाव में नशीली होने के कारण कफ-वात शामक, पित्त प्रकोपक, नींद लाने वाली, दर्दनाशक, पसीना लाने वाली, शारीरिक स्रावों को रोकने वाली होती है।

दंतशूल में अफीम की दवाएं

16 मिलीग्राम अफीम और 125 मिलीग्राम नौसादर, दोनों को दाड़ में रखने से दाड़ की पीड़ा मिटती है और दांत के छेद में रखने से दंतशूल मिटता है।

कर्णशूल में अफीम की दवाएं

अफीम की 65 मिलीग्राम भस्म गुलाब के तैल में मिलाकर कान में टपकाने से पीड़ा मिटती है।

स्वर भंग में अफीम की दवाएं

अफीम के डोडे और अजवायन को उबालकर गरारे करने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

आमातिसार – Amatisar in hindi

भुनी हुई लहसुन की कली में 60 मिलीग्राम अफीम मिलाकर खाने से आमातिसार में तुरंत राहत मिलती है।

  • प्रतिरोध : अफीम के अधिक प्रयोग से तन्द्रा, निद्रा, हृदय का अवसाद होने लगे तो तुरन्त राई-नमक मिलाकर दें तथा वमन करा दें। अरहर की कच्ची दाल पानी में पीसकर या हींग पानी में घोलकर पिला देने से भी तुरन्त आराम पहुँचता है।

सावधानी : यह मादक द्रव्य है। अधिक प्रयोग से विषाक्त प्रभाव सम्भव है। अत: अत्यावश्यक होने पर ही इसका प्रयोग करें। फिर भी कभी अधिक मात्रा में नहीं। अतिआवश्यक होने पर ही बच्चों, वृद्धों तथा सुकुमार स्त्रियों को बड़ी सावधानी एवं कम मात्रा में ही इसे दिया जाय।

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